ये मेरे शेर और क़तआत ---
Thursday, 23 October 2025
हुस्न ए शबाब
मालूम होगा आपको शक़्ल -ए-हबाब क्या है,
कांटों का साथ है तो हुस्न-ए-गुलाब क्या है,
ये ज़िन्दगी है इसमें, उजलत नहीं ज़रूरी,
मर्ग-ए-बशर ये समझे हश्र -ए-शबाब क्या है,
उर्मिला माधव
24.10.2018
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