मेरे शफ्फ़ाक़ चेहरे पर,..बहारें पढ़ रहे हैं सब, कभी दिल देखना मेरा,फ़क़त वीरानियाँ होंगी, उर्मिला माधव... 31.8.2016
No comments:
Post a Comment