बिखरी बिखरी साँसों में भी ख़ुद को ख़ुद से जोड़ा है, हमको पर कुछ ख़ास समझ कर हर लम्हे ने तोड़ा है, दिल को ये एहसास बहुत है क्या खोया क्या पाया है, कभी मगर सब जान बूझ कर हालातों पर छोड़ा है.. उर्मिला माधव.. 1.8.2013
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