Wednesday, 9 December 2020

मुहब्बत की

मैंने तो उम्र भर ....इबादत की,
उसने तौहीन की ..मुहब्बत की
ये जो अन्दर .तड़प सी रहती है,
बस उसी दर्द की हिफाज़त की....
---------------------------------- 
maine to umr bhar ibaadat kii,
usne tauhiin kii muhabbat kii,
ye jo andar tadap sii rahti hai,
bas ....usii dard kii hifazat kii....
उर्मिला माधव...
9.12.2014....

Thursday, 26 November 2020

भूल करते हैं

हम जो रह-रहके भूल करते हैं,
अपनी इज्ज़त को धूल करते हैं,
जब नुमाइश ग़मों की होती हैं, 
ज़िन्दगी बस फ़िज़ूल करते हैं,
उर्मिला माधव...
२६.११.२०१३..

देख भाल के

dil ke muamle hain,zaraa dekh bhaal ke,
rrakh denge log aapki izzat uchhaal ke,
उर्मिला माधव

सब्र गया

हुजूम-ए-रंज की इफ़रात हुई सब्र गया,
सब्र जब टूट गया ख़्वाब तहे क़ब्र गया,
उर्मिला माधव
26.11.2016

Tuesday, 13 October 2020

laut aana

Chale jaane wale, kabhi laut aanaa
Wo nagme suhane hamen phir sunana,
Nahin koii saani tire husne fun ka,
Ke dekha hai hamne ye sara zamana..
Urmila Madhav

Monday, 5 October 2020

नहीं कहते

आह को अजनबी नहीं कहते,
इश्क़ को ज़िन्दगी नहीं कहते,

दिल को महदूद रखना अच्छा है
ग़ैर से ग़म कभी नहीं कहते,

गुफ़्तगू में हज़ार ख़म निकलें,
उसको हम सादगी नहीं कहते,

गर चे है फ़िक़्र दीनो दुन्या की,
उसको आवारगी नहीं कहते,

अपनी तबियत में जो फ़क़ीरी है,
इसको बेचारगी नहीं कहते,

फ़र्क़ समझे जो रेत पानी का,
हम इसे तिशनगी नहीं कहते,
उर्मिला माधव

Sunday, 4 October 2020

मुअय्यन है

ज़िन्दगी कब तलक मुअय्यन है,
लोग ....रह-रह के आज़माते हैं,

जिसकी बुनियाद ही नहीं कुछ भी,
उस पे सब ......अटकलें लगाते हैं,

Zindagi kab talak muayyan hai,
Log rah-rah ke aazmate hain,

Jiski buniyad hi nahin kuchh bhi
Us pe sab atkalen lagaate hain,

Urmila Madhav
5.10.2017

बदलती है

ज़िन्दगी राह भी बदलती है,
कब किसी नक्श ए पा पे चलती है.
जो भी आहट है उसकी साँसों की,
अपने महबूब से निकलती है,
उर्मिला माधव

बता दूं क्या ?

तेरी तस्वीर भी लगा दूँ क्या?
तू मिरा कौन है बता दूं क्या?

मेरी आँखों में ख़ाब किसका है,
सारी दुनिया को ये जता दूँ क्या?
उर्मिला माधव

Saturday, 19 September 2020

दुनियां में

बंसी बारे लाज राखियो दुनियां में,
हारूँ नईं मैं बात राखियो दुनियां में,

कौन काऊकौ संग देतु ऐ, मुस्किल में,
तू बस अपनों साथ राखियो दुनियां में,

लौट फेर कें, तेरौ ई नाम मुनव्वर बस,
जे जलवा दिन रात राखियो दुनियां में,
उर्मिला माधव

बिन नें तौ

ओछी हरक़त भारी कर दई बिननें तौ,
अपनेई घर की थारी भर दई बिननें तौ,

जीभ ते बस ईमान दिखामें दुनियां कूँ,
मूड़न पे बेगारी धर दई बिननें तौ,

बीच गैल में पत्थर धर कें चल दीन्हे,
रस्तन कूँ लाचारी कर दई बिननें तौ,

अपनी आप बड़ाई कर कें नाच रहे,
बे-मतलब बीमारी कर दई बिननें तौ,

इक दूजे कौ ताज सम्हारें फिर रए ऐं,
सब दुनियां की ख्वारी कर दई बिननें तौ,
उर्मिला माधव
18.9.2019

Monday, 14 September 2020

क़ाबू में रखनी चाहिए

एक शेर....

बेअदब होना मुहब्बत की बहुत तौहीन है,
है यही बेहतर जुबां क़ाबू में रखनी चाहिए....

हरजाई है

Dil yahi kahta rahaa ......wo aadatan harjaai hai,
Phir bhi hamne uski khaatir anjuman sajwaai hai...
..
दिल यही कहता रहा .......वो आदतन हरजाई है,
फिर भी हमने उसकी खातिर अंजुमन सजवाई है..
#उर्मिलामाधव
14.9.2015

मुअय्यन है

एक शेर--------

दिन,जगह और वक़्त,सब कुछ था मुअइय्यन मौत का,
हर हिफाज़त आदमी..............ता उम्र करता ही रहा..
::
Din jagah or waqt sab kuchh tha muaiyyan maut kaa,
Har hifazat aadmii ...................taa umr karta hii rahaa
#उर्मिलामाधव..
14.9.2015

Tuesday, 8 September 2020

भाग दौड़ है

है जब तलक ये ज़िन्दगी तो भाग दौड़ है,
थम जाए अगर सांस तो फ़िर बात और है,
उर्मिला माधव...
8.9.2015

छोड़ना पड़ा

दिल अपना हमको ज़ोर-ओ-ज़बर तोड़ना पड़ा,
मुंह तुझसे हमको ...अहले नज़र, मोड़ना पड़ा
हर रोज़ मर रहे थे ......बहोत सोच -सोच कर,
चाहत को अपनी .वक़्त-ए-सफ़र छोड़ना पड़ा,
उर्मिला माधव..
8.9.2016

Sunday, 6 September 2020

राम कसम

जब से हुआ बिछोह तुम्हारा,तब ही से हम सोये नहीं हैं,
स्वयम अश्रुधारा बहती है,"राम कसम" हम रोये नहीं हैं,
दुविधाओं ने जीवन घेरा........स्थितप्रज्ञ हुआ मन मेरा,
कंटक जाल नियति ने सौंपे....अपने हाथों बोये नहीं हैं.
उर्मिला माधव..

Wednesday, 2 September 2020

ज़रिया बहुत है

तुम्हारा ख्व़ाब में आकर चले जाना 
सुकून -ए-दिल को ये ज़रिया बहुत है 
तुम अपनी चाहतों से नापलो चाहे,
मेरा दिल आज भी दरिया बहुत है,
उर्मिला माधव ...
3.9.2013

किरदार है

गुल बनेंगी एक दिन कलियां सभी,
फिर तो बाक़ी, वक़्त का किरदार है..
उर्मिला माधव...
3.9.2017

क्या फ़र्क़ है

आप जब दिल से उतर के गिर गए,
आइये या जाइये क्या फ़र्क़ है ?
उर्मिला माधव

दरिया बहुत है

तुम अपनी चाहतों से नापलो चाहे,
मिरा दिल आज भी दरिया बहुत है,
तुम्हारा ख्व़ाब में आके चले जाना, 
मुहब्बत के लिए ज़रिया बहुत है 
उर्मिला माधव

Sunday, 23 August 2020

हां मैं पत्थर हूँ

हाँ मैं पत्थर हूँ मुझे तुम तोड़ डालो,
खूब तबियत से मेरी किरचें उछालो,
जब जहाँ चाहे मेरे टुकड़े लगा कर,
तुम दरो दीवार की इज्ज़त बचालो.....
उर्मिला माधव....
24.8.2015

रोते थोड़ी हैं

हम जैसे,दुनियां में....रोते थोड़ी हैं,
सोते से दिखते हैं.....सोते थोड़ी हैं 
झुकने से भी पहले देखें..ऊपर को,
मर सकते हैं इज़्ज़त खोते थोड़ी हैं,
उर्मिला माधव।।

Saturday, 9 May 2020

ग़ैर पर

जब मुक़द्दर ख़ुद बनाता और मिटाता है बशर,
किसलिये करता है चीमा गोईयां फिर ग़ैर पर..
उर्मिला माधव..
9.5.2016

पसंद हैं

दुनियां के लोग कितने ...ख़ुशामद पसंद हैं,
दानिशवरों की सफ़ में खड़े हो गए फ़िज़ूल....
उर्मिला माधव,
9.5.2017
दानिश्वर --- अक़्लमंद

आदत बनी रही

बेहतर रहा ...के साथ हर इक छूटता रहा,
मुझको अकेले चलने की आदत बनी रही...👍😊
9.5.2017

उम्र भर

बोले के साथ मैं भी नहीं दूंगा उम्र भर,
मैंने अकेले चल के उन्हें दूर कर दिया...
उर्मिला माधव..

ज़िन्दगी है ये

ख़ुद को रखना होश में के ज़िन्दगी है ये,
क्यूं मिज़ाज-ए-इश्क़ रख्खें ख़ुदकुशी है ये..
उर्मिला माधव..
9.5.2017

दहर में

जिनकी कोई ताब ला सकता नहीं,
ऐसी कुछ वीरानियाँ हैं दह्र में,
ग़मज़दा दिल उसमें जब हो मुब्तिला,
मुझको सब आसानियां हैं दह्र में..
उर्मिला माधव

Tuesday, 5 May 2020

बुज़ुर्ग

वो जो घुटनों पै दौड़ जाते थे,
अपने पैरों से चल न पाते हैं,
जो कभी सबका भार ढोते थे,
आज वो ख़ुद संभल न पाते हैं.
.Urmila Madhav
5.5.2013

Friday, 1 May 2020

खीसे में अपने

आप जो भी हों, रहें खीसे में अपने,
हम तआल्लुक़ की मशीनें देखते हैं,
उर्मिला माधव
2.5.2019

Thursday, 30 April 2020

ज़रूरी है

muhabbat main taghaful ka chalan to be shaoori hai,
tajurbekaar kahte hain ki doori bhi zaroori hai..........Urmila Madhav
30.4.2013

ज़िंदगी

आभार Urmila Madhav जी 
  
उम्र भर हमने चुकाई,पाई-पाई ज़िन्दगी,
खर्च पूरी हो गई कितनी बचाई ज़िन्दगी.....

उर्मिला माधव.

प्यार का पल होगया

ऐसे लम्हों में लिखा बस प्यार का पल होगया,
उसकी आमद से हर इक मिसरा मुक़म्मल होगया...
#उर्मिलामाधव...
30.4.2015...

दैर ओ हरम

जब जहाँ तबियत हुई सजदा किया हमने वहीँ,
कौन इतना फ़र्क़ करता, घर है या दैर-ओ-हरम,
उर्मिला माधव
30.4.2018

Tuesday, 28 April 2020

ख़्वाब नहीं

Wo haqiqat hai koii khwaab nahin,
Phir bhii tasviir ka jawaab nahin,
Yun to hain khushbuen bahut saari,
Uskii khushboo sii kaamyaab nahin....
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वो हक़ीक़त है कोई ख्वाब नहीं,
फिर भी तस्वीर का जवाब नहीं,
यूँ तो हैं .....खुशबुएँ बहुत सारी,
उसकी खुशबू सी कामयाब नहीं....
#उर्मिलामाधव...
29.4.2015...

भगवान जी बतलाएंगे

फ़िक़्र मंदी और रक़ाबत,दोनों मिलकर आगए,
आगे क्या होना है ...ये भगवान जी बतलाएंगे..
उर्मिला माधव,
29.4.2017

संभाला हमने

उम्र भर साख़ ओ ईमान संभाला हमने,
ख़ुद को कोने में कहीं, जान के डाला हमने,

जिसको देखो वो गुनहगार कहे जाता था,
दिल के दुखने को बड़ी देर तक टाला हमने,
उर्मिला माधव

झिझोड़ा गया

कितने रंगों से दिल को झिंझोड़ा गया,
बिखरी साँसों को रह-रहके तोडा गया,
मेरी आदत यही थी तो होता भी क्या,
मुझसे लिखना-लिखाना न छोड़ा गया....
उर्मिला माधव...
28.4.2014..

इंतेहा करदे

Be-wafa ho ja magar yun, ke inteha karde,
Baad phir iske koii......tere muqabil ho nahin
::::
बे-वफ़ा हो जा मगर यूँ, के इन्तहा करदे,
बाद फिर इसके कोई तेरे मुक़ाबिल हो नहीं,
Urmila Madhav....
28.4.2016

खड़े रहे

पानी के इक गिलास का जो क़र्ज़ हो गया
हम उम्र भर ...उसी की सतह पर खड़े रहे ....
उर्मिला माधव,
28.4.2017

Friday, 24 April 2020

मरासिम

इक मरासिम था सो भी टूट गया,
जो कभी मुख़्तसर नहीं होता,
अब मिरा फ़ैसला भी सुन लीजै,
अब यहां कुछ असर नहीं होता,
उर्मिला माधव
तिफ़ल अगर तिफ़्ल है तब बह्र ठीक होगी अगर तिफ़ल है तो ठीक नही, इसी प्रकार ज़हन भी यदि ज़ह्न है तो ये मिसरा ठीक नहीं है ।अभी यहां ज़हन और तिफ़ल का वज़न 12 ले रहे ह

Wednesday, 22 April 2020

क़ायम मेरी

हैं अजल तक कोशिशें,क़ायम मेरी,
ज़िंदगी समझें न वो दायम मेरी,
उर्मिला माधव...
22.4.2015

जंजीर में

आपने सोने की कड़ियाँ क्यूं रखीं ज़ंजीर में,
गो कि सब इल्ज़ाम भी मेरे ही सर आते गए...
उर्मिला माधव,
22.4.2018

Sunday, 19 April 2020

सब्र कर नहीं पाते

ये कौन लोग हैं जो सब्र कर नहीं पाते,
ख़मोश होके .कहीं से गुज़र नहीं पाते,
जो अपने हाथ में मीज़ान लेके चलते हैं,
एक सुफ़ह भी शिद्दत से भर नहीं पाते,...
उर्मिला माधव,
19.4.2017

Saturday, 18 April 2020

कैसे हो

दिल में हुज्जूम-ए-ग़म है बयाँ हो तो कैसे हो?
कुल ज़िन्दग़ी का दर्द अयाँ हो तो कैसे हो ?
अब ज़िन्दग़ी में वैसी हसानत नहीं रही
ख़ाली है जब ज़ेहन ये ग़ुमाँ हो तो कैसे हो?
मुर्दार हो चुके हैं इबादत के बलबले,
ऐसे में कोई रक्स-ए-समाँ हो तो कैसे हो?.....
उर्मिला माधव.
8.3/2013

उभर नहीं जाता

दर्द जब तक उभर नहीं जाता,
उम्र भर भी नज़र नहीं आता,
जिसका ग़र्दिश में वक़्त होता है,
कोई भी उसके घर नहीं जाता।....Urmila Madhav..
19.4.2013

थोड़ा न होता

वक़्त ने जो इस क़दर तोड़ा न होता,
साथ खुशियों ने कहीं छोड़ा न होता,
शौक़ हो जाता.....तिरे हाथों से पूरा,
जितना हो जाता वही थोड़ा न होता....
उर्मिला माधव...
19.4.2014...

क्या ख़ूब है

तस्वीरी क़ता---
Das rahaa hai aadmi ko aadmi kya khoob hai,
Aisi fitrat kyun hamaare naam se mansoob hai,
Rah gaya hai munh khula hairat se ,sabko dekh kar,
Ham n apni zaat ko daste hain ye usloob hai..
&&&&&&&&&&&&&&&&&&&&&&&&&&&&&
डस रहा है आदमी को आदमी,क्या ख़ूब है,
फिर ये फितरत क्यूँ हमारे नाम से मंसूब है,
रह गया है मुंह खुला हैरत से,सबको देख कर,
हम न अपनी ज़ात को डसते हैं,ये उसलूब है...
उर्मिला माधव,
19.4.2016

दोहा

इतना आसां भी नहीं, दुनियां का हर रंग,
जितने गहरे हम गए, उतने रह गए दंग..
उर्मिला माधव

घूम रही हूँ

बुतख़ानों के शह्र में ज़िंदा घूम रही हूँ,
बिलकुल तनहा हूँ शर्मिंदा घूम रही हूँ,
सोच रही हूँ उंगली से सब छूकर देखूं,
हो सकता है कुछ आइन्दा घूम रही हूँ....
उर्मिला माधव...
19.4.2018...

अच्छा लगे

तू मिरा लख़्ते जिगर है और मेरी ज़िंदगी,
तेरी आँखों से ये दुनिया देखना अच्छा लगे..
उर्मिला माधव

खाता

जो अगर फ़रहाद सब कुछ मान जाता,
ठोकरें हिस्से की उसके.....कौन खाता...?? 
::
Jo agar farhad sab kuchh maan jaataa,
Thokaren hisse kii uske kaun khaataa...
उर्मिला माधव...
19.4.2016...

Wednesday, 15 April 2020

दुखाना चाहता है

London, United Kingdom.

Kyun usika ....dil dukhana chahta hai,
jisko ik arse se ....paanaa chahta hai.
uski aankhon men likhi hai,jo haqiqat.
apne hathon se ....mitana chahta hai....
Pranav .....

Tuesday, 14 April 2020

देखो ना

ज़िन्दगी.......तार-तार देखो ना,
ज़ख्म के.......आर पार देखो ना,
ये भी हैरत है तुम समझ न सके,
आओ तब......बार-बार देखो ना....
उर्मिला माधव...
14.4.2014...

हल्की हल्की

कहीं मेघ मल्हार सा राग बजे,कहीं वायु चले हलकी-हलकी,
हिय पीर उठे,नहीं धीर धरे,कहां बात कहूँ सखि उस पल की,
मन पावन प्रेम के रंग रंगा,और तान बजे मुरली की कहीं,
हिय पीर उठे,नहीं धीर धरे,और आँख पड़े छलकी-छलकी,
#उर्मिलामाधव....
14.4.2015..

कार ए हुनर

पांव धंस जाते हैं मेरे.....इतनी गीली है ज़मीं,
ये मिरा कार-ए-हुनर है,आज भी चलती हूँ मैं....
उर्मिला माधव,
14.4.2017

कुंदन हुई

दर्द के शोलों पे चल के,ज़िंदगी कुंदन हुई
अब भला लू के थपेड़े,.क्या बिगाड़ेंगे मेरा..
14.4.2017

Friday, 10 April 2020

सांसें अज़ाब में हैं

ये जिस्म एक क़फ़स है,साँसें अज़ाब में हैं,
तू ज़िन्दगी के मालिक ,जिंदा बचाए रखना,
अश्कों से भीगे आरिज़,बेबाक़ हो गए हैं 
दूरी हो चाहे जितनी,दिल तो मिलाये रखना....
उर्मिला माधव...
11.4.2015

Wednesday, 8 April 2020

रहने दिया

dil ko jo sahana tha wo sahne diya'
Baqi jo qissa tha wo rahne diya..
Urmila Madhav

बादशा हुआ

जिस तक पहुंच नहीं है,वही बादशा हुआ,
वरना ज़मीं के लोग तो हम से ही हैं हुज़ूर..
उर्मिला माधव...
9.4.2017

धता बताई

तुम्हारी फ़ितरत समझ में आई तो मैंने तुमको धता बताई,
फ़िर अपनी सारी सहेलियों को, तुम्हारी हर इक ख़ता बताई

Tuesday, 7 April 2020

लनतरानी में गई

Ban ke jo taiyyar thi, tasveer paani me gaii,
Ek kahaani khoob thii jo, lan taraanii me gaii..

बन के जो तैयार थी तस्वीर, पानी में गई,
इक कहानी ख़ूब थी,जो लनतरानी में गई...
उर्मिला माधव
8.4.2018

Monday, 6 April 2020

आना है

Hukm hamko hua ke aanaa hai,
Ham bhi bistar se uth ke ja pahunche,

हुक्म हमको हुआ ....के आना है,
हम भी बिस्तर से उठके जा पहुंचे..
उर्मिला माधव
7.4.2018

रख्खा है

Maine khud ko sambhaal rakhkha hai,
Dard kaandhe pe daal rakhkha hai,

Gam sabhi zindagi men  pinhaaN hain,
Kya kahi arz-e-haal rakhkha hai?

मैंने ख़ुद को संभाल रख्खा है,
दर्द ....कांधे पे डाल रख्खा है,

ग़म सभी ज़िन्दगी में पिनहां हैं,
क्या कहीं अर्ज़-ए-हाल रख्खा है?
उर्मिला माधव,
7.4.2018

Friday, 3 April 2020

मुसलमान कर दिया

[4/4, 12:01 AM] Urmila Madhav: हमतो बस नाचीज़ हैं, किस सम्त को उड़ जाएंगे,
हां ये मुमकिन है किन्हीं वर्क़ों पे मिल सकते हैं हम 
उर्मिला माधव
[4/4, 12:03 AM] Urmila Madhav: दुनिया की हरक़तों ने..परेशान कर दिया,
कुछ और न हुआ तो बयाबान कर दिया,
हिन्दू कहा हमें तो कभी..और कुछ कहा,
तबियत जो होगई तो मुसलमान कर दिया....
उर्मिला माधव...

Wednesday, 1 April 2020

पनीर हो

ऐसी रेसीपी क्या खाना जिसका नाम पनीर हो,
अगल-बगल में नॉनवेज की गड़ी हुई शमशीर हो,
उर्मिला माधव
😢😢😢😢😢

वरक़ों पे मिल सकते हैं हम

हमतो बस नाचीज़ हैं, किस सम्त को उड़ जाएंगे,
हां ये मुमकिन है किन्हीं वर्क़ों पे मिल सकते हैं हम 
उर्मिला माधव

Tuesday, 31 March 2020

आ न पाए

जो तराने रास दिल को आ न पाए,
वो ही दुनिया ने मुझे हरदम सुनाए,
बात बे बुनियाद है..पर सच कहूँगी, 
रात की तन्हाई में....सब गुनगुनाए,
उर्मिला माधव...
1.4.2014...

मुनासिव था

मैंने कर ली थीं दूरियां क़ायम
दूर रहना ही बस मुनासिव था.  ....
#उर्मिलामाधव ...
1.4.2015

दूर रह

मैंने पहले ही कहा था दूर रह,
तुझको ही ज़िद थी गले मिल जाओ ना,
उर्मिला माधव

आदमज़ात हूँ

मर्तबा इंसाँ है मेरा ............और आदम ज़ात हूँ,
अपनी हस्ती से हूँ ज़िन्दा अपनी ख़ुद औक़ात हूँ,
ना ग़ुरूर-ए-हुस्न हूँ, .....ना दुख़्तर-ए-जज़्बात हूँ
इब्तेदा से इन्तेहा तक ......क़िस्सा-ए-हालात हूँ..... 
उर्मिला माधव

Monday, 30 March 2020

लौट जाने के लिए

दे दिया है दिल तुम्हें हरदम दुखाने के लिए,
पर इजाज़त दी नहीं है..लौट जाने के लिए .....
उर्मिला माधव... 
31.3.2014....

उलाहना

उलाहना दे रहे हो,यार तुम तो हद करो हो,बस,
मुहब्बत हो गई तुमसे तो क्या जागीर ले ली है?
::
Ulahan'a de rah'e ho yaar tum to had karo ho bas,
Muhabbat ho gai'i tums'e to kya jaagiir le lii hai ?
Urmila Madhav....
31.3.2016

गिरदाब

मंज़िलों की दूरियां क्यों नापना,
ख़ुद को बस गिरदाब से ऊपर रखो,
*****
ManziloN ki duriyaN kyon naapna,
Khud ko bas girdaab se oopar rakho..
उर्मिला माधव

संवारा जाएगा

एक क़ता------
----------------
आख़िरश ये जिस्म भी कितना सँवारा जाएगा,
और कहाँ तक इसको शीशे में उतारा जाएगा,
इसकी हस्ती कुछ नहीं .बस इन्तिहाई ख़ाक है,
एक दिन काँधों पै रख कर ये ख़ुदारा...जाएगा'
उर्मिला माधव...
30.3.2015

करते भी क्या

एकतरफ़ा प्यार का करते भी क्या,
बे-वफ़ा के नाम पे ...मरते भी क्या?
हम ..जमा ख़ाते में रख्खे थे अबस,
मुफ़्त झूठी आह तब भरते भी क्या..
उर्मिला माधव..
31.3.2017

Sunday, 29 March 2020

संवारा जाएगा

एक क़ता------
----------------
आख़िरश ये जिस्म भी कितना सँवारा जाएगा,
और कहाँ तक इसको शीशे में उतारा जाएगा,
इसकी हस्ती कुछ नहीं .बस इन्तिहाई ख़ाक है,
एक दिन काँधों पै रख कर ये ख़ुदारा...जाएगा'
उर्मिला माधव...
30.3.2015

छोड़ दी

एक शेर....

बारहा उसने उड़ाया जब मुहब्बत का मज़ाक़,
बस तवक़्क़ो उसकी जानिब उम्र भर को छोड़ दी...
*************
Baarh'a usne uday'a jab muhabbat ka mazaq,
Bas tavaqqo uski janib umr bhar ko chhod di'i
Urmila Madhav..
30.3.2016

मजलूम

मजलूम के दिल की तड़पन को एक बार कभी तो जाके सुनो,
वो ख़ुदकुश है,ख़ुद मैय्यत है, ख़ुद ज़िक्र नहीं  करता है बस..

Majloom ke dil ki tadpan ko,ek baar kabhi to jaake suno,
wo khudkash hai,khud maiyyat hai,khud zikr nahin bas karta hai..
उर्मिला माधव...
30.3.2016

रंग बदलती है

Zindagi ......roz rang badalti hai,
Chalne waale ke sath chalti hai,
::
ज़िंदगी ...रोज़ रंग बदलती है,
चलने वाले के साथ चलती है...
उर्मिला माधव,
30.3.2017

Saturday, 28 March 2020

मजमून जानते हो

कहते हो ख़ुदा हाफ़िज़,मजमून जानते हो ?
वो है हफ़ीज़ सबका,क्या इतना मानते हो ?
कैसी ज़बाँदराज़ी आपस में कर रहे हो?
क्यूँ क़ारसाज़ की तुम तौहीन कर रहे हो ?
उसकी नवाज़िशों से हर ज़र्रा पुरअसर है ,
क्यूँ बेवजह ही दर-दर की ख़ाक छानते हो ??....Urmila Madhav........
29.3.2013

परेशान कर दिया

दुनिया की हरक़तों ने..परेशान कर दिया,
कुछ और न हुआ तो बयाबान कर दिया,
हिन्दू कहा हमें तो कभी..और कुछ कहा,
तबियत जो होगई तो मुसलमान कर दिया....
उर्मिला माधव...
29.3.2014..

आज तक

हम जमीं पर पाँव गिन के रख रहे हैं आज तक,
आसमां वाले बता ,......तू देखता किसको रहा..??
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ham zamiin par paanv ginke rakh rahe hain aaj tak,
aasmaan waale bataa .....tuu dekhtaa kisko rahaa.??
#उर्मिलामाधव...
29.3.2015...

ख़म

Tasviirii sher....

Raah mudni hai hamen jab patriyon ka aayega kham,
Hosh kisko hai yahan par maut ka hai fasla kam....

राह मुड़नी है हमें जब पटरियों का आएगा ख़म,
होश किसको है यहाँ पर मौत का है फ़ासला कम...
Urmila Madhav...
28.3.2016

दुनिया महज़

कौन होता है किसीका पासबाँ,
है हुजूम-ए-दुश्मनां दुनियां महज़..
उर्मिला माधव,
29.3.2017

ज़िन्दगी से

हैं तजरिबे अब ज़ियादः ज़िन्दगी से,
किस तरह से ज़िन्दगी लंबी करें हम,
वज़्न बढ़ता जा रहा है हिज्र तेरा
क्या हटा कर ज़िन्दगी हल्की करें हम..
उर्मिला माधव
29.3.2018

सिला क्या देगा

वो किसी ग़ैर की उल्फ़त का सिला क्या देगा,
उसने जब-जब भी ज़ुबां खोली, ज़ह्र घोला है..
उर्मिला माधव ...

Friday, 27 March 2020

नहीं आते

पहले आते थे .अश्क़ आंखों में,
अब ..किसी बात पर नहीं आते,
जो भी करना था तूने कर डाला,
अब तिरी ज़ात पर ...नहीं जाते..
उर्मिला माधव
28.3.2018

चल के आ

तू मेरे दिल की मुश्किलें न बढ़ा,
मेरे घर रोज़-रोज़ चल के आ,
ख़ुद को ख़ुद ही ख़ुदा समझता है
मेरे हिस्से का काम ख़ुद न चला
उर्मिला माधव
28.3.2018

ज़रूरत थी

जब हमें आप की ज़रूरत थी,
आप दुनियाँ के ज़लज़लों में थे,
आपको हम दिखाई देते क्यों,
आप यारों के वलवलों में थे,
उर्मिला माधव

Thursday, 26 March 2020

हुआ करते थे

तुझसे मिलने की दुआ करते थे,
हम कभी ऐसे हुआ करते थे,
किस क़दर दिल ये तड़प उठता था,
जब तिरे ग़म को छुआ करते थे,
27.3.2013

ख़ाहिश नहीं मुझको

किसीसे भी किसी जागीर की ख़्वाहिश नहीं मुझको,

मुहब्बत जिनको होती है वो इतना सोचते कब हैं ?
उर्मिला माधव

Wednesday, 25 March 2020

मक्कार हैं

दोबारा--- :)
=====
कल तलक हम सोचते थे हम बहुत बदकार हैं,
और मुहब्बत के जहाँ में......बारहा मक्कार हैं,
पर ज़रा जब गौर से देखा....तो ये आया नज़र,
एक से बढ़कर एक हैं,हम बे-वजह ग़मख़्वार हैं...
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kal talak ham sochte the,ham bahut badkaar hain,
or muhabbat ke jahan main baaraha makkar hain,
par zaraa jab gaur se dekha..........to ye aaya nazar,
ek se badhkar ek hain,ham be-vajh gamkhwaar hain
#उर्मिला माधव...१४.१२.२०१३..

आगए

ग़म गुज़ारिश की तरह से आगये,
ज़ख्म खारिश की तरह से आगये.
फैसला करने की कूव्वत थी किसे,
अश्क़ बारिश की तरह से आगये,
उर्मिला माधव...
25.3.2016...

ख़त लाइये

कौन इसकी फ़िक्र करता है भला बतलाइये,
गोकि मेरे दर तलक भी आइये, .मत आइये, 
इक वफ़ा के रंग-ओ-बू से आप हैं खाली अगर,
क्या-म-आनी हैं लहू से रंग के भी ख़त लाइए....
#उर्मिलामाधव ....
26.3.2015...

Tuesday, 24 March 2020

पापा करते हैं

मम्मी झुठठो नाम कमाती रहती हैं,
घर के सारे काम तो पापा करते हैं..😊
उर्मिला माधव

सोचा ही नहीं

मैंने सजदे में किसी और को सोचा ही नहीं,
रब ने जब मुझको बड़े ख़ास तरीक़ों से गढ़ा,
उर्मिला माधव

Monday, 23 March 2020

जानती हूँ

वो जो कहते हैं उसे मैं मानती हूँ,
उनकी बातों के इशारे जानती हूँ,
सोचती रहती हूँ उनको रात दिन  
दायरे अपने मगर पहचानती हूँ....
उर्मिला माधव....
24.3.2014...

रह गए

टोलियों के ........टुकड़े होके रह गए,
काले-काले .......मुखड़े होके रह गए,
इससे ज्यादह और फिर होता भी क्या,
लोग ........अपने दुखड़े रोके रह गए....
उर्मिला माधव...
------------------------------------------ 
toliyon ke ......tukde hoke rah gaye,
kaale kaale mukhde hoke rah gaye,
isse zyadah or phir ..hota bhii kyaa, 
log .....apne dukhde roke rah gaye,
Urmila Madhav...
24.3.2016

जारी रखें

ज़िंदगी एक जंग है,जारी रखें,
तीर तो हर सम्त से आने ही हैं...

Zindagi ek jang hai,jaarii rakhen,
Teer to har samt se aane he hain..
उर्मिला माधव,
24.3.2017

Sunday, 22 March 2020

आज़ाद हो

अगर ग़लती ही करनी है करो,आज़ाद हो,लेकिन,
पलट कर लौट आने का कोई रस्ता बचा रखना।।।
Agar galati hi karni hai karo,aazaad ho,lekin,
Palat kar laut aane ka koii rastaa bachaa rakhna..
Urmila Madhav 
23.3.2016

किन्नरों के वेश में

ये सभी प्राणी......अनेकों देश में,
जी रहे हैं.......किन्नरों के वेश में,
नाचते गाते हैं.......औरों के लिए,
जो स्वयं रहते कठिन परिवेश में....
उर्मिला माधव...
23.3.2014....

Saturday, 21 March 2020

देहिया भोजपुरी क़ता

मेरी भाषा नहीं,गलतियां हो सकती हैं... _/\_
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हो गइल मसान..देहिया,
कान रहल सब सनेहिया,
सुगना....फरार हो गईल,
छोड़-तोड़...सबके नेहिया ….
उर्मिला माधव...
22.3.2014...

पानी नहीं है

होली की शुभ कामनाएं--
श्वेता राय 😊

ख़ुदा की मुहब्बत का सानी नहीं है
तुम्हारी मुहब्बत का ..सानी नहीं है,
हक़ीक़त है कोई ....कहानी नहीं है,
के हो सह्ल दिल से,ज़ेह्न से भी सादा,
लो रंगों से होली है,......पानी नहीं है
उर्मिला माधव
22.3.2016

भूलेगा

दिल ने क्या-क्या नहीं भुलाया है
तयशुदा है तुम्हें भी भूलेगा
उर्मिला माधव

पीता नहीं

एक गंदा दोस्त जो कहता था 'मैं पीता नहीं'
आज ये ज़ाहिर हुआ वो बिन पिये जीता नहीं
🤔🤔
उर्मिला माधव

क्या क्या न पूछते

अच्छा हुआ कि हमको......तर्जुबात हो गए,
वरना गधों की शक्ल में क्या-क्या न पूछते...
उर्मिला माधव...
21.3.2014...

तिलिसमात आदमी

जिंदा जला रहा है कोई ज़िन्दगी मगर,
मुर्दे में खोजता है तिलिस्मात आदमी.....
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zinda jalaa rahaa hai koii zindagi magar,
murde main khojtaa hai,tilismaat aadmii....
#urmilamadhvav
21.3.2015...

Thursday, 19 March 2020

ख़बरदार कर दिया

हम तुम,मिलें,मिलें न मिलें,कोई गम नहीं,
बस दुश्मनों से तुमको...खबरदार कर दिया...
उर्मिला माधव...
20.3.2014..

राह चलते हैं

ये किसने कह दिया तुमसे ?तुम्हारे दर पै आये हैं,
ये दुनियां रहग़ुज़र है और यहाँ सब राह चलते हैं...
उर्मिला माधव...
20.1.2015...

मग़रूर है

सांस तक लेने में .......मुश्किल हो रही थी,
और वो कहते रहे,ये किस क़दर मग़रूर है...
उर्मिला माधव,
20.3.2017

गुरूर

वो दिल जला के हमें आग से बचाते हैं,
ग़ुरूर जिनको रहा अपने ख़ास होने का...

Wo dil jala ke hamen aag se bachaate hain,
Ghuruur jinko raha apne khaas hone ka..
उर्मिला माधव
20.3.2018

Wednesday, 18 March 2020

उदास लगता है

ग़मज़दा हूँ,... ये सच नहीं है पर,
कुछ तो है,दिल उदास लगता है....
#उर्मिलामाधव.....
 19.3.2015

डरते ही बने

ज़ीस्त की बुनियाद ऐसी है कि मरते ही बने,
जितना ही इसको समेटो ये बिखरते ही बने,
अनगिनत रानाइयाँ हैं किसको देखेंगे भला,
सूरत-ए-हालात ये कि ...सिर्फ़ डरते ही बने...
उर्मिला माधव..
11.3.2017

Tuesday, 17 March 2020

मीज़ान पर

हमने अपनी खूबियां भी तौल दीं मीज़ान पर,
जब हज़ारों रंजिशों से ....हम घिरे पाये गए,....
#उर्मिलामाधव...
18.3.2015..

सोए नहीं हैं

जबसे हुआ बिछोह तुम्हारा,,तब ही से हम सोये नहीं हैं,
स्वयम अश्रु धारा बहती है,  राम कसम हम रोये नहीं हैं,
दुविधाओं ने जीवन घेरा,.......स्थित प्रज्ञ हुआ मन मेरा,
कंटक जाल नियति ने सौंपे,....अपने हाथों,बोये नहीं हैं..
उर्मिला माधव ..
18.3.2017

बावरी

दामिनी दमकि केँ चमक मारै बावरी,
भीतर ह्रदय के ....कुरेदै सब घाव री,
अँखियाँ बहामें नीर,मनुआँ धरै न धीर,
नित्य प्रति थोड़ौ सो घटै बस चाव री...
उर्मिला माधव,

Monday, 16 March 2020

कुंडलिया छंद

कुण्डलिया छंद ---पहली कोशिश...
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क्या मतलब है आपका,जब देखो तब मांग,
विश्वनाथ सोये हुए.......पीकर अपनी भांग... 
पीकर अपनी भांग उन्हें भी......चैन चाहिए,
अपनी झोली लिए हुए.......सब लौट जाइए...
जब होगा संग्राम वोट का....आना फिर सब,
समय पूर्व ही किसी बात का है क्या मतलब.....
उर्मिला माधव...
17.3.2014..

किरचें

जब तलक किरचें चुभेंगी, याद आएगा मुझे,
दिल मिरा टूटा हुआ,पैरों तले रौंदा गया..
उर्मिला माधव
17.3.2018

मुहाज़िर

इक मुहाजिर कह रहा है, मुझको हाज़िर जान लो,
जिस्म, जां, एहसास सब कुछ मैंने हाज़िर कर दिया...
उर्मिला माधव

Sunday, 15 March 2020

क़ुर्बान ही हुए हैं

हम ज़िन्दगी पे अब तक क़ुर्बान ही हुए हैं,
बा-बस्तगी से दिल की हैरान ही हुए हैं!!
अपनी बुलन्दियों पे क़ायम है आज भी हम,
रुसवाइयों के कितने सामान भी हुए हैं.!    
उर्मिला माधव..
16.3.2013

मन के वास्ते

ये जो कुछ अशआर हैं 'मेरे ज़ेहन के वास्ते',
आपसे साझा किया सब अपने मन के वास्ते,
उर्मिला माधव...
16.3.2014

पानी पानी हो गया

जब से उसने छू दिया सागर की छोटी बूंद को,
बस उसी दम ये मेरा दिल पानी-पानी हो गया....
#उर्मिलामाधव....
16.3.2015....

ख़ूबी

एक शख्स तो ऐसा लाओ,
जिसमें बस ख़ूबी दिखलाओ,
#उर्मिला 
16.3.2015

सब्र

मैंने इक ही लफ्ज़ सीखा ज़िन्दगी से,
गो कि इसको सब्र ही कहते हैं शायद..

Maine ik hi lafz seekha zindagi se,
Go ki isko sabr hi kahte hain shayad...
उर्मिला माधव
16.3.2018

Saturday, 14 March 2020

रोज़गार है उनका

एक नया ....रोज़ प्यार है जिनका,
आशिक़ी .......रोज़गार है उनका,
हमने .....उनसे भी लड़ते देखा है.
जिन पे ...दार-ओ-मदार है इनका  
उर्मिला माधव...
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ek nayaa .......roz pyar hai jinka,
aashiqi ...........rozgaar hai unka,
maine unse bhi ladte dekha hai,
jin pe ...daar-o-madaar hai inka....
Urmila Madhav...
15.3.2016

कैसे हो अब

दिल हमारा दुख गया तो फिर न बोले हम कभी,

जी में ये आता था उससे पूछ लें कैसे हो अब ?
उर्मिला माधव

करे कोई

जिसकी आंखों में कोई रंग नहीं,
उससे .....उम्मीद क्यों करे कोई,
उर्मिला माधव

सृष्टि में

सब परिधियाँ अर्थ अपने खो चुकी हैं सृष्टि में,
अब रहा संसार .......सो है शून्य मेरी दृष्टि में,
कौन गणनाएँ करे आघात ऑर प्रतिघात की,
चेष्टाएँ सब उपेक्षित .....पीर की अतिवृष्टि में,
उर्मिला माधव...
15.11.2016

महे क़ामिल नहीं होता

कोई इश्क-ओ-मुहब्बत में महे क़ामिल नहीं होता
ये वो रुतबा है जो हर शख़्स को हासिल नहीं होता,
बहुत गहराई है देखो जुनून-ए-इश्क में जाकर,
समन्दर ही समन्दर है यहाँ साहिल नहीं होता.....
उर्मिला माधव
14.3.2017

Thursday, 12 March 2020

इज़हार कर गए

जो भी किसीसे प्यार का इज़हार कर गए,
मजबूर ऐसे होगए बिलकुल बिखर गए,
जो ज़िन्दगी के नाम की ज़िन्दा मिसाल थे,
वो अपनी ज़िन्दगी में कई बार मर गए।।....
उर्मिला माधव.
13.3.2013

हंसने लगे

कुछ यूँ ही---

ज़र के मीज़ानों पै रखके दोस्ती जब तुल गयी,
हो गयी रस्साक़शी.....और लोग भी हंसने लगे......
उर्मिला माधव...
13.3.2014...

दुहाई है

वक़्त ने भी वो अदा दिखलाई है,दुहाई है,
मेरे हिस्से मैं फ़क़त  रुसवाई है दुहाई है,
चाँद भी मेरी तरह तनहाई मैं डूबा लगा,
चांदनी चलके यहाँ तक आई है दुहाई है,
उर्मिला माधव...
13.3.2014..

फ़ितरत है

हक बयानी हमारी फ़ितरत है,
तुमको गर रूठना हो,रूठ रहो... 
#उर्मिलामाधव....
13.3.2015...

थक गए

अर्ज़-ए-अदब को अपने तरीक़े से तौल कर
हर्फ़-ए-अलम को लोग समझने में थक गए;
उर्मिला माधव,
13.3.2017

हैरान करदे

ये मर्ग-ए-बशर सा ही ऐहसास क्यूं है,
कभी ज़िंदगी तू भी हैरान कर दे ..

Ye marg-e-bashar sa hii ehsas kyun hai,
Kabhi zindagi tu bhi hairan kar de.
उर्मिला माधव..
13.3.2018

जाल कहते हैं

जहाँ इंसान को मछली,ऑ घर को जाल कहते हैं,
बड़ी हैरत है अपने मुंह से अपना हाल कहते हैं,
उर्मिला माधव

ताबानी

हमारी ताबानी देखो,कभी तुम रु-ब-रु आकर,
वगरना आँख से ओझल की दूरी है पहाड़ों सी.....
उर्मिला माधव,
12.3.2016

जताते थे

हज़ारों मील की दूरी से जो उल्फ़त जताते थे 
ज़रा नज़दीक आते ही वो गाली दे गए मुंह पर ... 
उर्मिला माधव
12.3.2017

जुदा हो कर

Wo jiski bazm me jaa kar panaah lete the,
Bahut udas hua, us-se dil judaa ho kar,

वो जिसकी बज़्म में जा कर पनाह लेते थे,
बहुत उदास हुआ,उससे दिल जुदा हो कर,
उर्मिला माधव 
12.3.2918

ख़ुदा होकर

न तोड़ लेते अगर दिल तो और क्या करते,
वो जब भी सामने आया तो बस ख़ुदा होकर,
उर्मिला माधव
12.3.2018

Wednesday, 11 March 2020

ख़ुदा होकर

दिल को हम तोड़ नईं लेते तो और क्या करते,
वो जब भी सामने आया तो बस ख़ुदा होकर,
उर्मिला माधव
12.3.2018

हम अना को न छोड़ पाए कभी

हम अना को न छोड़ पाए कभी,
जब भी दुनिया अलग हुई हमसे,
हमने पर्दा दुई का रहने दिया,
कोई ख़िदमत भी कब हुई हमसे
उर्मिला माधव

Tuesday, 10 March 2020

मेहरबानी हुई

वो अयादत को जो आए क्या मेहरबानी हुई,
उनके क़दमों में झुकी जो मेरी पेशानी हुई,
यूं मुसलसल डूबती जाती थीं साँसें दम-ब-दम,
यक़-ब-यक़ देखा उन्हें तो हमको हैरानी हुई,
अपनी ना-उम्मीदगी से पूछते थे हम सवाल,
रहग़ुज़र वो भूल बैठे या कि नादानी हुई??......उर्मिला माधव..

अयादत----बीमार का हाल पूछना.
11.3.2013

सबब कुछ नहीं

लो उन्सियत न हमको ज़माने से अब रही,
ग़ैरों की जुस्तजू का सबब कुछ नहीं जनाब...
उर्मिला माधव...
11.3.2015

दिलाया है अभी

तुमने एक शख्स मुझे याद दिलाया है अभी,
उसकी तर्ज़ों को यहीं गा के सुनाया है अभी,
मुझको दरक़ार है कुछ वक़्त सँभलने के लिए,
उसकी यादों ने बहुत मुझको रुलाया है अभी.....
#उर्मिलामाधव ...
11.3.2015...

गलीचों से

जिनका हर रंग था अनादारी...
वो ही बिछते हैं अब गलीचों से
––––
Jinka har rang tha anaa daari..
Wo hii bichhte hain ab galiichon se..
Urmila Madhav...
11.3.2016

सबब कुछ नहीं

लो उन्सियत न हमको ज़माने से अब रही,
ग़ैरों की जुस्तजू का सबब कुछ नहीं जनाब...
उर्मिला माधव...
11.3.2017

जज़्ब कर लिया

जो जिस तरह से आया उसे जज़्ब कर लिया,
मैंने किसी भी ज़ख़्म को चलता नहीं किया..
उर्मिला माधव
11.3.2018

डरते ही बने

ज़ीस्त की बुनियाद ऐसी है कि मरते ही बने,
जितना ही इसको समेटो ये बिखरते ही बने,
अनगिनत रानाइयाँ हैं किसको देखेंगे भला,
सूरत-ए-हालात ये कि ...सिर्फ़ डरते ही बने..
उर्मिला माधव..

Sunday, 8 March 2020

जोड़ा है

हमें इस ज़िंदगी ने इस तरह तोड़ा मरोड़ा है,
कि जीने के लिए ख़ुद को बहुत मुश्किल से जोड़ा है,
कभी हम उठके चलते हैं कभी फिर टूट जाते हैं,
कई हालात में इसने हमें मँझधार छोड़ा है..।....
उर्मिला माधव.
9.3.2013

जज़्बात रोते हैं

किसीकी आँख रोती है,
 मेरे जज़्बात रोते हैं,
सुबह हो शाम हो शब हो,
 क़फ़न हम रखके सोते हैं ।....
उर्मिला माधव..
9.3.2013

कमाया करो

यार ये क्या कि यूँ वक़्त ज़ाया करो,
तुम मुहब्बत भी थोड़ी कमाया करो,

पूरी दुनिया में फिरते हो.....मारे हुए,
चलते-फिरते इधर को भी आया करो 

आओ बैठो ज़रा दिल की बातें करो,
आधे रस्ते से मत लौट जाया करो,

अपने लफ़्ज़ों में पैदा करो तो असर,
कहते-कहते न तुम भूल जाया करो,

कितनी पहचान रखते हो इंसान की 
हर किसी को नहीं गम सुनाया करो 
उर्मिला माधव...
9.3.2014..

सकती हूँ मैं

एक शेर---- 
दर्द से भरपूर अपने  लफ़्ज़ों की...तासीर से,
हर कलेजे में उतर कर पार जा सकती हूँ मैं....
उर्मिला माधव...
9.3.2014...

मंच है

🙂🙂🙂🙂

आपके हाथों में...ग़र कोई मंच है.
आपकी किस्मत समझ लो टंच है 
अच्छे अच्छे ...सामने झुक जायेंगे,
ये क़ता है और..महज़ एक पंच है....
उर्मिला माधव...
9.3.2017

Saturday, 7 March 2020

मगर क्या हो

बनाना तो हमें भी था यहां इक घर मगर क्या हो,
ज़मीं के हर मुहाने पर फ़क़त इक लाश रख्खी है
उर्मिला माधव

Friday, 6 March 2020

मुहाल है

ग़म की सियाह रात है जीना मुहाल है,
क्यूँ मुख़्तलिफ़ है इम्तिहाँ अब ये सवाल है?
तनहाइयों से लड़के ग़ुज़ारी है ज़िन्दगी,
अब तक भी हाथ ख़ाली हैं इसका मलाल है। उर्मिला माधव.
 7.3.2013

आदम ज़ात हूँ

मर्तबा इंसाँ है मेरा और आदम ज़ात हूँ,
अपनी हस्ती से हूँ ज़िन्दा अपनी ख़ुद औक़ात हूँ,
ना ग़ुरूर-ए-हुस्न हूँ ना दुख़्तर-ए-जज़्बात हूँ
इब्तेदा से इन्तेहा तक क़िस्सा-ए-हालात हूँ
उर्मिला माधव
२२.१.२०१३
22.10.2014

मालूम तो हो

मरने को तो मर जाते पर ...बात नहीं जंचती हरगिज़ 
इसके बाद का जलवा क्या है,ये हमको मालूम तो हो...
#उर्मिलामाधव ...
7.3.2015....

जमा भी दूँ

मैं वफ़ा का रंग जमा भी दूँ,
तेरा नाम लब पै सजा भी दूँ,
मुझे क्या मिलेगा नतीजतन,
तू बता तो तुझको,हवा भी दूँ...
उर्मिला माधव..
7.3.2016

Wednesday, 4 March 2020

मुस्कुराते हैं

दिल के हालात हम छुपाते हैं,
इसलिए.....खूब मुस्कुराते हैं, 
दर्द-ए-गम ओढ़नी से ढकते हैं 
छुप के....कोने में बैठ जाते हैं,
उर्मिला माधव...
5.3.2014...

ख़राब लगती है

मुझको होली ख़राब लगती है,
सच तो ये है,अज़ाब लगती है,
दिल तो मिलते नहीं हैं लोगों के,
झूठ का इक नक़ाब लगती है.....  
#उर्मिलामाधव ...
5.3.2015

निसबतें

मेरी सबसे पसंदीदा  रचनाओं में से एक 

हम चुकाते रह गए ...सच बोलने की कीमतें,
तोड़ कर जाते रहे सब .उम्र भर की निसबतें,
यूँ भी तबियत के हमेशा हम बहुत नादिर रहे,
रास भी आईं तो कुछ तन्हाईयाँ और खलवतें.
उर्मिला माधव
5.3.2016

Monday, 2 March 2020

आज़ाद हैं

मुझको जो कहना था मैंने कह दिया,
तब्सरा करने को सब आज़ाद हैं
उर्मिला माधव

देखा किये

उसका नश्शा ही न उतरा उम्र भर,
ये समां हम उम्र भर देखा किये
उर्मिला माधव
3.3.2018

Sunday, 1 March 2020

मुहब्बत

हमको भी मुश्किलों से मुहब्बत सी हो गई,
ये जान के ही  बाद-ए-सबा थक के सो गई,
#उर्मिलामाधव ....
2.3.2015...

किरदार

आपने देखी कहाँ है,असलियत किरदार की,
जो दिखाया जा रहा था,.वो ही देखा आपने ..
----------------
Aapne dekhi kahan hai,asliyat kirdaar ki,
Jo dikhaya ja raha tha,wo hi dekha aapne..
उर्मिला माधव,
2.3.2017

होली है

जुबां से रंग कह दूं तो समझ लेना के होली है,
महज़ सादा बयानी है, मुझे कहना नहीं आता,
उर्मिला माधव

Friday, 28 February 2020

आईना रखें

उंगली उठाओ गैर पर,आज़ाद हो जनाब,
बेहतर रहेगा रु-ब-रु एक आईना रखो...
Urmila Madhav..
29.2.2016

Thursday, 27 February 2020

दिलकशी करलो

एक मतला----

पैदा,जज़्बों में दिलकशी करलो,
या करो यूँ के ख़ुदकशी कर लो,...
#उर्मिलामाधव....
28.2.2015...

जीने नहीं देती

ख़ामाख़यालियों  में सुलगते हैं जिनके ग़म,
उनको दिलों की आग ही...जीने नहीं देती.....
उर्मिला माधव...
28.2.2017

Wednesday, 26 February 2020

हो गई

ज़िन्दगी भर हम अकेले ही चले हैं राह में,
इसलिए तनहाई से अब दोस्ती सी हो गई.
उर्मिला माधव
27.2.2016

घबरा गए

😊😊😊
एक ज़रा सी बात से वो इस क़दर घबरा गए,
एक पल में तीर और तलवार लेकर आ गए,
-----
उर्मिला माधव
27.2.2016

परवरदिगार तुम

मुझको ये लग रहा है,कहीं आस-पास हो,
कैसे करिश्मा साज़ हो,.परवर दिगार तुम?
उर्मिला माधव,
27.2.2017

Monday, 24 February 2020

लिबास क्यों है


बारिश तो हो रही है सावन उदास क्यूँ है?
तनहाइयों का आलम ही आसपास क्यूँ है?
काली घटा के साये घिर-घिर के आ रुहे हैं,
अब तेरी मुहब्बत का ऐसा लिबास क्यूं है?.....उर्मिला माधव
25.2.2013

मत करना

इतनी ऊंची उड़ान मत करना,
चाह को आसमान मत करना,
 
बात कहना तो वो मुक़म्मल हो,
अपनी झूठी ज़बान मत करना, 

itnii oonchii udaan mat karnaa,
chaah ko aasman mat karnaa,

baat kahnaa to wo muqammal ho,
apnii jhoothii zabaan mat karnaa...
उर्मिला माधव...
25.2.2014..

ग़मगुसारी

ज़िंदगी करती न हरगिज़ ...ग़म गुसारी,
एक दिन हलका तो इक दिन ख़ूब भारी..
उर्मिला माधव,
24.2.2017

कहाँ आ गए हैं हम

मुश्किल ऑ हादिसात से घबरा गए हैं हम,
ये कौनसा जहाँ है,....कहाँ आ गए हैं हम?
उर्मिला माधव,
24.2.2017

Sunday, 23 February 2020

सुनाई देती है

क्यूँ इतनी गहराई.....दिखाई देती है,
क्यूँ साँसों की आवाज़ सुनाई देती है,
बस ऐसी सूरत ग़ैर मुक़म्मल होजाए,
जो इंसानो को रोज़.....जुदाई देती है... 
उर्मिला माधव...
24.2.2014..

स्वीकार हो शत-शत प्रणाम

आप हैं शीर्षस्थ प्रभुवर,आपको शत-शत प्रणाम,
आप संचालक है इस संसार के शत-शत प्रणाम,
आपकी महती कृपा की ...विश्व में महिमा अपार,
मेरा नतमस्तक नमन स्वीकार हो, शत-शत प्रणाम..
उर्मिला माधव,
24.2.2017

शत-शत प्रणाम

आप हैं शीर्षस्थ प्रभुवर,आपको शत-शत प्रणाम,
आप संचालक जगत के आपको शत-शत प्रणाम,
आपकी महती कृपा की ....विश्व में महिमा अपार,
हो नमन स्वीकार मेरा ...आपको शत-शत प्रणाम..
उर्मिला माधव,
24.2.2017

ज़िन्दगी हुज़ूर

मैदान-ए-जंग है ये मेरी ज़िंदगी हुज़ूर,
बेबाक़ होके दिल भी लड़ा जंग-ए-अदावत
उर्मिला माधव
24.2.2018

Saturday, 22 February 2020

कोई

ख़ुद ही खड़े रहे हों जहां हाशिये पे लोग,
फिर और इस जगह से कहाँ जाएगा कोई 
उर्मिला माधव
23.2.2018

Friday, 21 February 2020

रात ही में रात है

दर हकीक़त वक़्त भी पाबंदियों के साथ है,
दिन हुआ दिन में हमेशा,रात में ही रात है,
उर्मिला माधव...
22.2.2014...

दिखते हैं

लोग जो हुस्न-ओ-इश्क़ लिखते हैं,
मुझको.......दीवाने जैसे दिखते हैं,
सिर्फ़..........शाखें बदलते रहते हैं,
पाँव उनके.........कहीं न टिकते हैं.
उर्मिला माधव...
22.2.2014...

उतर जाए

दिल से हर शख्स जब उतर जाए
राबिता ......दरमियां बिखर जाए,
हक़ बुलंदी है ......सिर्फ़ ख़ामोशी,
बस .....किसी ग़ैर के न घर जाए...
उर्मिला माधव,
22.2.2016

बात नहीं

ख़ाक छान के इतना ही जाना है बस दुनियांदारी अपने बस की बात नहीं,
उर्मिला माधव,
22.2.2018

Thursday, 20 February 2020

सब्र

सब्र बिलकुल थक चुका हो,जिस्म भी बीमार हो
दिल भी बुझकर ख़ाक हो,तो क्या कोई कर पायेगा  .....
उर्मिला माधव...
21.2.2016

देर कर गए

रहजन मुग़ालते में बहुत देर कर गए,
रफ़्तार में थे हम सो हवा से गुज़र गए...
उर्मिला माधव,
21.2.2017

बरमला

हर रंग बरमला है के सब पर अयाँ हूँ मैं
साबित हुआ है आज ये कोह-ए-गिरां हूँ मैं
उर्मिला माधव
21.2.2018 ji

उसे कह दीजो

मेरी दुनियां में बहुत ग़म है, उसे कह दीजो,
मैं मगर ख़ुश हूँ उसे सच न बतइयो हरगिज़..
उर्मिला माधव

Wednesday, 19 February 2020

ज़ियादा सोचा

मैंने रो-रो के उसे ख़ुद से ज़ियादा सोचा,
अपनी आंखों पे सितम ख़ूब किया रोरोके...
उर्मिला माधव

Tuesday, 18 February 2020

आकर मियां

हैलो-हैलो क्यों करो.....आकर मियाँ,
है कोई रिश्ता नहीं जब......दरमियाँ,
बे-वज्ह ही चल दिए......गुफ्तार को,
जाओ तुम अपना संभालो घर मियाँ 
उर्मिला माधव...
19.2.2014.

Monday, 17 February 2020

दस्तार में

जितने ज़्यादह पेच रख्खोगे मियाँ ....दस्तार में,
उतना ज्यादह ख़ुश्क लहजा आएगा गुफ्तार में...
***************************************
jitne zydah pench rakhkhoge miyaan dastaar main,
utnaa zydah khushq lahjaa aayegaa....guftaar main... 
Urmila Madhav...18.2.2017...

इजाज़त हो

अब मुहब्बत हो....या अदावत हो,
चाहे हिजरत हो ....या बग़ावत हो,
जो भी होना था हो लिया अबतक,
बस के अब ..हश्र की इजाज़त हो,
उर्मिला माधव...
18.2.2017

दोस्तो

इतनी मुश्किल खड़ी मत करो दोस्तो,
इक न इक दिन यहां सब बिखर जाएंगे,
ज़िन्दगी पे भरोसा ....…..ग़लत बात है, 
तुम भी मर जाओगे हम भी मर जाएंगे,
उर्मिला माधव,
18.2.2018

Sunday, 16 February 2020

तारीख़ बतला दो

हमारे इम्तिहां कब तक हैं वो तारीख़ बतला दो,
बहुत पर्चे कड़े रख्खे हैं तुमने ......ज़िंदगानी के,
#उर्मिला माधव 
17.2.2015

इक घर

बड़े इक घर बना पाते हैं,पूरी ज़िंदग़ी देकर,
मगर औलाद ईंटों के भी टुकड़े बाँट लेती है....
उर्मिला माधव।।।
Bade ik ghar bana paate hain poori zindagi dekar,
Magar aulad। iinton ke bhi tukde baant leti hai....
Urmila Madhav
17.2.2016.

शबाब

अय मियाँ क्यूँ घिस रहे हो,बेवज्ह अपनी कलम,
शाइरी के वास्ते,दरकार है ......हुस्न-ओ-शबाब,
उर्मिला माधव
17.2.2017

ठहर गई

मेरी सांस गो कि ठहर गई,
मेरा जिस्म टूट के गिर गया,
जो गले लगा के कही कभी,
वही बात कहके वो फ़िर गया
उर्मिला माधव
17.2.2018

मेयार पर

अब कोई भी शख़्सियत टिकती नहीं मेयार पर

कितनी हैरत है यहां पर लोग ख़ुद के भी नहीं..
उर्मिला माधव

Saturday, 15 February 2020

देखना

हर बुलंदी के सफ़र को हाशिये पर देखना,
क्यूंकि उसके बाद सारे रास्ते नीचे को हैं ....
उर्मिला माधव..
16.2.2015...

ख़ैरियत

Zindagi ka khairiyat se wasta kuchh bhi nahin,
Phir bhi duniyan khairiyat hii maangti rahti hai bas
Urmila Madhav
16.2.2018

Friday, 14 February 2020

सहना ही है

सोज़े ग़म हल्का नहीं होता किन्हीं अल्फ़ाज़ से,
ज़िन्दगी सच बोलती है, और हमे सहना ही है...
दर्द की बुनियाद का हिस्सा हैं गिरया और लहू,
जो भी हों हालात इनको हर तरह बहना ही है...
उर्मिला माधव
15.2.2019

Wednesday, 12 February 2020

छुप गए

नए सुखनबर तीरगी के ज़ेरे साये,छुप गए,
नामचीनों को दिखाकर,.सुर्खियां लूटी गईं.....

*****
Naye sukhan var teergi ke zere saaye chhup gaye,
Naam cheenon ko dikhaa kar surkhiyan looti gayin ..
उर्मिला माधव...
13.2.2015

घबरा गए

आँख में आंसू ......हमारे आ गए,
आज जब चलने में हम घबरा गए,
उर्मिला माधव,
13.2.2017

दो शेर

दो शेर अलग-अलग..

ढूंढ कर दिखलाइये अब सुर्ख़ रंगों की चमक,
इक सफ़ेदी है यहां, फिर दूर तक कुछ भी नहीं

एक ग़म से टूट  कर फिर उठ नहीं पाए कभी,
उम्र भर कोशिश रही,दुनियां को हम भी देखते..
उर्मिला माधव,
13.2.2014

ख़ुद मुख़्तार

हम किसीकी ज़िन्दगी पर तज़किरा भी क्यों करें,
जो भी हैं नस्लें नई वो ख़ुद-ब-ख़ुद मुख़्तार हैं
उर्मिला माधव

लब खुले रखे

शर्मो हया के नाम पर आंखों को ढक लिया,
बोसे की ख़्वाहिशों में मगर, लब खुले रखे
उर्मिला माधव

Tuesday, 11 February 2020

जानता है

देख जाने वाले तुझको सोचना क्या

ज़िन्दगी है, जाने क्या-क्या छूटता है,
जिस्म-ओ-जां से राब्ता भी टूटता है,
अपनी मुट्ठी में मुक़द्दर बांधता है,
कुछ नहीं रुकता है, ये भी जानता है,

रोज़ रोता और बिलखता ज़िन्दगी पर,
कुछ नहीं रुकता है, ये भी जानता है
चाहे जितनी हों तिरी मजबूरियां,
जिस से रहनी हैं, रहेंगी, दूरियां,

कुछ नहीं रुकता है तू भी जानता है
उर्मिला माधव

Monday, 10 February 2020

दुनिया की

पहले होती थी फ़िक़्र दुनिया की,
अब किसी बात की नहीं होती..

ग़ालिब की भतीजी

सो ही जाते हैं

क्या जगा जाए इस ख़राबे में
नींद तारी है, सो ही जाते हैं

जै गिर्राज जी की

भीगता होगा कोई

अब्र बरसा तो बड़ी ज़ोर से सीना धड़का,
ये रही फ़िक़्र कहीं भीगता होगा कोई,
उर्मिला माधव

वक़्त बाक़ी है

अभी तो रात के कटने में वक़्त बाक़ी है
अभी से फ़ैसला करने का हक़ नहीं तुमको 
ये मेरी रफ़्त का हिस्सा है सिर्फ़ हंस देना,
बला का हौसला करने का हक़ नहीं तुमको
उर्मिला माधव

Saturday, 8 February 2020

मंत्रणा है

प्रेम भी एक मृत्यु जैसी यंत्रणा है,
भावना की और ह्रदय की मंत्रणा है...
उर्मिला माधव...
९.२.२०१४...

हिसार कहाँ

ज़िंदगी जिसमें बहुत देर रुका करती थी,
वो सनमख़ाने कहाँ और वो हिसार कहाँ,
उर्मिला माधव,
9.2.2017.

Friday, 7 February 2020

ख़्वाब देखेंगे

नींद आई तो ख़्वाब देखेंगे,
जोड़ बाक़ी,हिसाब देखेंगे
कैसे ख़ुद पै हंसे कहाँ रोये,
दिन का लब्बो लुवाब देखेंगे....
#उर्मिला
8.2.2015...

Thursday, 6 February 2020

chand sa

tumko nihaarun umr bhar ye chahta hai dil, miraa
kitne  pyaare hath hain or chehra jhilmil chand saa, 😊😊
Urmila Madhav..

अना हो गई

हद से जादा खुदा की...अना हो गयी,
मेरे हाथों की मेंहदी......फना हो गयी,
नाम जिसका लिखा था जबीं पर मेरी,
उम्र भर को वो बिंदिया..मना हो गयी....
उर्मिला माधव...
7.2.2014

बटन

बंद कर लें आस्तीनों के बटन,
जब गले मिलना हो गहरे दोस्त से...
उर्मिला माधव
6.2.2016

जब देखो तब मांग

कुण्डलिया छंद....

क्या मतलब है आपका,जब देखो तब मांग,
विश्वनाथ सोये हुए.......पीकर अपनी भांग... 
पीकर अपनी भांग उन्हें भी......चैन चाहिए,
अपनी झोली लिए हुए.......सब लौट जाइए...
जब होगा संग्राम वोट का....आना फिर सब,
समय पूर्व ही किसी बात का है क्या मतलब.....
उर्मिला माधव...
7.2.2016

अलग होता

तू मेरे पास जो आता तो कुछ अलग होता,
नज़र चुरा के भला किस से बात करता है ?
उर्मिला माधव

नशे में हूँ

तस्वीर पर कहा गया शेर ----

नहीं है हाथ में जुम्बिश के मैं नशे में हूं,
ये अपना सागर-ओ मीना उठा के ले जाओ
उर्मिला माधव
7.2.2019

गुलाब लगती थी

जब ये सूरत गुलाब लगती थी,
कितनी आंखों का ख़ाब लगती थी,
खिलते चेहरे पे ताज़गी थी बहुत,
वो भी सबको ख़राब लगती थी...
उर्मिला माधव

Wednesday, 5 February 2020

अनजान थे

लोग खुद को ....शादमां समझा किये,
गो कि मुस्तक़बिल से सब अनजान थे,
उर्मिला माधव
5.२.2015....

फाग गाते हैं

वो जो ...उल्फ़त का राग गाते हैं,
सर्द मौसम में.........फाग गाते हैं,
जिनको मतलब है,दुनियादारी से
जोड़,बाक़ी ......ऑ भाग गाते हैं...
#उर्मिलामाधव
::
Wo jo..........ulfat ka raag gaate hain,
Sard mausam main faag gaate hain
Jinko matlab hai duniyan daari se,
Jod,baaqi ..........o bhaag gaate hain
Urmila Madhav..
5.2.2016

अब तक

उसकी गुफ्तार है,काग़ज़ पै सियाही अब तक,
जिसने किरदार से हरगिज़ न निबाही अब तक,

चार लफ़्ज़ों में दिलासा जो दिया ग़म के तईं,
उसकी करता है फ़क़त क़र्ज़ उगाही अब तक....
उर्मिला माधव

5.२.2015

कह दिया

हमको दीवाना समझ कर जाने क्या-क्या कह दिया,
हम तो अपने आप में थे,बेज़ुबाँ ऑ बेख़बर
उर्मिला माधव,
5.2.2018

मान लेते हैं

आप कहते हैं, मान लेते हैं,
वरना हम ज़र्फ़ जान लेते हैं
सब्र को आज़माना पड़ता है
अपनी अबरू जो तान लेते हैं...
उर्मिला माधव

Monday, 3 February 2020

ज़ख़्म

ज़ख़्म गिनती में .....चार लगते थे,
ये भी दुनियां ही गिन सकी शायद...
उर्मिला माधव ..
4.2.2017

होश

कुछ इरादे ज़िन्दगी के यूँ भी हो जाते हैं चूर
हम नहीं चाहें मगर दुनियां उड़ा देती है होश
उर्मिला माधव
4.2.2018

Saturday, 1 February 2020

आओ तो

आओ अब मेरे मुक़ाबिल आओ तो,
जी के बस मेरी तरह दिखलाओ तो,

बचती रही

मैं ही अपना सर छुपा कर उम्र भर बचती रही,
वरना मुझ पर आपने पथ्थर उठाये थे बहुत...
::
Main hii apna sar chhupaa kar umr bhar bachti rahii,
Warna mujh par aapne,paththar uthaaye the bahut...
#उर्मिलामाधव..
2.2.2016

ख़म बहुत

जान कर उसने उठाये ग़म बहोत,
ख़ासकर हमको दिखाए ख़म बहोत,
ग़ैर की ख़िदमत में है यूँ मुब्तिला,
देख कर ये मुस्कराये,हम बहोत....
::::
Jaan kar usne uthaaye gam bahot,
Hamko jab usne dikhaye,kham bahot,
Gair ki khidmat hai yun ,mubtila,
Dekh kar ye muskaraaye ham bahot..
उर्मिला माधव
27.1.2016

आदमी की ज़ात से

कोफ़्त होती है हर इक हालात से,
उठ गया दिल आदमी की ज़ात से..
उर्मिला माधव
2nd February
2018

Friday, 31 January 2020

क़ामिल नहीं होता

कोई इश्क-ओ-मुहब्बत में महे क़ामिल नहीं होता
ये वो रुतबा है जो हर शख़्स को हासिल नहीं होता,
बहुत गहराई है देखो......जुनून-ए-इश्क में जाकर,
समन्दर ही समन्दर है.....यहाँ साहिल नहीं होता...
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koii ishq-o-muhabbat main,mahe qaamil nahii hotaa,
ye wo rutbaa hai jo har shakhs ko haasil nahin hotaa,
bahut gahraaii hai dekho,junoon-e-ishq main jaakar,
samandar hii samandar hai,yahaan saahil nahin hotaa...
उर्मिला माधव...
१.२.२०१४

अच्छी लगी

सारी दुनियां घूम के जब देख ली,
अपने घर को वापसी अच्छी लगी..
उर्मिला माधव
1.2.2018

रंग लाने दो

जो कोई आग हो दिल में तो उसको रंग लाने दो,
हुजूम-ए-दर्द को यूँ ही कहीं ना डूब जाने दो,
जो ये भरपूर साज़िश है ज़माने की ज़माने से,
कभी ख़ामोश रहकर भी कोई तूफ़ान आने दो।..
उर्मिला माधव..
31.1.2013

सांस कैसे लेंगे हम

<3 <3
Kitni saari bandishen hain tumko paane main sanam,
tum nahin mil paaye to phir saans kaise lenge hum...??  Urmila Madhav..

सोलह दूनी आठ है

दोस्ती हो या मुहब्बत,बस खरैरी खाट है,
जो भी है सब बेसबब है,इन्तिहाई चाट है,
जैसे जी चाहे निभालो,आपकी मर्ज़ी है ये,
देखलो इसका पहाड़ा,सोलह दूनी आठ है..

Monday, 27 January 2020

काम कर दें

कभी तो ऐसा भी काम करदें
सवेरे उठ कर सलाम करदें
किसीकी नींदों से क्या ग़रज़ हो,
शुरू अभी हों ऑ शाम करदें
उर्मिला माधव
28.1.2018

सहारा देते हैं

जब भी मुश्किल ज़ीने हम तै करते हैं
दीवारों के साए सहारा देते हैं
उर्मिला माधव

बेवफ़ा है

2014 में लिखी एक ग़ज़ल---

ये तो ज़ाहिर है,वो बिलकुल बे-वफ़ा है,
हाँ मगर दिल का अलहदा फ़लसफ़ा है,

क्यूँ किसी इन्सान का शिकवा करूँ मैं,
गम मेरी तक़दीर का अव्वल सफ्हा है,

बारहा तन्हाइयां हैं,बारहा वीरां सफ़र भी,
क्या समझते हो महज पहली दफा है??

रंजिशें जमकर निभायीं वक़्त ने भी, 
ज़िन्दगी में हर कोई मुझसे खफा है,

वक़्त की...महबूब की,तक़दीर की या,
आप सब बतलाइये किसकी ज़फा है?? 
उर्मिला माधव...
27.1.2014..

पाबंदियां

दिल पे हैं पाबंदियां और तयशुदा है हर हिसार,
जाने उसने क्यूँ रखा है, अब तलक मुझको शुमार,
उर्मिला माधव

हज़ारों फ़ैसले

बेटू ....
वक़्त ही बदले है, दुनिया के हज़ारों फ़ैसले,
जिस्म की रफ़्तार अपने तौर पे रहती है बस,
उर्मिला माधव

Thursday, 23 January 2020

मुस्कुराते हैं

गहरे ज़ख़्मों पे चोट खाते हैं,
अहले दिल यूँ ही मुसकुराते हैं,
ग़ुज़रे शामो सहर किसी तरहा,
रात होते ही टूट जाते हैं,
दर्दे क़ुरबत से रू-ब-रू होकर,
चश्मे ग़िरियाँ में डूब जाते हैं 
उर्मिला माधव..
24.1.2013
२४.१.२०१३

शोहरत की

मुझको ख़ाहिश कहाँ है शोहरत की,
जो भी कुछ है ,..मेहर है क़ुदरत की,
मेरी उल्फ़त तो ,....बस कलम से है,
उम्र भर ,...इसके साथ शिरक़त की, 
#उर्मिला
24.1.2015...

गुथ्थम गुथ्थ है

रोक कर कोई दिखाये,जो ये गुथ्थम गुथ्थ है,
रात-दिन चर्चा सियासत पर करो ये मुफ्त है,
उर्मिला माधव...
24.1.207

शनास दुनिया

अरबों-खरबों शनास दुनियां,
तेरे इलज़ाम से जड़ी दुनियां,
तेरी नज़रों में बस पड़ी दुनियां,
कौन ख़्वाहिश में किसकी रहता है,
किसके रस्ते में है खड़ी दुनियां?
चलते-चलते थके हुए से क़दम,
रोज़ कुछ दूर और चलते हैं,
रोज़ तकते हैं अपनी वीरानी,
टूट कर बैठ तो नहीं जाते,
और चलते हैं,और चलते हैं,
रहगुज़र साथ साथ चलती है,
ज़िन्दगी आदतन निकलती है,
गिरती पड़ती है फिर संभलती है,
जिस्म की आदतों में ढलती है,
ये ही दुनियां है,यूँ ही चलती है,
उर्मिला माधव,
23.1.2017

गवाही हूँ

मैं ........सियह रात की गवाही हूँ,
ख़ुद बख़ुद उसकी आवा-जाही हूँ,
कुछ परिंदों के ....पंख बिखरे हुए,
ज़ेह्न-ए-गुलज़ार की .....तबाही हूँ
उर्मिला माधव..
23.1.2017

हो जाएंगे

कितनी नाफ़र्मानियों का ज़िक्र हो,
कहते कहते बद ज़ुबाँ हो जाएंगे
उर्मिला माधव
23.1.2018

Sunday, 19 January 2020

मसरूफ़ हूँ

गैर के हाथों में उसने......आईना देकर कहा ,
तुम चली जाओ यहाँ से मैं बहुत मसरूफ हूँ ....
उर्मिला माधव...
20.1.2014.

दीवारें

अब ये दीवारें। ..बड़ी होने लगी हैं,
इनमें गुंजाइश कहाँ दर खोलने की। ..
उर्मिला माधव। 
20 .1 .2017

शैफ़ ने

शैफ ने कितना सजाया गोश्त को,
गोकि शामिल है सफ़र तक़लीफ़ का
उर्मिला माधव

ज़माने के लिए

आये हैं वो क्यूँ हमें अब आज़माने के लिए,
छोड़ तो हम आये हैं उनको ज़माने के लिए...
उर्मिला माधव...
२०.१.२०१४.

भारी रहा

दिल के बहलाने को सौ तरक़ीब कीं,
उम्र भर दिल ही बहुत भारी रहा ..
उर्मिला माधव ..
20.1.2017

गुंजाइश

अब ये दीवारें। ..बड़ी होने लगी हैं,
इनमें गुंजाइश कहाँ दर खोलने की। ..
उर्मिला माधव। 
20 .1 .2017

दुनिया उतार फेंकी है

मैंने दुनिया उतार फेंकी है,
जिसका जी चाहे वो पहन डाले
उर्मिला माधव

अख़बार नहीं

दिल मिरा तेरी निगाहों का तलबगार नहीं,
एक इंसां हूँ, तेरे द्वार का अख़बार नहीं,
::
Dil miraa teri nigahon ka talabgar nahiN,
Ek insaaN hun tere dwar ka akhbaar nahiN..
उर्मिला माधव

Saturday, 18 January 2020

मरासिम है

सहेली मुझसे ये बोली,कहाँ रिश्ता मरासिम है ??
फरेबों की लड़ी पर देर तक हँसते रहे हम भी...
उर्मिला माधव...
19.1.2015...

जायज़ है

दिमाग़ी ख़ूबियों पर फ़ख़्र करना ख़ूब जायज़ है,
कभी ऐसा भी होता है ज़माना दिल में हँसता है...
उर्मिला माधव...
19.1.2015..

भरम रखना

तमाशा ख़ूब कर लेना,मगर इतना भरम रखना,
मुक़ाबिल हों कभी जो हम तो खुलके मुस्कुरा पाएं..
उर्मिला माधव...
19.1.2015

मांजा टूट जाता है

पतंगें जब उड़ाते हैं तो उसमे ढील देते हैं,
वगरना खींचातानी से तो मांजा टूट जाता है....
उर्मिला माधव...
19.1.2015...

करिश्मा ही सही

ये उसकी तेज़ निगाही का करिश्मा ही सही,
फिर भी क़ाबिज़ न हुआ दिल पे ये मंज़र कोई...

Ye uski tez nigaahii ka karishma hi sahii,
Phir bhi qabiz n hua,dil pe ye manzar koii...
उर्मिला माधव ..
18.1.2016

बाक़ी है

अभी संमझी कहाँ तुमने समझना और बाक़ी है,
ये दुनियां तब शुरू होती है,जब  इनसान ढलता है..
उर्मिला माधव ..
17.1.2018

ऊंची गगन सी

कल्पनाएँ तो ह्रदय की होगयीं ऊंची गगन सी,  
वास्तविकता के सहज सोपान होते ही कहाँ हैं??
मंदिरों में देवता पर......पुष्प चढ़ते हैं सहस्त्रों, 
किन्तु सब निष्प्राण है,वरदान होते ही कहाँ हैं?? 
उर्मिला माधव...

झूठ की शक़्ल

झूठ की शक़्ल ही अजब देखी,
ये न बतलाएंगे ....के कब देखी,
ऐसी दुनिया पे हो यकीं किसको,
जो के बे नाम .....बे नसब देखी,
उर्मिला माधव

Thursday, 16 January 2020

सुकूं की बात

उसकी समझ में आये क्यूं, मेरे सुकूं की बात,
जो वाक़ये को वाक़ये से बढ़के ले गया 
उर्मिला माधव .
17.1.2017

बाक़ी है

अभी संमझी कहाँ तुमने....समझना और बाक़ी है,
ये दुनियां तब शुरू होती है,जब  इनसान ढलता है..
उर्मिला माधव ..
17.1.2017

लफ़्फ़ाज़ है

गिरया उसका हश्र होना लाज़िमी है,
जो ख़यालों से फ़क़त लफ़्फ़ाज़ है...
उर्मिला माधव,
17.1.2018

Wednesday, 15 January 2020

रहोगे यूं

कितना हसद करोगे मियाँ मर रहोगे यूँ,
ये तर्बियत मिली है तुम्हें किस जहान से......
उर्मिला माधव...
16.1.2015....

आसमां लिखें

शेर-ओ-सुखन का रंग भी कितना अजीब है,
रहते हैं सब ज़मीं पै .....मगर आसमां लिखें,
दिल रंजग़र ....ऑ आँख में आंसू भी ख़ूब हैं,
जलती हुई क़लम से मगर .....शादमां लिखें.....
उर्मिला माधव...
16.1.2017....

Tuesday, 14 January 2020

हो जाए तो

ज़िंदगी ने जाने कितने ....रंग ओढ़े हैं यहां,
क्या करें ये ज़िन्दगी ही बेवफ़ा हो जाए तो
उर्मिला माधव
15.1.2018

Monday, 13 January 2020

जारी रखें

ज़ुबान शीरीं रखें ख़ूब क़द मयारी रखें,
दुआ सलाम का इक सिलसिला भी जारी रखें...
उर्मिला माधव

उठाते हैं

हम उनके द्वार पे जाते हैं,लौट आते हैं,
वो उसके बाद भी तो उंगलियां उठाते हैं
उर्मिला माधव
14.1.2018

लगती है

रूह तो मर गई सी लगती है,
ज़िन्दगी डर गई सी लगती है,
बेबसी राह में मिली थी कभी,
अब मिरे घर गई सी लगती है
उर्मिला माधव

सानी नहीं होता

मुहब्बत करने वालों का कोई सानी नहीं होता,
बिना खोले ही ये मजमून ख़त का भांप लेते हैं....
उर्मिला माधव....
13.1.2015

धोका दिया

यूँ तो बन कर दोस्त ही आया था वो,
बाद उसके ....उम्र भर धोका दिया....
#उर्मिलामाधव
13.1.2016

Sunday, 12 January 2020

परदे रहे

उसकी जानिब से बहुत परदे रहे,
दुश्मनों ने आके सब बतला दिया...
#उर्मिलामाधव,
13.1.2016

Friday, 10 January 2020

नूर ए हिंदुस्तान हुई

ग़ैर मुल्क मैं चर्चे इसके,नूर-ए-हिन्दुस्तान हुई,
लाशों के अम्बार पे बैठी दिल्ली कब्रिस्तान हुई,
लाल किले की दीवारों से परचम भी लहराता है,
किसे खबर है इसके पीछे,किसकी जाँ कुर्बान हुई...
उर्मिला माधव...
11.1.2014...

देखा किये

जाने वाला कह गया था, आ रहे हैं लौट कर,
द्वार घर का खोल कर हम उम्र भर देखा किये...
उर्मिला माधव

तमाशा ज़िंदगानी है

तमाशा,ज़िन्दगानी है, अजब दुनिया-ए-फ़ानी में,
सफ़र है काफ़िलों में और अकेले कूच करना है,
उर्मिला माधव...

Thursday, 9 January 2020

झुका पाई हूँ

मिरे आक़ा तेरी  दुनियावी रस्मों की क़सम,
मैं किसी तौर भी गरदन न झुका पाई हूँ..
उर्मिला माधव..
10.1.2017

दुनिया

ये इश्क़ो मुहब्बत की दुनियां,
हर शख़्स के दिल को भाती है,
कुछ हम जैसे दीवाने हैं जो 
रंज गवारा करते हैं
उर्मिला माधव

Wednesday, 8 January 2020

तस्वीर देखिए

अब ताज़िराते हिन्द की तस्वीर देखिये, 
हर जाविये से मिट रही तक़दीर देखिये ,

कुछ ठीकरों में बेचता इंसान अपने ख्वाब, 
चलती कहाँ है कोई भी तदवीर देखिये,

उफ़ गर्द में निहां है यहाँ आदमी की ज़ात, 
हर पाँव अब हुआ है यूँ ज़ंजीर देखिये,

रहजन हों सलातीन तो बुनियाद भी है खाक़, 
लुटती हुई वतन की ये जागीर देखिये,

औक़ात अब बशर की कहाँ कोई है जनाब , 
कुछ शोहदों के हाथ में शमशीर देखिये... 
उर्मिला माधव.... २९.८.२०१४....

Tuesday, 7 January 2020

एक हंसी अबोध सी

एक हंसी,अबोध सी,
हिला देती है,अंतर्मन को,
पथ्थरों की श्रृंखलाएं,
मार्ग कंटक पूर्ण हैं सब,
सूर्य की कुछ रश्मियां हैं
और निहित है आग इनमें,
सामना करना न जाने,
कौन समझायेगा उसको,
वो जो है निश्छल कली सी,
मुक्त होना चाहती है,
चाहती उड़ना,गगन में,
मैं सहम कर देखती हूँ,
याचना ईश्वर से करके,
उसकी खुशियां मांगती हूँ...
उर्मिला माधव 
8.1.2017

और जुदा

हमसे कुछ हो भी सका तो सिर्फ़ ये,
सर झुकाया हाथ जोड़े 
और जुदा.
उर्मिला माधव

दिल मोअतबर न था

Main janti thi dil ye kabhi motbar n tha,
Ye bhi ajeeb mod par aa kar dahal gaya,
मैं जानती थी दिल ये कभी मोतबर न था,
ये भी अजीब मोड़ पर आ कर दहल गया...
उर्मिला माधव
8.1.2018

Monday, 6 January 2020

छुपा भी लिया

मैंने सजदे में सर ...झुका भी लिया,
अस्ल जो..ज़ख़्म था छुपा भी लिया,
आज़माइश भी ...सब की  ख़ूब हुई,
जितना चाहा था वो दिखा भी लिया...
उर्मिला माधव..
7.1.2017

दिखाती रही

ज़िन्दगी ........दर-ब-दर घुमाती रही,
जाने किस-किस का घर दिखाती रही,
ख़ुद ही .........हिम्मत को दाद दी मैंने,
दुनियां .......बुनियाद पर हिलाती रही..
उर्मिला माधव..
7.1.2017

उठ जाओ

चार मिसरे Siya Sachdev जी के लिए ...

यूँ न हलकान हो के मुुरझाओ,
अपना उन्वान हो के उठ जाओ,
ये जो दुनियां है ये किसीकी नहीं,
ख़ुद ही तूफ़ान हो के उठ जाओ..
उर्मिला माधव..
7.1.2017

Sunday, 5 January 2020

ज़रूरी हो गया

कुलबुलाता फिर रहा था गोकि इक ज़हरीला सांप,
आस्तीनें झाड़ना बेहद ज़रूरी हो गया.
उर्मिला माधव,
6.1.2018

Friday, 3 January 2020

ओढ़ रजाई

aadarneeyRakesh Rakesh Achal ji ki kavita par ek comment unhin ki tarz par :-)

hamne pahle hi kaha ho jaao taiyaar,
haar jeet k mamle hote hain bekaar,
hote hain bekaar mat karo guththam guththa,
khaa lo badhiya paan,lagake choona kaththa...
kahen Urmil kaviraai so raho odh rajayi,
kisne jana neend tumhen aayi na aayi..   :-)  Urmila Madhav

अड़नी थी

बात कुछ इस तरह बिगड़नी थी,
अपनी-अपनी जगह पै अड़नी थी,
सब को इक दूसरे से शिकवा था 
खुद-ब-खुद ही लड़ाई लड़नी थी....
 Urmila Madhav...
4.1.2015...

शोर मचाते हैं

बाहर की आवाज़ सुनाई देगी क्यों,
भीतर .जब सन्नाटे शोर मचाते हैं...
उर्मिला माधव 
4.1.2016

दब गए

सब दुआएं थीं ....तहे दिल से अगर,
किन तहों में,दिल,दुआ सब दब गए 

sab duaen thin ......-tahe dil se agar
kin tahon men dil dua sab dab gaye 
Urmila Madhav
4.1.2016

फ़िक़्र ए ज़र्फ़ है

हम तो समझ रहे थे उन्हें फ़िक़्र-ए-ज़र्फ़ है,
महफ़िल में उनको देख के हैरान रह गए...
उर्मिला माधव

Thursday, 2 January 2020

गुज़र

jee rahe hain zindagi kuchh aise haal se,
jaise kisi bhi haal main hoti nahin ghuzar,
Urmila Madhav

स्थितप्रज्ञ

एक है ये मन ....सो स्थितप्रज्ञ है,
कर्म समिधा हैं ऑ जीवन यज्ञ है,
सब ही है अनुसार जीवन चक्र के,
सर्वथा अनुभूति भी .....सर्वग्य है..
उर्मिला माधव,