Thursday, 9 October 2025

उसको आते हुए

जब हमने बज़्म में देखा जो उसको आते हुए,
किया है प्यार का दावा भी मुस्कराते हुए,

वफ़ा का तज़किरा जब भी किसीने छेड़ा है,
हमें भी अच्छा लगा उसकी सम्त जाते हुए,

हम अपनी बात को कहते हैं अपनी तौर महज़,
ज़माना हंसता रहा हमको जब सताते हुए,

हमारी जान कहीं अब भी उसमें पिन्हा है,
तो फिर न रंज हुआ उसका ग़म निभाते हुए,
उर्मिला माधव 

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