Sunday, 5 August 2018

तार-तार देखो न

ज़िंदग़ी.........तार-तार देखो ना,
ज़ख्म के.......आर पार देखो ना,
ये भी हैरत है. तुम समझ न सके,
आओ तब......बार-बार देखो ना....
उर्मिला माधव...
6.8.2014...

No comments:

Post a Comment