"आँसू से भरी हैं ये आँखें,ज़ख़्मों से भरा ये सीना है, बरपा है कहर तक़लीफों का,आया होठों पै पसीनाहै, हर ज़ख़्म लहू जब देता है,मजबूर नज़र चकराती है, तू शान-ए-क़रीमी रखले अब तूफाँ में मेरा सफीना है।। उर्मिला माधव........"
No comments:
Post a Comment