ये मेरे शेर और क़तआत ---
Saturday, 18 January 2020
झूठ की शक़्ल
झूठ की शक़्ल ही अजब देखी,
ये न बतलाएंगे ....के कब देखी,
ऐसी दुनिया पे हो यकीं किसको,
जो के बे नाम .....बे नसब देखी,
उर्मिला माधव
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