Friday, 31 August 2018

मिली सी लग रही है

बहुत है आग जो दिल में पली से लग रही है,
तहत उसके मुझे दुनिया जली सी लग रही है,

अभी काली घटा में एक बिजली जोर से चमकी,
सहर और शाम आपस में मिली सी लग रही है,

किसी बेवा के दिल सी धंस के नीचे जा रही है ये ,
ज़मीं मुझको ज़रा कुछ-कुछ हिली सी लग रही है...
उर्मिला माधव ...
१.९.२०१३

होना है

तन्हा ही तो होना है,
इसपे कैसा रोना है,

ताबिन्दा तक़दीर नहीं,
दिल को दरिया होना है
उर्मिला माधव

घर बचाने के लिए

उसने दीवारें उठाईं, फ़ासले क़ायम रखे,
हमने छत सर पे उठाली,घर बचाने के लिए
उर्मिला माधव..
1.9.2017

मिली सी लग रही है

अभी काली घटा में एक बिजली ज़ोर से चमकी,
सहर और शाम आपस में, मिली सी लग रही है,
उर्मिला माधव

Thursday, 30 August 2018

सफ़ीना है

"आँसू से भरी हैं ये आँखें,ज़ख़्मों से भरा ये सीना है,
बरपा है कहर तक़लीफों का,आया होठों पै पसीनाहै,
हर ज़ख़्म लहू जब देता है,मजबूर नज़र चकराती है,
तू शान-ए-क़रीमी रखले अब तूफाँ में मेरा सफीना है।।
उर्मिला माधव........"

दरवेश बना डाला

क्या खूब सियासत है,परचम ही झुका डाला ,
पहले  न कभी देखा वो दिन भी दिखा डाला ,
मजलूम रिआया के हाथों में दिया कासा,
और पूरे वतन भर को  दरवेश  बना डाला..
उर्मिला माधव
३१.८.२०१३

किरदार नहीं देखा

चाहत थी हमें जिसकी वो प्यार नहीं देखा ,
हमने तुम्हारे संग कोई त्यौहार नहीं देखा ,
जब- जब भी जहां देखीं पाबंदियां ही देखीं ,
दुनिया में कोई तुमसा किरदार नहीं देखा ...
उर्मिला माधव ...
३१.८.२०१३..

वीरानियाँ होंगी

मेरे शफ्फ़ाक़ चेहरे पर,..बहारें पढ़ रहे हैं सब,
कभी दिल देखना मेरा,फ़क़त वीरानियाँ होंगी,
उर्मिला माधव...
31.8.2016

ख़ुद निभाना है

हम अपने आंसुओं का बोझ ग़ैरों पर नहीं रखते,
हमारा जो भी हो किरदार हमको ख़ुद निभाना है.
उर्मिला माधव...
31.8.2017

वतन के वास्ते लिख्खो

मुहब्बत चुक गई है तो,....वतन के वास्ते लिख्खो,
किसी मजबूर के ग़म की चुभन के वास्ते लिख्खो,
तुम्हारे ग़म से भी बढ़कर जहां में ..सैकड़ों ग़म हैं,
अगर ये भी नहीं मुमकिन,सुख़न के वास्ते लिख्खो..
उर्मिला माधव,
31.8.2017

Wednesday, 29 August 2018

बख़्शीश चाहिए

लोगों से कुछ दुआएं ऑ आशीष चाहिए,
उसपे मुहब्बतों की ..... बख्शीश चाहिए,
आँखों से वो पिला के नशा बा-असर रहे,
कोकीन-ओ-जाम और न ही हशीश चाहिए....
उर्मिला माधव...
30.8.2015...

बात कहते हैं

फरेब-ओ-मक्र से लबरेज़ हरक़त ..बे मआनी है
बमुश्किल रोक कर ख़ुद को यही एक बात कहते हैं..
उर्मिला माधव...
30.8.2016

न रोएंगे

वो भी एक वक़्त था बहुत रोए,
अब न रोते हैं,    और न रोयेंगे,
उर्मिला माधव

इक़रार नहीं होता

हर वक़्त मुहब्बत का ...इक़रार नहीं होता ,
ख़ामोशियों का मतलब इनकार नहीं होता ,
आँखों की तरफ  देखो ...जज़्बात बहुत हैं ,
अल्फ़ाज़ की बदौलत ...इज़हार नहीं होता ...
उर्मिला माधव
30.8.2017

Tuesday, 28 August 2018

जंजीर करूँ

इस दर्द को क्या तशहीर करूँ,
किस मुंह से कोई तक़रीर करूँ,
ये अब तक है ..तनक़ीह तलब,
क्या लमहे को .....ज़ंजीर करूँ...
उर्मिला माधव
29.8.2015
तशहीर--- ढिंढोरा
तक़रीर---भाषण
तनक़ीह तलब---विचारणीय

फिरते हैं

एक अलग सा ख़याल---
ग़म को संग बांधे-बांधे फिरते हैं,
अपना दम साधे-साधे फिरते हैं,
वो न अब ज़िन्दगी में शामिल है,
देखो हम आधे-आधे फिरते हैं...
#उर्मिलामाधव..
29.8.2015

Monday, 27 August 2018

मुहब्बत के

जो परस्तार हैं मुहब्बत के
वो कभी होश में नहीं रहते 
उर्मिला माधव
28.8.2013

टूटने के बाद

तुम एक लफ्ज़ अपनी जुबां से न कह सके,
हमने दुआएं करदीं तुम्हें अपना जान कर ...
अब क्या करोगे गुंचे  उठा कर ज़मींन से
कहीं फूल खिल सका है कभी टूटने के बाद??
उर्मिला माधव ..
२८.८.२०१३

हासिल नहीं होता

न जाने कौन पी पाया वफ़ा का जाम उल्फ़त में,
ये वो राज़-ए-हकीक़त है कभी हासिल नहीं होता...
उर्मिला माधव...
28.8.2014....

Sunday, 26 August 2018

खोते गए

ठोकरें खाते गए, फिर भी खड़े होते गए,
अगली नस्लों के लिए,दार-ओ-रसन बोते गए,
चोट भूले भी नहीं, और चोट फिर से लग गई
ग़म में राहत के लिए, चैन-ए-ज़हन खोते गए,
उर्मिला माधव
27.8.2019

निकलते हैं

झूठी बातों से बहलने वाले,सच से नज़रें बचाके चलते हैं,
आधी रातों में टहलने वाले,धूप के वक़्त कम निकलते हैं,
उर्मिला माधव ...
27.8.2013

साहिल नहीं होता

मुहब्बत में कभी कोई महे क़ामिल नहीं होता,
समंदर ही समंदर है...यहाँ साहिल नहीं होता...
उर्मिला माधव...
27.8.2014

मेहराब के नीचे

खड़े रोते हैं अब घर की किसी मेहराब के नीचे
कहीं ये ग़म भी छुपते हैं,दर-ओ-दीवार के पीछे...????
उर्मिला माधव...
27.8.2014...

मील का पत्थर

उम्र भर चलते रहे और दो क़दम पहुंचे नहीं,
ये वो रस्ता है के जिसमें मील का पथ्थर नहीं..
उर्मिला माधव..
27.8.2016

भारी पड़े हैं

मेरा दिल चीखने को कर रहा है,
मुझको सन्नाटे बहुत भारी पड़े हैं....
उर्मिला माधव...
27.8 .2016

होश में आ जाऊं

कभी एक बार ........मैं बेहोश होकर गिर गई थी,
अब अगर जो होश में आ जाऊं तो दुनियां न देखूं....
उर्मिला माधव....
27.8.2017

नहीं निकली

दिल  से जब आह भी नहीं निकली,
मुदत्तों .........ज़िन्दगी नहीं संभली,
तेरा जब ......ज़िक़्र भी गुनाह हुआ,
फिर ये ....आवाज़ भी नहीं निकली..
उर्मिला माधव,
27.8.2017

Saturday, 25 August 2018

ज़बान पढ़लो

थोडा सा इल्म है तो दिल की ज़बान पढ़ लो ,
लिखती हूँ मैं मुसलसल मेरा बयान पढ़ लो ,
पढने को सब कहेंगे हिन्दू हो या मुसलमान ,
मज़हब की लाज रख लो गीता क़ुरान पढ लो ..
उर्मिला माधव ...
२६.८.२०१३

सो जाते हैं

सुबह-सुबह उठते हैं और फिर सो जाते हैं,
बार-बार उठते हैं और फिर सो जाते हैं,
अब तुम सोचो, काम कहां फ़िर हो पाते हैं
उर्मिला माधव
25.8.2018

कर नहीं सकते

हम मुहब्बत तो कर नहीं सकते,
क्यूंकि हर रोज़ मर नहीं सकते,
जो भी कहते हो,सिर्फ़ सुन लेंगे,
इससे ज़्यादः बिखर नहीं सकते...
उर्मिला माधव..
26.8.2016

सर बचाते हैं

दर-ओ-दीवार में ख़ुद खोखले पथ्थर लगाते हैं,
हवा पर थोप कर इल्ज़ाम,अपना सर बचाते हैं....
उर्मिला माधव...
13.6.2015...

Friday, 24 August 2018

निजात

Is qadar bhaari pade hain ziist par kuchh haadsaat,
Muntazir hun in gamon se aakhirash ho bhi nijaat...
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इस क़दर भारी पड़े हैं ज़ीस्त पर कुछ हादसात,
मुंतज़िर हूँ इन ग़मों से आख़िरश कब हो निजात...
#उर्मिलामाधव...
25.8.2015..

ख़ाली करो

लौट जाओ रंज-ओ-ग़म अब ज़िंदगी ख़ाली करो,
चैन से जीने दो मुझको,यूँ न बदहाली करो,
#उर्मिलामाधव..
25.8.2015

Thursday, 23 August 2018

बेटी का गुस्सा

हाँ मैं पत्थर हूँ मुझे तुम तोड़ डालो,
खूब तबियत से मेरी किरचें उछालो,
जब जहाँ चाहे मेरे टुकड़े लगा कर,
तुम दरो दीवार की इज्ज़त बचालो.....
उर्मिला माधव....
24.8.2015

रोते थोड़ी हैं

हम जैसे,दुनियां में....रोते थोड़ी हैं,
सोते से दिखते हैं.....सोते थोड़ी हैं
झुकने से भी पहले देखें..ऊपर को,
मर सकते हैं इज़्ज़त खोते थोड़ी हैं,
उर्मिला माधव।।
24.8.2017

Wednesday, 22 August 2018

झुका रख्खा है

मैंने पहले ही बहुत ख़ुद को झुका रख्खा है,
अब ज़मीं मुझको मुहब्बत से सदा देती है...
उर्मिला माधव ...
23.8.2015...

बचाया है

हज़ारों रंग देखे हैं मेरी नज़रों ने घबरा कर,
मगर दिल ने मुझे जबरन बहकने से बचाया है...
उर्मिला माधव..
23.8.2015

तू भी नहीं

--फ़िल बदीह का हासिल -

Main agar mazboot hoon murdaar to tu bhi nahin,
Raasta roke mera wo haar to too bhi nahin,

Barq aaii thi kabhi girne, dabistaaN ki taraf,
Maine hans ke kah diya, gulzaar to tu bhi nahin,

Khud ba khud to jal rahi hai,tu sarapa aag hai,
Ghar jala kar hans saki,har baar to tu bhi nahin,

Muddaton se jal rahe hain ham to sehra ki tarah,
Par samandar saA kahin kirdar to tu bhi nahin

Bewafai ka abas,ilzaam kyun mere taiiN,
Saahib-e-kirdaar saa gham khwaar to tu bhi nahin,

ZindagI ko jaa-b-jaa ruswa kare hai kisliye,
Sach to ye hai pyar se, bezaar to tu bhi nahin....
Urmila Madhav..
23.8.2017

Tuesday, 21 August 2018

हाहाकार है

ज़िन्दग़ी न जीत है न हार है,
जी रहे हैं व्यर्थ हाहाकार है,
ख़ूब शिद्दत से बनाया है मकां,
छोड़ कर जाना ही है बेकार है,
उर्मिला माधव...

रानी झांसी की

मुझे हर शै से लड़ना है यही रब का इशारा है,
जहाने जंग है हर सू,तो मैं झाँसी की रानी हूँ....
उर्मिला माधव...
22.8.2016

कौन थे,क्या थे

Kaun the,kyA the,kahaN the,ye kise maaloom tha,
Jab huA maaloom,tab tak,zindganI chuk gaii
Urmila Madhav
22.8.2017

जागीर देदोगे ?

अगर तुम आ ही जाओगे तो क्या जागीर देदोगे?
बहुत होगा तो ये होगा........कोई तहरीर देदोगे,
अगर बरसात सब लिख्खी हुई तहरीर धो दे तो ?
सुनहरे लफ्ज़ में लिख कर मुझे .तक़दीर देदोगे ?
उर्मिला माधव,
22.8.2017

Monday, 20 August 2018

आता नहीं

जाओ मत बोलो तुम्हें कुछ बोलना आता नहीं,
बात को कहने से पहले......तोलना आता नहीं,
जाने कैसे साफ़ दिल कहते हो..अपने आपको,
बीच में अहबाब के दिल खोलना आता नहीं..
#उर्मिलामाधव...
21.8.2014...

मसर्रत

Unwaan-----Masarrat....

कुल ज़माना हो गया है अब हक़ीर,
पिट रही है बस मसर्रत की लकीर,
जिसको देखो ज़ीस्त से हलकान है,
हर कोई कहता है अपने को फ़क़ीर....
::::::;;;
Kul zamana ho gaya hai ab haqir,
Pit rahi hai bas masarrat ki lakir,
Jisko dekho zeest se halkan hai,
Har koi kahta hai apne ko faqir...
उर्मिला माधव...
21.8.2016

Sunday, 19 August 2018

रंज या के वाह

कितने क़रीब आके  हुए बे-नक़ाब वो,
हम सोचते रहे के करें रंज या के वाह!!
उर्मिला माधव....
20.8.2016

Saturday, 18 August 2018

ज़ुरूर

फेहरिस्त दुश्मनों की बढ़ा लीजिये हुज़ूर ,
कुछ दोस्तों के नाम भी घट जायेंगे ज़ुरूर ....
उर्मिला माधव ..
19.8.2013

Friday, 17 August 2018

बहलेगा ज़ुरूर

जब कभी दिल ग़मज़दा हो,बाँट लीजे कुछ हुज़ूर
और कुछ भी हो न हो,..ये जी तो बहलेगा ज़रूर ...
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jab kabhii dil gamzadaa ho,baant liije kuchh huzoor,
or kuchh bhii ho n ho,........ye jii to bahlegaa zaruur
उर्मिल माधव...
18.8.2015...

तयशुदा है

अब तेरे बिन ही जियूँगी........तयशुदा है,
चूंकि तेराऔर मेरा रास्ता बिल्कुल जुदा है
उर्मिला माधव।

मक़बरे ख़ाली रहे

जाने कितने मद्फ़नों में मक़बरे ख़ाली रहे,
ज़िन्दगी भर हाफ़िज़ों के मश्वरे जाली रहे,
देने वाला ज़िन्दगी पर इस तरह हावी रहा,
ज्यों अकेला दह्र में ख़ुद अख़्तरे आली रहे,
18.8.2017

Thursday, 16 August 2018

जीने न देगी

देखो अना को न सर पै चढ़ाओ,
ये ऐसी बला है के जीने न देगी...
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dekho anaa ko n sar pe chadhaao,
ye aisi balaa hai .....ke jiine n degii....
उर्मिला माधव...
17.8.2014...

सैयाद हुआ

तक़लीफ़ बहुत अब होती है,मजलूम रिआया रोती है,
इमकान के ज़रिये डूब गए,हर रहबर ही सैय्याद हुआ,

माशा कर रहे

प्यार में...जो तोला माशा कर रहे,
बे-सबब...समझो तमाशा कर रहे,
हक़ बयानी हमको रूसवा कर गई,
रंज अब हम.....बे-तहाशा कर रहे....
उर्मिला माधव...
17.8.2014...

लफ़्ज़ हैं

हक़,हक़ीक़त और हुकूमत,ये कहाँ के लफ़्ज़ हैं,
हम रिआया हैं फ़क़त और तालिब-ए-तक़दीर हैं....
उर्मिला माधव..
17.8.2015..

बुरा मान गए

हर नफ़स मैंने,तग़ाफ़ुल की अदा देखी है,
मैंने एक लहज़ा ज़रा की तो बुरा मान गए
उर्मिला माधव,
17.8.2016

Wednesday, 15 August 2018

बोल गया

जिसकी तबियत हुई वो बोल गया,
हद से ज्यादह ज़बान...खोल गया,
कहने वालों ने.....मुडके देखा कब,
सुनने वालों का....ज़ब्त डोल गया...
उर्मिला माधव..
16.8.2014..

कितने न जाने

निशान-ए-नज़्र में शामिल रहे हैं ज़ाविये कितने न जाने,
और आख़िर हश्र में हासिल रहेंगे हाशिये कितने न जाने,
उर्मिला माधव,
16.8.2016

फ़रियाद करते थे

ज़माना और था वो जब तुम्हें हम याद करते थे ,
जुदा हम हो न जाएँ बस यही फ़रियाद करते थे...

तुम्हारी याद तो अब भी चली आती है रह-रह के
तरस आता है हम खुद को कहाँ बर्बाद करते थे...
उर्मिला माधव...
16.8.2014....

हुमायूँ जैसा है?

ये भाई बहन की बात नहीं ये रिश्ता तो कुछ ऐसा है ,
नहीं ज़र ज़मीन इसके आगे न इसके बराबर पैसा है ,
इतिहास अभी तक जिंदा है,हर वक़्त गवाही देता है ,
हैं कर्णावती हज़ारों पर,....क्या भाई हुमायूं जैसा है ??
उर्मिला माधव ..
16.8.2017

था भी कहाँ

दिल्लगी जुगनू की सब करते रहे ,
पर कोई ख़ुर्शीद सा था भी कहाँ
उर्मिला माधव,
16.8.2017

है ही नहीं

इन सभी बेचैनियों को वक़्त मिलता है कहाँ?
जब मेरे हिस्से में कोई,रात-दिन है ही नहीं,
उर्मिला माधव,
16.8 2017

Monday, 13 August 2018

थक गए हैं

हम हज़ारों शेर कह कर थक गए हैं,
पर वतन का रंग अब तक भी वही है,
उर्मिला माधव...
14.8.2015

तूफ़ान

कभी ओले,कभी बारिश,कभी तूफ़ान आते हैं,
मगर संजीदगी में ये ज़मीं ......अब भी वही है...
उर्मिला माधव...
14.8.2015

छींटाकशी क्या है

न तो उसको गरज़ कोई,न ही मुझको गरज़ कोई,
तो फिर ये महफ़िलों में इस क़दर छींटाकशी क्या है...
उर्मिला माधव...
14.6.2015..

आज़ाद हुआ

एक लहर ख़ुशी की दौड़ गई जब सुना वतन आज़ाद हुआ,
सब रन्ज-ओ-अलम से टूट गए जो आज़ादी के बाद हुआ
आपस की छीना झपटी में, तक़सीम सभी कुछ कर डाला,
बरपा है क़ह्र परचम के तले इस क़दर वतन बरबाद हुआ..
उर्मिला माधव..
14.8.2016

Sunday, 12 August 2018

ज़रूरत हो

जब सहर इतनी खूबसूरत हो,
तब भला और क्या ज़रुरत हो....
उर्मिला माधव...
13.8.2014...

अदा से चलता है

रोज़ जो रंग़ इक बदलता है,
ओहो कैसी अदा से चलता है,
#उर्मिलामाधव...
13.8. 2015

Saturday, 11 August 2018

होने दो

और थोड़ी सहर तो होने दो,
दिल को रह-रह के ख़ूब रोने दो,
अपनी हस्ती का इम्तहाँ भी लो,
जो भी होता है उसको होने दो.....
उर्मिला माधव
२५.१.२०१३

वर्जनाएं

जब कभी लांघी गईं हैं ....वर्जनाएं,
तब सदा आहत हुई हैं ....भावनाएं,
क्या परिधियां अर्थ अपने खो चुकीं?
बच रहीं बस .....चीत्कारें गर्जनाएं....
#उमिलाधव....
12.8.2015...

ख़ुदा याद आ गया

ज़िन्दगी के मरहले,कुछ इस क़दर मुश्किल रहे,
मुख़्तसर ये है के बस यारो खुदा याद आगया ...
#उर्मिलामाधव...
12.8.2015

Friday, 10 August 2018

क्या कीजिये

दिल जिगर नासाज़ थे ये बात वाजिब ही सही,
पर बला ये है शिकस्ता जिस्म का क्या कीजिये.
उर्मिला माधव,
11.8.2017

Thursday, 9 August 2018

देंगे जवाब

देखिये ....मग़रूर तो हम हैं नहीं,
हाँ तग़ाफ़ुल का मगर देंगे जवाब...
उर्मिला माधव..
10.8.2016

दरकार है

ज़िन्दगी थकने लगी जद्दो ज़हद से,
अब तो हिफ़ज़े आबरू दरकार है...
::::
Zindagi thakne lagi,jaddozahad se,
Ab to hifze aabru darkaar hai...
उर्मिला माधव...
4.8.2016

फ़र्क़ क्या

मुश्किलें थीं तब मेरे संग कौन था ?
अब कोई आए या जाए फ़र्क क्या ?
उर्मिला माधव

Wednesday, 8 August 2018

सियाराम भजलो

बहुत की गुज़ारिश,हमारी समझ लो,
तो अब ये है प्यारे,सिया राम भजलो....
उर्मिला माधव....
9.8.2014...

ज़माने में

बताएं क्या किसे क्या-क्या तमाशे हैं ज़माने में,
बुज़ुर्गों के भी दामन में हसद का रंग शामिल है.....
उर्मिला माधव ...
9.8.2o16

Tuesday, 7 August 2018

आज़ाद हुआ

एक लहर ख़ुशी की दौड़ गई जब सुना वतन आज़ाद हुआ,
सब रन्ज-ओ-अलम से टूट गए जो आज़ादी के बाद हुआ
आपस की छीना झपटी में, तक़सीम सभी कुछ कर डाला,
बरपा है क़हर परचम के तले इस क़दर वतन बरबाद हुआ..
उर्मिला माधव..
8.8.2013

रेज़ह-रेज़ह क्यों नहीं

दिल मेरा हो जाए आख़िर रेजः-रेजः क्यूँ नहीं ?
ज़ख्म ही देने हैं तो फिर ,रस्म-ए-नैजः क्यूँ नहीं?
::::::::::
dil mera ho jaaye aakhir,rezah-rezah kyun nahin ?
zakhm hii dene hain to phir, rasm-e- nezah kyun nahin?
उर्मिला माधव...
8.8.2016

बिछुड़ जाने वाला

मुहब्बत में ज़िद से बिछुड़ जाने वाला,
भला दिल की क़ीमत लगाता भी कैसे,
मुहब्बत की दुनियां, समझ ही न पाया,
वफाओं की इज़्ज़त ...बचाता भी कैसे,
उर्मिला माधव,
8.8.2017

Monday, 6 August 2018

मिल्लत से हट के

ज़िन्दगी मिल्लत से हट के चल रही है,
हर तरह ज़िल्लत से कट के चल रही है,
सब बचाते फिर रहे.....जिसको सरासर,
सांस वो किल्लत से सट  के चल रही है....
उर्मिला माधव...
7.8.2014...

रख दी

ज़िन्दगी हमने हार कर रखदी,
तनहा-तनहा गुज़ार कर रखदी,
थोड़ी जो बच गई थी हाथों में,
तेरा सदक़ा उतार कर रख दी....
उर्मिला माधव..
7.8.2013

सफ़र

मुझको हर इक सफ़र आख़री सा लगा,
लोग कहते रहे.............ये शुरुआत है,
रात ग़ुज़री तो......दिल ने कहा शुक्रिया,
हर सहर को कहा,.....ख़ूब क्या बात है..
उर्मिला माधव

Sunday, 5 August 2018

होगी ज़रूर

अपनी हस्ती पर बुलन्दी का ग़ुमाँ रखते हैं जो,
उनके दिल के आईने पर धूल कुछ होगी ज़रूर,
अपने घर में नाक़ाबन्दी का समाँ रखते हैं जो,
हर तरह से इसके मानी भूल कुछ होगी ज़रूर।।
उर्मिला माधव..
6.8.2013

तार-तार देखो न

ज़िंदग़ी.........तार-तार देखो ना,
ज़ख्म के.......आर पार देखो ना,
ये भी हैरत है. तुम समझ न सके,
आओ तब......बार-बार देखो ना....
उर्मिला माधव...
6.8.2014...

भोले

सारी दुनिया में ...,...रंग भरते हो,
ख़ुद ही जीते हो खुद ही मरते हो,
इतने भोले तो हो नहीं ....तुम भी,
ज़िंदगी दे के .........तंग करते हो...
उर्मिला माधव...
6.8.2016

Saturday, 4 August 2018

रंग को

जलती आँखों से ही देखा है तिरे हर रंग को,
देखना,ख़ामोश रहना,और हम करते भी क्या
उर्मिला माधव..
5.8.2016

देकर गया

तुम तमाशा कर रहे हो..ज़िन्दगी को अय मियाँ,
जिसने तुमको ज़िंदगी बख़्शी थी वो देकर गया
उर्मिला माधव...
5.8.2016

Friday, 3 August 2018

तौफ़ीक़ न दे

अल्लाह अगर तौफ़ीक़ न दे,
इन्सान के बस का काम नहीं,
इज़हार-ए-मुहब्बत आम सही,
इर्फान-ए-मुहब्बत आम नहीं  ।।
उर्मिला माधव

वफ़ा बदनाम होती है

अमानत में ख़यानत से वफ़ा बदनाम होती है,
तो सारी उम्र रो-रो कर,गमों की शाम होती है..
उर्मिला माधव..
4.8.2013

बचना ज़रा

अपने हाथों से ज़रा दस्तार अपनी थाम लो,
आंधियां झोंके में आती हैं मियां,बचना ज़रा...
उर्मिला माधव..
4.8.2016

शादियों का शोर

रिश्ते नातों से यहाँ ....हर शख्स ऊबा सा लगे,
किसलिए हर रोज़ फिर ये शादियों का शोर है!!!!
उर्मिलामाधव...
4.8.2915

सुर्खियों में आ गए

कामयाबी क्या मिली के हो गया क़िस्सा अजब,
टूटने वाले भी रिश्ते ..........सुर्ख़ियों में आ गए....
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kaamyaabii kyaa milii ke .....hogaya qissaa ajab,
tootne waale bhii rishte surkhiyon main aa gaye
उर्मिला माधव...
4.8.2015...

ख़ाली हो गए होंगे

तेरे गुलदान के सब फूल .....बासी हो गए होंगे,
तो सूखी पत्तियों के ढेर ......काफ़ी हो गए होंगे,
तुझे कुछ याद है मैंने सलाम-ए-सुब्ह कब भेजा ?
तिरे घर के कई कोने भी .....ख़ाली हो गए होंगे,
उर्मिला माधव,
4.8.2017

Wednesday, 1 August 2018

काला जिस्म

जिस्म काला है.......कोई फ़र्क़ नहीं,
दिल जो काला है,उसका क्या होगा ?
उर्मिला माधव...
2.8.2016

क्या होगा

जिस्म काला है.......कोई फ़र्क़ नहीं,
दिल जो काला है,उसका क्या होगा ?
उर्मिला माधव...
2.8.2016

वाजिब नहीं

वहशतें,वीरानियाँ,बेपर्द हों वाजिब नहीं,
आजकल शीरीनियों से सस्तमोली है नमक,
उर्मिला माधव,
2.8.2017

जोड़ा है

बिखरी बिखरी साँसों में भी ख़ुद को ख़ुद से जोड़ा है,
हमको पर कुछ ख़ास समझ कर हर लम्हे ने तोड़ा है,
दिल को ये एहसास बहुत है क्या खोया क्या पाया है,
कभी मगर सब जान बूझ कर हालातों पर छोड़ा है..
उर्मिला माधव..
1.8.2013

अभी हमने

nigah-e-naaz ka sadqa utara hai abhi hamne,
faqat deedar ki khatir pukara hai abhi hamne,
hamara dil hamara hai,tumhare dil ki tum jano,
nazar sabki bacha kar dil sanwara hai abhi hamne..
Urmila Madhav ..
1.8.2013

वार करती हैं

साज़िशें जब शिकार करती हैं,
ख़ूब जम-जम के वार करती हैं,
सादा इनसान कुछ न कह पाये,
आँखें ...ग़म इश्तेहार करती हैं...
उर्मिला माधव..
1.8.2016