ये मेरे शेर और क़तआत ---
Monday, 20 October 2025
चराग़
हमारे शहर में इतने चराग़ रौशन हैं,
फिरे है तीरगी भी अपना मुंह छुपाए हुए,
इसीको देख के अब्र ए बाहर हाज़िर है,
ख़ुशी के रंग भी लाई है संग बहाए हुए...
उर्मिला माधव
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