Thursday, 23 October 2025

चोट खाते हैं

गहरे ज़ख़्मों पे...चोट खाते हैं,
अहले दिल यूँ ही मुसकुराते हैं,
ग़ुज़रे शामो सहर किसी तरहा,
रात होते ही.........टूट जाते हैं,
दर्दे क़ुरबत से...रू-ब-रू होकर,
चश्मे ग़िरियाँ में...डूब जाते हैं...
उर्मिला माधव..
२४.१.२०१३

हुस्न ए शबाब

मालूम होगा आपको शक़्ल -ए-हबाब क्या है,
कांटों का साथ है तो हुस्न-ए-गुलाब क्या है,

ये ज़िन्दगी है इसमें, उजलत नहीं ज़रूरी,
मर्ग-ए-बशर ये समझे हश्र -ए-शबाब क्या है,
उर्मिला माधव 
24.10.2018

Monday, 20 October 2025

चराग़

हमारे शहर में इतने चराग़ रौशन हैं,
फिरे है तीरगी भी अपना मुंह छुपाए हुए,
इसीको देख के अब्र ए बाहर हाज़िर है,
ख़ुशी के रंग भी लाई है संग बहाए हुए...
उर्मिला माधव

Wednesday, 15 October 2025

पलते हैं

हमारे दिल जिगर में भी हज़ारों दर्द पलते हैं,
समझ लो वज़्न ये सारे हमारे साथ चलते हैं...
उर्मिला माधव 

Tuesday, 14 October 2025

फ़क़त रेशम सी गांठें थीं

गीता वर्मा
आदरणीया Urmila दीदी की एक ग़ज़ल....
इतनी प्यारी लगी कि शेयर किये बिना न रह सकी....

फ़क़त रेशम सी गांठें थीं...ज़रा सी खोल ली जातीं,
जो बातें दिल को चुभती थीं,जुबां से बोल लीं जातीं,

अगरचे खौफ़ इतना था...कोई दिल पर न लेजाये,
कहीं कहने से पहले एहतियातन...तोल ली जातीं,

मुहब्बत को सलीके से....निभाना ही नहीं था तब,
ज़रुरत क्या थी ऐसी मुश्किलें खुद मोल ली जातीं,

फरेब-ओ-मक्र में,फंसना,फंसाना शौक था जिनका,
दरीचे झाँकने को तब.........ज़मीनें गोल ली जातीं,

......उर्मिला माधव जी

Friday, 10 October 2025

उम्मीद कम थी

ख़ाब आए जब कभी भी दीद कम थी,
आप आए जब कभी उम्मीद कम थी,
बरसरे महफ़िल कभी चर्चा बहुत था,
मुस्कुराए जब कभी तनक़ीद कम थी,
उर्मिला माधव

Thursday, 9 October 2025

उसको आते हुए

जब हमने बज़्म में देखा जो उसको आते हुए,
किया है प्यार का दावा भी मुस्कराते हुए,

वफ़ा का तज़किरा जब भी किसीने छेड़ा है,
हमें भी अच्छा लगा उसकी सम्त जाते हुए,

हम अपनी बात को कहते हैं अपनी तौर महज़,
ज़माना हंसता रहा हमको जब सताते हुए,

हमारी जान कहीं अब भी उसमें पिन्हा है,
तो फिर न रंज हुआ उसका ग़म निभाते हुए,
उर्मिला माधव 

Tuesday, 7 October 2025

कभी दिल चाहता है

Kabhi dil chahta hai hum rahen tanhayi main hardum,
milega be-sabab kya gair ki beenayi main hardum,
hamaare dil k chhale kam hain kya jo gair ko dekhen.?
hamen gairat bhi roke hai bahut ruswayi se har dum.......
Urmila Madhav..

खूबियाँ कोई नहीं

राह जो चलनी है इसमें ख़ूबियाँ कोई नहीं,
रूह-ए-खुद को छोड़ के वक़्त-ए-गिरां कोई नहीं,

दह्र है जलता हुआ और पथ्थरों के आदमी
चिलचिलाती धूप है ऑ आशियाँ कोई नहीं,

और कितना आज़माना,जो हुआ वो ख़ूब है,
तुम वही हो,हम वही राज़-ए-निहां कोई नहीं,

है नया कुछ भी नहीं क्यूं इस क़दर हैरां हुए,
साथ चलने को तुम्हारे,अय मियाँ कोई नहीं,

सामने मक़्तल हुआ लो फ़िक़्र से ख़ारिज़ हुए 
इक यही रस्ता है...जिसके दरमियाँ कोई नहीं.....
उर्मिला माधव,

ज़िंदगी का वज़्न

हमारी ज़िंदगी का वज़्न ही इतना ज़ियादा है
हज़ारों कोशिशों पर भी फिसलती ही नहीं हरगिज़..
उर्मिला माधव

रब ज़माने के लिए

आपको हमने बुलाया दिल दुखाने के लिए,
वरना हम तैयार थे बस लौट जाने के लिए।।

हम ने रब का रास्ता देखा तो ये आया नज़र,
सब ज़माना रब की ख़ातिर, रब ज़माने के लिए..
उर्मिला माधव

धीरे धीरे

धीरे-धीरे हम जहां से हट गए,
ज़िन्दगी के इम्तिहां से हट गए,

जब हमें दरकार थीं तन्हाईयाँ,
बस हर इक तीरो कमां से हट गए,
उर्मिला माधव