एक क़'ता
इश्क़ के जुमले सुने और आसमां में उड़ गए,
जिस जगह जाना नहीं था,वो ही रस्ता मुड़ गए...
दिल हुआ जब बदचलन,अच्छा बुरा सोचा नहीं,
अपनी दुनियाँ भूल कर जाने कहाँ पर जुड़ गए.....
उर्मिला माधव...
1.1.2015....
एक क़'ता
इश्क़ के जुमले सुने और आसमां में उड़ गए,
जिस जगह जाना नहीं था,वो ही रस्ता मुड़ गए...
दिल हुआ जब बदचलन,अच्छा बुरा सोचा नहीं,
अपनी दुनियाँ भूल कर जाने कहाँ पर जुड़ गए.....
उर्मिला माधव...
1.1.2015....
नया साल मुबारक ...
सर्द शोले हैं,....सर्द मौसम है,
ज़िन्दगी चाहती बहुत कम है,
बस ये दुनियां हरी-भरी करदे,
कुल ज़माने का तू मोहतरम है...
उर्मिला माधव ...
1.1.2016
ये मरा वाट्सऐप। ......मुसीबत है,
इसमें लोगों को कितनी फुरसत है,
फोर ए ऐम पर। .....शूरू हो कर ,
शब-ब ए-खैर तक से नि स्बत है....
अब नया साल। ...इसमें चस्पां है,
उफ़ जवाबों की किसमें हिम्मत है....
उर्मिला माधव। ..
31 दिसंबर 2016
वेदना के स्वर मुखर होने लगे सब,
शून्य से थे क्यूँ प्रखर होने लगे अब ??
हम ह्रदय पाषाण वत...रखते रहे हैं,
टूट कर गिरते शिख्रर होने लगे कब ??
उर्मिला माधव...
३०.१२.२०१३...
एक शेर...
एक दिन बरसात में जो आँख उसने बंद की,
फिर कभी सोचा नहीं जंगल दहकते हैं कहीं,
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Ek din barsaat main jo..........aankh usne band kii,
phir kabhi socha nahin,jangal dahkte hain kahiin...
उर्मिला माधव...
३०.१२.२०१३..
किसकी फुरक़त यूँ आज भारी है,
दर्द-ए-ग़म बे-हिसाब......तारी है,
होगी सुबहा तो......देखा जाएगा,
शब्-ए ग़म किस तरह गुज़ारी है...
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kiski furqat yun aaj bhaari hai,
dard-e-gum be hisab taari hai,
Sahar hogi to dekha jaayega,
Shub-e-gum kis tarah guzaari hai...
Urmila Madhav..
३०.१२.२०१३
किस-किसके हासिलात पै हलकान रहोगे,
बदरंग हो चुकी है ..ज़माने की शक्ल अब....
उर्मिला माधव....
30.12.2014....
रोके ही फूटती हैं बस आँखें,
पेड़ से टूटती हैं ...जब शाखें,
खोल कर मेरे हाथ मत देखो,
इससे बस छूटती हैं अब राखें...
#उर्मिलामाधव
30.12.2015
सांस भत्ते में मिली ....जद्दोजेह्द का बार भी,
इक गुज़ारेदार महंगी ज़िन्दगी जीता भी क्या...
उर्मिला माधव..
30.12.2016
सबकी पेशानी पे ........चस्पां हो गए फ़ख्र-ओ-गुरूर
हम बिना नाम-ओ-निशाँ छाना किये दुनियां की ख़ाक,
उर्मिला माधव...
29.12.2016
अक्स उनका रात-दिन हलकान करता था हमें,
हम इधर मानिंद-ए-शम्मा हर नफ़स जलते रहे,
उर्मिला माधव...
28.12.2016
अब आपको ज़मीन पर ....जन्नत दिखाएँगे,
हम अपनी माँ के हाथ का एक ख़त दिखाएंगे...
उर्मिला माधव....
27.12.2014..।
दिल में सब्र-ओ-क़रार ..कम ही सही,
जज़्बा-ए-इख़्तियार ......कम ही सही,
उस पे दामन में तार .....कम ही सही,
गुल-ओ-चमन-ओ-बहार कम ही सही
शुक्र है फ़िक्र तेरे बिन तो हूँ,
ख़ूब है ख़ुद से मुत्मइन तो हूँ...
उर्मिला माधव...
27.12.2016
एक जुगनू था,शह्र अनजान था,
उसको उड़ना था मगर हलकान था,
किस जगह पर सांस ले,बैठे कहाँ,
और क़दम बोसी करे,किसकी कहाँ,
फिर भी आख़िर वो क़दम भी चुन लिए,
जिनमें अपने ख़्वाब जाकर बुन लिए,
दुआ सलाम, ग़ुलामी के रंग में हो अगर,
ये वो सज़ा है के मुझसे क़ुबूल होती नहीं....
उर्मिला माधव...
26.12.2016..
अब रूह के सहारे ...चलते हैं हम ज़मीं पर,
एक जिस्म था,कभी का छलनी हुआ पड़ा है..
उर्मिला माधव,
25.12.2016
दिल कभी ज़्यादः दुखा बस रो लिए, चुप होगये,
ग़म सुलग कर बुझ गये और हम धुंए में खो गए ...
उर्मिला माधव...
24.12.2014...
मिलोगे ग़र जो मुफलिस से तो जानोगे फ़िक़र क्या है!!
किसी आशिक़ से मिल लोगे तो जानोगे जिगर क्या है!!
बहुत बेबाक़ सोता है..............बिछा कर टाट रस्ते मैं,
किसी दरवीश से मिलना तो जानोगे....कि ज़र क्या है!!
उर्मिला माधव...
२०.१२.२०१३.
लफ्ज़ कुछ इस तरह कहे जाते,
बात ही बात में .......छले जाते,
हमको मंज़ूर ...हर कमी होती,
आपके ....साथ हम चले जाते.....
उर्मिला माधव....
20.12.2014...
hamen haar jaane kii aadat thii itnii,
huii jiit haasil to ghabraa gaye ham,
::
हमें हार जाने की आदत थी इतनी,
हुई जीत हासिल तो,घबरा गए हम.....
#उर्मिलामाधव...
18.12.2015
ये दिल ढूँढता है जगहा अजनबी सी,
हवा अजनबी सी ,फ़ज़ा अजनबी सी,
ye dil dhundhta hai jaghaa ajnabii sii,
hawaa ajnabii sii fazaa ajnabii sii
कभी ज़िंदगी में ये दिन भी दिखाना,
के हर सम्त इक अजनबी रंग लाना,
ज़मीं अजनबी,आसमां अजनबी हो,
कोई शख्स हो रु-ब-रु,अजनबी हो,
kabhii zindagi main ye din bhi dikhaana,
ke har samat ik ajnabii rang laanaa,
zamiin ajnabii,aasmaan ajnabii ho,
koi shakhs ho ru-b-ru, ajnabii ho,
लगे जिसकी हर इक अदा अजनबी सी,
हवा अजनबी सी, फ़ज़ा अजनबी सी.....
lage jiski har ik adaa ajnabii sii,
hawa ajnabii sii fazaa ajnabii sii,
हथेली पे हों नाम कुछ अजनबी से,
पढ़े ही न जाएँ,पढ़ें हम कहीं से,
के हर एक इन्सान ही ,अजनबी हो,
सुनो मुख़्तसर,कुल जहां अजनबी हो,
hatheli pe kuchh naam hon ajnbi se,
padhe hii n jaayen,padhen ham kahin se
ke har ek insa,an hi ajnabi ho,
suno mukhatsar,kul jahaan ajnabi ho,
मिले दर्द-ए-दिल को दवा अजनबी सी,
हवा अजनबी सी, फ़ज़ा अजनबी सी...
mile dard-e-dil ko dawaa ajnabii sii,
hawaa ajnabii,ho fazaa ajnabii sii...
#उर्मिलामाधव.....
दुनियां तो चारागर किसीकी नहीं,
मुझको परवाह पर किसीकी नहीं,
कितना अच्छा है तीरगी से रसूख,
ये चमक उम्र भर ...किसीकी नहीं...
उर्मिला माधव,
18.12.2016
दोबारा---
=====
कल तलक हम सोचते थे हम बहुत बदकार हैं,
और मुहब्बत के जहाँ में......बारहा मक्कार हैं,
पर ज़रा जब गौर से देखा....तो ये आया नज़र,
एक से बढ़कर एक हैं,हम बे-वजह गमख्वार हैं...
kal talak ham sochte the,ham bahut badkaar hain,
or muhabbat ke jahan main baaraha makkar hain,
par zaraa jab gaur se dekha..........to ye aaya nazar,
ek se badhkar ek hain,ham be-vajh gamkhwaar hain
उर्मिला माधव...१४.१२.२०१३..
दुनियां की दोस्ती हो या आशिक़ी की चाहत,
हर बात से है बढ़कर,अतफ़ाल की मुहब्बत....
::
Duniyan ki dosti ho ya aashiqi ki chahat,
Har baat se badhkar atfaal ki muhabbat
#उर्मिलामाधव
13.12.2015...
अतफ़ाल--बच्चे
आशिक़ों के दिल जहाँ मैं जब निचोड़े जायेंगे,
सबसे आगे दर्द के क़तरे निकल कर आयेंगे,
उर्मिला माधव..
aashiqon ke dil jahaan main jab nichode jaayenge,
sabse aage........khoon ke qatre nikal kar aayenge..
Urmila Madhav...
7.12.2013...
नहीं चाहा कभी मैंने ......के मेरी बादशाहत हो,
तमन्ना सिर्फ इतनी थी के मेरे दिल को राहत हो,
::
Nahi chaha kabhi maine ke meri baadshahat ho,
Tamanna sirf itni thi ke mere dil ko raahat ho
#उर्मिलामाधव....
7.12.2015.
बरसरे बज़्म लो उस ने सलाम भेजा है,
ये ख़बर है ही नहीं किसके नाम भेजा है....
उर्मिला माधव...
7.12.2016
कितनी दबीं हैं रूहें ज़मीन-ए-जहान में,
रखते हैं पाँव खाक़ पे सौ बार देख कर.....
kitni dabiin hain roohen zamin-e-jahaan main,
rakhte hain paanv khaaq pe sau baar dekh kar...
उर्मिला माधव..
6.12.2013.
चल.......तेरा एहतराम करती हूँ
तेरी ख़ातिर.....ये काम करतो हूँ
दिल मेरी मिलकियत है, रहने दे,
कुल जहां......तेरे नाम करती हूँ....
उर्मिला माधव...
6.12.2014....
लोग.....इंसाफ़ क्यूँ नहीं करते,
गलतियां .माफ़ क्यूँ नहीं करते,
सबकी इक ज़ात सिर्फ़ इंसां है
बात ये ...साफ़ क्यूँ नहीं करते,
उर्मिला माधव...
6.12.2014..
मुझको तक़दीर ने कितना भी बदल डाला है,
पर मेरे ग़म का सफ़र फिर भी बहुत आला है,
उर्मिला माधव,
6.12.2016
क्यूँ मुहब्बत और सुकूं में ....आपसी रिश्ता नहीं,
किस तरह का दर्द है के है भी और दिखता नहीं,
उर्मिला माधव....
4.12.2014...
अपनी आँखों का फ़क़त नूर बना कर रखलो,
जाँविदा इश्क़ का.....दस्तूर बना कर रखलो,
अच्छा रहने दो चलो छोड़दो अपनी सी करो,
मुझको दिनरात का मजदूर बना कर रख लो...
#उर्मिलामाधव...
4.12.2015
कितनी सारी बाज़ियां हम जीत कर होते हैं ख़ुश,
ज़िन्दगी की आख़री बाज़ी .......कोई जीता नहीं .......
उर्मिला माधव....
3.12.2014.....
बाध्य ही तो है हरेक प्राणी समर्पण के लिए,
फूल रख्खे जायेंगे हाथों में...अर्पण के लिए,
बस यही अंतिम क्रिया होती है गंगा घाट पर,
बन्धु,बांधव सब जमा होते हैं तर्पण के लिए.
उर्मिला माधव....
3.12.2014...
जिस्म-ओ-जां मेरे रहे लो दिल तुम्हारा हो गया,
बस तभी से,दिल बेचारा,ग़म का मारा हो गया,
जो मुहब्बत तुमसे थी,उसका कोई सानी नहीं,
मुंह घुमाकर क्या गए दिल,पारा-पारा हो गया..
उर्मिला माधव...
3.12.2016
हमने तौले है पंख मुश्किल के,
अपनी ग़ैरत कहीं न झांकी है,
ज़िन्दगी भर के,ये ताजरिबे हैं
मुफ़्त कोई धूल नहीं फांकी है...
उर्मिला माधव..
3.12.2016
Jab talak thi zindagi,qabiz rahe duniyan ke log,
Maut ne aakar sabhi qisse baraabar kar diye..
जब तलक थी ज़िंदगी, क़ाबिज़ रहे दुनियां के लोग,
मौत ने आकर सभी .........हिस्से बराबर कर दिए...
उर्मिला माधव..
3.12.2016
कितने सारे। ...दर्द समेटे फिरता है,
दिल में आहें। ..सर्द समेटे फिरता है,
जब चाहे तब दुनियां अपनी रच डाले
बेमतलब की। ..गर्द समेटे फिरता है
उर्मिला माधव
चराग़ बुझने लगे,नींद अब कहाँ है बता,
न जाने कब से मेरी आँख दे रही है सदा,
कहाँ सुकून,कहाँ ज़ब्त औऱ ये ख़ामोशी,
हयात कब से मुझे यूँ ही दे रही है सज़ा,
क़यास-ए-कल्ब मेरा और अदा ज़माने की,
ये तीरगी भी फ़क़त ग़म को दे रही है हवा,
कब तलक कोई किसीको आज़माता ही रहे??
मोल अपनी चाहतों का ..क्यूँ चुकाता ही रहे ??
अपनी दुनिया भूलके दिल बेवज्ह सजदे करे,
क्यूँ किसी रस्ते में कोई ..सर झुकाता ही रहे ??
उर्मिला माधव...
2.12.2016
किसी भी आस्ताने पर...जबीं झुकती नहीं मेरी,
जो ग़र कहने पे आ जाऊं ज़ुबां,रूकतीं नहीं मेरी,
न जाने क्या समझते हैं जिगर पर चोट करते हैं,
मैं क्या बेजान पत्थर हूँ,कि रग दुखती नहीं मेरी??
उर्मिला माधव...
1.12.2013
अब्र-ए-बहार तुझको बरसना है किस जगह,
हर दश्त में है आग .........बराबर लगी हुई
उर्मिला माधव..
1.12.2016
ऐसे भी रंग लाता है अज़मत का आफताब,
पुरज़ोर है तबस्सुम,दिल ग़म से पाश-पाश ...
#उर्मिलामाधव....
29.11.2015
तक़ल्लुफ़ में पड़ो हो क्यों मियां........रहने भी दो जाओ,
बहे जाते है जो ख़ुद में ............उन्हें बहने भी दो जाओ,
कभी कुछ मसअले दुनियां में मुश्किल भी हैं समझे क्या ?
अगर तक़लीफ़ उनकी है ,......उन्हें सहने भी दो जाओ..
उर्मिला माधव,
29th november 2016
मुहब्बत है हमें तुमसे,.ज़रूरत ही नहीं,नईं-नईं,
छुड़ा लेंगे तुम्हें तुमसे,..ये सूरत ही नहीं,नईं-नईं,
हमारा दिल दुखाने में, ...ज़.माने बीत सकते हैं,
ज़रा भी ज़र्क़ आ जाए,वो मूरत ही नहीं,नईं-नईं..
उर्मिला माधव,
29.11.2016
होठों पे है तबस्सुम आँखों में है नमी सी,
यूँ लग रहा है जैसे शायद है कुछ कमी सी,
जज़्बात टूटते हैं,अल्फ़ाज़ रूठते हैं,
आलम तो है ख़ुशी का,क्यूँ लग रही ग़मीं सी,
शायद कि तुम नहीं हो,है साँस भी थमी सी,
आजाओ इन्तिहा है,है जान पर बनी सी....।। उर्मिला माधव..
<3 <3
मेरी अपनी ज़िन्दग़ी.. मेरी नज़र में ख़ूब है,
इसलिए हर रंग मेरा .....मुझसे ही मंसूब है,
ग़ैर की नज़रों में गिरना और उठना बेसबब,
कोई भी दुश्मन नहीं और नईं कोई महबूब है....
उर्मिला माधव....
उर्मिला माधव....
आज मैं तनहा बहुत घबराई री....हे माई री,
याद मुझको इस क़दर क्यूँ आई री हे माई री?
तेरे दामन की जो यादें,छा गयीं दिल पर मेरे,
नींद बिलकुल होगई हरजाई री....हे माई री..
उर्मिला माधव...
२८.११.२०१३.
बरसता है जो आँखों से उसे .......सावन कहेंगे हम,
लिपटता है जो शानों से उसे .......दामन कहेंगे हम,
मुसलसल ही घिरा रहता है जिसकी याद से ये दिल,
गुज़रता है जो साँसों से उसे .......साजन कहेंगे हम.....
उर्मिला माधव,
25.11.2016..
jab ye jaanaa tujh tak koi fariyaad nahin jaati hai,
sach batlaaun,mujhko bhi ab yaad nahin aatii hai,
----------------------------------------------------------------
जब से जाना तुझ तक कोई फ़रियाद नहीं जाती है,
सच बतलाऊं,.मुझको भी अब...याद नहीं आती है,
#उर्मिलामाधव...
27.11.2015
आपके लफ़्ज़ झूठे लगते हैं,
राहगीरों से .....लूटे लगते हैं,
इनमें पैगाम .कुछ नहीं होता,
सर पै पथ्थर से टूटे लगते हैं..
#उर्मिलामाधव,
27.11.2015
jalte rahne main bhi ek khaas sukun hota hai,
hum bhi ab jaanke sholon ko hawa dete hain...
hampe aansu ka bahut qarz abhi baaki hai,
isko her haal main har roz chuka dete hain..
tumko itni si bhi mushkil se bacha denge chalo,
jo bhi ilzaam hain hum khud hi laga lete hain...
Urmila Madhav
17.8.2013
आदमी अपने लिए खुद ही कफ़न बुनता है,
और मज़ा ये है .....कोई बात नहीं सुनता है.....
उर्मिला माधव....
26.11.2014...
हुजूम-ए-रंज की इफ़रात हुई सब्र गया,
सब्र जब टूट गया ख़्वाब तहे क़ब्र गया,
उर्मिला माधव
26.11.2016
पुराने पन्नों से---
दिल तो ख़ुद के ही ग़म से परेशान है,
कैसे दुनियाँ के ग़म से मुख़ातिब रहे??
फ़ैसले मेरे हक़ में...सुनाता ही कौन??
मेरे दुश्मन ही सब..मेरे क़ातिब रहे।
उर्मिला माधव...
२५.११.२०१३..
Barasta hai jo aankhon se usay saawan kahenge ham,
Lipat-taa hain jo shanon se usay daaman kahenge ham,
Musalsal hi ghira rahata hai .......jiski yaad main ye dil,
Guzarta hai jo saanson se usay ...saajan kahenge ham..
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बरसता है जो आँखों से उसे .......सावन कहेंगे हम,
लिपटता है जो शानों से उसे .......दामन कहेंगे हम,
मुसलसल ही घिरा रहता है जिसकी याद से ये दिल,
गुज़रता है जो साँसों से उसे .......साजन कहेंगे हम.....
#उर्मिलामाधव,
25.11.2015..
हक़ को हक़ मानके हक़ बोलने वाले ने यहाँ,
एक सजदे में .... .ज़मीं सर पै उठा रख्खी है,
उर्मिला माधव
25.11.2016
कितने भंवर लपेटे,मुश्किल मैं हम खड़े हैं,
हिम्मत नहीं है जिनमें साहिल पे ही पड़े हैं,
उर्मिला माधव...
२३.११.२०१३..
Sare mahfil hazaaron baat kahne waale sun to le,
Fajiihat ko sanbhalun ab ke ye lahaja sambhaalun main....
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सरे महफ़िल हज़ारों बात कहने वाले सुन तो ले,
फ़जीहत को संभालूं अब के ये लहज़ा संभालूं मैं.......
उर्मिला माधव....
22.11.2014...
मृत्यु को हम क्रूर कहते......ये हमारी भूल है,
येही जीवन चक्र है तब किस तरह प्रतिकूल है??
जन्म के ही साथ मृत्यु सर्वथा निश्चित यहाँ,
सत्यता से बचके चलना हर तरह...निर्मूल है...
उर्मिला माधव...
20.11.2014...
मुश्किल ही खड़ी करता,जाड़ों का ये मौसम,
रातें ही बड़ी करता........जाड़ों का ये मौसम,
महदूद होके घर में.......बस बैठना मुबारक,
कोहरे की झड़ी करता...जाड़ों का ये मौसम.....
उर्मिला माधव....
21.11.2014....
हमको लिखना ही नहीं आता,बताओ क्यों लिखें हम ??
सबकी मर्ज़ी के मुताबिक ये बताओ...क्यों दिखें हम ??
उर्मिला माधव...
२०.११.२०१३..
ये जो बेकार सी तस्वीर सजा रख्खी है ...
ये मेरे ज़ेहन में हलचल नहीं पैदा करती
Ye jo bekar si tasvir sajaa rakkhi hai,
Ye mere zehan men halchal nahi paida karti,
उर्मिला माधव..
20.11.2016
मनुज जब गर्वित होता है,
समय परिवर्तित होता है,
ज्ञान भी दान में नहीं मिलता,
श्रम सहित अर्जित होता है,
पुराने पन्नों से--------
----------------------
सबकी तक़दीर सितारों से जड़ी लगती है,
अपनी सुनसान चनारों में पड़ी लगती है.......
उर्मिला माधव..
27.3.2013
ज़िन्दगानी-ए-शरीयत.....ख़ैरियत रखती नहीं,
कौनसी हस्ती है जो कुछ क़ैफ़ियत रखती नहीं,
क्यूँ किसीको हम मसीहा मान कर सजदा करें,
हिम्मत-ए-इंन्साँ सबाब-ए- हैसियत रखती नहीं....
उर्मिला माधव
१८.११.२०१३
मुक़म्मल लग रहा है ये मगर जैसे अधूरा है
नहीं मुझको नहीं लगता के ये पैग़ाम पूरा है...
उर्मिला माधव....
18.11.2014...
एक पुराना मतला----
जो उल्फ़त के मद्दे नज़र आ रहे हैं,
वो दिल में हसद से ..मरे जा रहे हैं....
::
jo ulfat ke Madde nazar aa rahe hain,
wo dil main hasad se mare ja rahe hain..
#उर्मिलामाधव
18.11.2015
Chot khaa kar bhi kambakhht ye nahi toota,
dil kisi roz hum deewar pe de maarenge...
चोट खा कर भी कमबख़्त ये नहीं टूटा,
दिल किसी रोज़ हम दीवार पे दे मारेंगे..
उर्मिला माधव
sach bayaani ho kisikii ,shukriya karte hain ham,
warna logon ka chalan hai,kar guzar or bhaag chal..
#उर्मिलामाधव। .
17.11.2015..
तग़य्युर से हूँ वाबस्ता,.....हक़ीक़त तो यही है पर,
मैं किसको साथ लाऊं अब बताओ इस गवाही में....
उर्मिला माधव..
17.11.2016
तग़य्युर... change बदलाव
जो भाषा तुझको है आती,मुझको नहीं वो आती रे,
पावन प्रीत सहज है मुझ में मेरी यही है थाती रे,
तेरे मन में पूरी दुनियां,मेरे मन में केवल तू ,
छल प्रपंच में रचा बसा तू,मेरा नहीं संगाती रे
उर्मिला माधव..
17.11.2016
जोश-ए-उल्फ़त में सू-ए-दिलबर चली जाती हूँ मैं,
कौन हूँ,क्या चाहती हूँ........कब ये बतलाती हूँ मैं,
बे-तवज्जो सा रवैय्या............बाखुदा महबूब का,
तोड़ते जाते हैं वो............और जोड़ती जाती हूँ मैं.....
उर्मिला माधव...
16.11.2014...
आज ख़मियाज़ा तेरी उल्फ़त का भी भरना पड़ा,
इस क़दर गुज़री,यक़ायक़ ज़ब्त भी करना पड़ा,
उर्मिला माधव...
16.11.2014...
अजब तमाशा है आशिक़ी का,
नज़र किसीकी सनम किसीका,
ज़ुबान शीरीं,फ़रेब दिल में,
न कोई समझे है ग़म किसीका,
उर्मिला माधव
कमज़ोर पड़ रही है,रिश्तों की पायदारी,
दुश्मन कहीं छुपा है कोई तुम में और हम में,
ये ज़िन्दगी किसीकी कब मिलकियत हुई है,
रख्खा नहीं है कुछ भी इन वादा-ऑ-कसम में,
उर्मिला माधव...
15.11.2016
ना क़ायल है सितारों की मेरे चेहरे की ताबानी,
ग़म-ए-दौराँ में भी देखो तबस्सुम मेरा लासानी,
तलातुम चाहे जैसा हो,करेगा क्या उसे फानी..?
कि जिसने डूब कर देखा हो ये दरिया-ए-तूफ़ानी.....
उर्मिला माधव.
१४.११.२०१३..
:) :) :)
---------
एक ग़ज़ल लिख्खी जो तुमने कस्टमाइज़,
बस........वहीँ से होगया क्वेश्चन अराइज़,
है बहुत मुमकिन के....हम बे-अक्ल ही हों,
तुम कहाँ साबित हुए.....कोई ख़ास वाइज़ ....!!
उर्मिला माधव...
14.11.2014...
मेरी डायरी से-----
चढ़ते तूफ़ाँ में कभी क़श्ती उतारी होती,
ख़ूब तबियत से वहीं शाम गुज़ारी होती,
जो कहीं हद से गुज़र जाता अगर जोशे जुनूँ,
हम फ़ना होते मगर बात तुम्हारी होती..
उर्मिला माधव..
30.7.2013
जिसको देखो वो मुक़ाबिल आ गया,
मुश्किलों पर मेरा भी दिल आ गया,
मैंने सोचा हाथ से जाने भी क्यों दूं ,
इतने नेज़ों बीच बिस्मिल आ गया,
इस तखैय्युल में बुराई क्या है बोलो,
आँख बस मूंदी के साहिल आ गया,
उर्मिला माधव...
13.11.2014...
ये ज़माना और इसकी ख़ुद परस्ती,
मुख़्तसर,इनसान की औक़ात सस्ती,
हो अगर ख्वाहिश कहीं बाक़ी बक़ाया
बन तमाशाई जला के दिल की बस्ती,
भूलजा सब हम पियाला हम निवाला,
याद रख जिंदा दिली और फ़ाक़ा मस्ती,
उर्मिला माधव...
13.11.2015..
उनसे मिलते हैंं तो ग़म और बिखर जाते हैं,
अब तो ये है के ख़यालों से भी डर जाते हैं,
कैसे हाथों की लकीरों को लिखा क़ुदरत ने,
इस पे ग़र सोच भी लेते हैं तो मर जाते हैं,
उर्मिला माधव
तुमने हमसे कब कहा,खुशियाँ मुबारक?
खालिक-ए-आबाद की दुनियाँ मुबारक,
वास्ते अपने फ़क़त इतना ही वाज़िब?
तालिब-ए-अहबाब की सदियाँ मुबारक?
उर्मिला माधव...
9.11.2014...
वो मेरी सूरत पे बोले ख़ूब है,
हर कोई बस हुस्न से मंसूब है,
क़द्रदां सीरत का भी है कोई तो
क्या बताऊँ,कौन वो महबूब है...
उर्मिला माधव
9.11.2016
हम हमेशा दर्द के............भरपूर घेरे मैं रहे,
वो दग़ा करते रहे और.......हम अँधेरे में रहे,
उनके दिलने गैर को पुरज़ोर"सुन्दरतम"कहा,
हम ही कुछ न कह सके...बस तेरे-मेरे में रहे,
उर्मिला माधव.. ७.११.२०१३..
वो जो चेहरे पै ज़ेब रखते हैं,
दिल में ख़ासा फ़रेब रखते हैं,
ऐसी दुनियां को क़ुफ़्र कहते हैं,
दिल में हम भी ज़रेब रखते हैं...
उर्मिला माधव...
8.11.2014...
ज़ेब--- खूबसूरती,
ज़रेब---शिकन...
बेखुदी के दायरों से कुछ निकल कर बात कर,
ज़ख्म बातों का नहीं भरता,संभल कर बात कर....
उर्मिला माधव...
8.11.2015
Barq bhi girti rahii or toor bhi jalta rahaa,
Faisla qudrat karegii,baangii ke taur par..
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बर्क़ भी गिरती रही और तूर भी जलता रहा,
फैसला क़ुदरत करेगी.....बानगी के तौर पर..
#उर्मिलामाधव..
8.11.2015
क़त्ल अपने दिल का हमने अपने हाथों कर दिया,
दिल को जब भाई नहीं,आवारगी एक शख़्स की...
उर्मिला माधव...
8.11.2016
फिर पलट कर रात दिन हम,उस तरफ़ देखा किये,
फिर नहीं देखी गई .........बेचारगी एक शख़्स की...
उर्मिला माधव
ऐसे तो सब खैरियत,फिर भी हैं बद हाल,
कब से करते आ रहे,ग़म का इस्तक़बाल.....
उर्मिला माधव...
7.11.2016..
मुहब्बत की ज़ुबां समझे ...न धड़कन की ज़ुबां समझे,
अभी तक हम नहीं समझे,के वो समझे तो क्या समझे?
उर्मिला माधव..
7.11.2016
था हमें मालूम.........कोई हादसा हो जाएगा,
ये नहीं मालूम था......इतना बुरा हो जायेगा,
दिल के टुकड़े हाथ में लेकर फिरेंगे जा-ब-जा,
जो भी हम लिखेंगे वो सब,फातिहा हो जायेगा....
उर्मिला माधव...
5.11.2014...
हम बुलाते रह गये वो चल दिया मुह मोड़ कर,
उसकी हरकत ने हमारा गम दोबाला कर दिया...
ःः
Ham bulaate rah gaye wo chal diya munh mod kar,
,Uski harqat ne hamara gam dobala kar diya ....
Urmila Madhav.
5.11.2016
fizaan bekaar lagti hai chaman bekaar lagta hai,
ayaadat ke hujoomon se bhi dil bezaar lagta hai..
agar kuchh raas aata hai,to ek takiya faqat bistar,
wagarna saans lena bhi bahut dushwar lagta hai..
bukhaar aaya hai kahna bhi bahut achcha nahi lekin,
dawayen dekhkar jeena bahut murdaar lagta hai..
Urmila Madhav...
4.11.2014...
किसी भी आस्ताने पर...जबीं झुकती नहीं मेरी,
जो ग़र कहने पे आ जाऊं ज़ुबां,रूकतीं नहीं मेरी,
न जाने क्या समझते हैं जिगर पर चोट करते हैं,
मैं क्या बेजान पत्थर हूँ,कि रग दुखती नहीं मेरी??
उर्मिला माधव...
4.11.2015
कितने भंवर लपेटे,मुश्किल में हम खड़े हैं,
हिम्मत नहीं है जिनमें साहिल पे ही पड़े हैं,
उर्मिला माधव...
4.11.2015
मुहब्बत में मुझे हर हाल में मजबूर होना है,
ये जब तक ह तभी तक इश्क़ में मख़मूर होना है,
अगर इस घर से जब जइयो,तो दिल को तोड़ता जइयो,
क्यूँ फिर बाकी बचें शीशे इन्हें भी चूर होना है ।। उर्मिला माधव.....
मैं वही हूँ जो नहीं होना था मुझको,
ज़िन्दगी हूँ,इक यही रोना था मुझको,
लाद के करती भी क्या बार-ए-मुहब्बत,
ज़ख़्म ही तो उम्र भर धोना था मुझको,
मैं समंदर से,हवा से,किसलिए लड़ती फिरूँ
जब मुझे अहसास है तू साथ तो देगा नहीं...
उर्मिला माधव
30.10.2015
तस्वीरी शेर-----
jab gulon ke paas se guzre to ye dil kah uthaa,
bas dur-e-dindaan kii duniyaan hataa lo ik taraf....
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जब गुलों के पास से गुज़रे तो ये दिल कह उठा,
अब दुर-ए-दिन्दान की दुनियां हटालो इक तरफ़....
उर्मिला माधव...
29.10 2014...
muhabbat kii raftaar......tham sii gaii hai,
zamaana hai jaabir kise gam bataanaa,
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मुहब्बत की रफ़्तार थम सी गई है,
ज़माना है जाबिर,किसे गम बताना...
उर्मिला माधव...
29.10 2014..
जाबिर---- अत्याचारी
Ek Ajnabee khatun ko maa kah diya usne,
Magar mazhab ne uske daayre mahdood kar daale...
#उर्मिलामाधव..
29.10.2015
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एक अजनबी ख़ातून को ....माँ कह दिया उसने,
मगर मज़हब ने उसके दायरे महदूद कर डाले..
इंसाँ की ज़िन्दगी भी .......हर ग़ाम इम्तिहाँ है,
तौफ़ीक़ मुझको देदे .....आब-ए-हयात रखलूँ,
कैसी भी रहगुज़र हो,.....रफ्तार हो मुक़म्मल,
महफ़िल में आलिमों की अपनी बिसात रखलूँ
उर्मिला माधव
3.7.2013
ग़ाम---क़दम
तौफ़ीक़---शक्ति
आब-ए-हयात--ज़िन्दगी का पानी--यानी ---अमृत
रहगुज़र--रास्ता
मुक़म्मल--अटल
आलिम---विद्वान..
हो कहीं भी तुम,हमारे साथ हो,
यूँ हमारी ज़ीस्त की सौगात हो,
ज़िन्दगी ये चाहती है तुमसे अब,
तुमको देखूं दिन हो चाहे रात हो,
वो तुम्हारा मुस्कुराना बज़्म में,
कौन नईं मर जाए जो ये बात हो,
एक दिन ऐसा भी आया चाहिए,
तुम रहो ऑ रात भर बरसात हो,
मावरा दिल दर्द से हो जायेगा,
हाथ में जिस दम तुम्हारा हाथ हो.....
उर्मिला माधव...
28.10.2014....
ख़ुद ही सूरत,ख़ुद-ब-ख़ुद ही आईना हूँ देख लो,
ख़ुद ही चाहत ख़ुद-ब-ख़ुद मैं आशना हूँ देख लो,
पाक़-ओ-ताहिर दिल ये मेरा ग़ैर का तालिब नहीं,
ख़ुद रुबाई खुद-ब-ख़ुद हम्द-ओ-सना हूँ देख लो,
ख़ुद-ब-खुद दीवानगी हूँ,होश भी हूँ,ख़ुद-ब-खुद
ख़ुद तग़ाफ़ुल ख़ुद-ब-ख़ुद ही मैं अना हूँ देख लो,
#उर्मिलामाधव..
27.10.2015
मनाही नहीं,सूरत देखने की,
पर इसे पढ़ना भी है
दिल से नहीं
दिमाग़ से,
कितने फरेब लिखे हैं
मुश्किल है
ऐसे चेहरों की
इबारत पढ़ना
सूरत जितनी दिलकश,
उतनी उलझी हुई इबारत,
तुमने सुना भी होगा सखी?
ऑल दैट ग्लिटर्स इज़ नॉट गोल्ड
यानि हर चमकने वाली चीज़
सोना नहीं
इसलिए ख़ुद को खोना नहीं
कितने सुहाने लगते हैं
दूर के ढोल,
पर पास जाकर सुनना कभी
कान तो क्या,
दिलो दिमाग़ भी हिल जाएंगे
रोज़ पढ़ती हूँ मैं उस चमकीली सूरत को
रोज़ लड़ती हूँ अपने आप से,
उस चेहरे से रोज़ाना
मेरे दिल की दूरी
कुछ और बढ़ जाती है
फ़रेब उसका रोज़ ही
कुछ और ज़ियादा दिखाई देता है
ये खरा सच है उस सूरत के हिस्से का
जो जानना ज़रूरी है,तुम्हारे लिए,
ये जो दूरी है,अच्छी है तुम्हारे लिए
सूरत खुश है, फ़रेब रचकर,
और मैं, उस पर हंस कर
उसकी आदत में शामिल है,
मुझे कम से कम करके आंकना
उसी सूरत की बाबत है ये सब
जो अचानक ही तुम्हारे मन को
बहुत भा गई है
दूरियां सुहानी हैं
इन्हें क़ायम रहने दो
वरना ऐसी नज़दीकियां
इनका कोई मुस्तक़बिल नहीं
सिर्फ़ सूरत ही सूरत है
सीरत का नामो निशान नहीं
मन से हारना तो मैंने कभी
सीखा ही नहीं
और कहा हमेशा मजबूती से
एकला चालो रे.....
तुम भी सीख लो....
अकेले चलना...
उर्मिला माधव
27.10.2015