ज़िन्दगी मिल्लत से हट के चल रही है, हर तरह ज़िल्लत से कट के चल रही है, सब बचाते फिर रहे.....जिसको सरासर, सांस वो किल्लत से सट के चल रही है.... उर्मिला माधव... 7.8.2014...
No comments:
Post a Comment