Monday, 27 August 2018

टूटने के बाद

तुम एक लफ्ज़ अपनी जुबां से न कह सके,
हमने दुआएं करदीं तुम्हें अपना जान कर ...
अब क्या करोगे गुंचे  उठा कर ज़मींन से
कहीं फूल खिल सका है कभी टूटने के बाद??
उर्मिला माधव ..
२८.८.२०१३

No comments:

Post a Comment