बहुत है आग जो दिल में पली से लग रही है,
तहत उसके मुझे दुनिया जली सी लग रही है,
अभी काली घटा में एक बिजली जोर से चमकी,
सहर और शाम आपस में मिली सी लग रही है,
किसी बेवा के दिल सी धंस के नीचे जा रही है ये ,
ज़मीं मुझको ज़रा कुछ-कुछ हिली सी लग रही है...
उर्मिला माधव ...
१.९.२०१३
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