ज़माना और था वो जब तुम्हें हम याद करते थे , जुदा हम हो न जाएँ बस यही फ़रियाद करते थे...
तुम्हारी याद तो अब भी चली आती है रह-रह के तरस आता है हम खुद को कहाँ बर्बाद करते थे... उर्मिला माधव... 16.8.2014....
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