तुम एक लफ्ज़ अपनी जुबां से न कह सके, हमने दुआएं करदीं तुम्हें अपना जान कर ... अब क्या करोगे गुंचे उठा कर ज़मींन से कहीं फूल खिल सका है कभी टूटने के बाद?? उर्मिला माधव .. २८.८.२०१३
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