उनसे मिलते हैंं तो ग़म और बिखर जाते हैं, अब तो ये है के ख़यालों से भी डर जाते हैं,
कैसे हाथों की लकीरों को लिखा क़ुदरत ने, इस पे ग़र सोच भी लेते हैं तो मर जाते हैं, उर्मिला माधव
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