ये मेरे शेर और क़तआत ---
Tuesday, 7 November 2017
बेचारगी एक शख़्स की
फिर पलट कर रात दिन हम,उस तरफ़ देखा किये,
फिर नहीं देखी गई .........बेचारगी एक शख़्स की...
उर्मिला माधव
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