ये मेरे शेर और क़तआत ---
Wednesday, 15 October 2025
पलते हैं
हमारे दिल जिगर में भी हज़ारों दर्द पलते हैं,
समझ लो वज़्न ये सारे हमारे साथ चलते हैं...
उर्मिला माधव
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