Wednesday, 31 January 2018

शेर

Gango jamun k charche sadiyon se ho rahe hain,
her aam-o-khhas apne ilzaam dho rahe hain,        
Urmila Madhav..
गंगो जमन के चर्चे सदियों से हो रहे हैं,
हर आम-ओ-ख़ास अपने इल्ज़ाम धो रहे हैं
उर्मिला माधव

महे क़ामिल नहीं होता

कोई इश्क-ओ-मुहब्बत में महे क़ामिल नहीं होता
ये वो रुतबा है जो हर शख़्स को हासिल नहीं होता,
बहुत गहराई है देखो......जुनून-ए-इश्क में जाकर,
समन्दर ही समन्दर है.....यहाँ साहिल नहीं होता...
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koii ishq-o-muhabbat main,mahe qaamil nahii hotaa,
ye wo rutbaa hai jo har shakhs ko haasil nahin hotaa,
bahut gahraaii hai dekho,junoon-e-ishq main jaakar,
samandar hii samandar hai,yahaan saahil nahin hotaa...
उर्मिला माधव...
१.२.२०१४

Tuesday, 30 January 2018

तूफ़ान आने दो

जो कोई आग हो दिल में तो उसको रंग लाने दो,
हुजूम-ए-दर्द को यूँ ही कहीं ना डूब जाने दो,
जो ये भरपूर साज़िश है ज़माने की ज़माने से,
कभी ख़ामोश रहकर भी कोई तूफ़ान आने दो।..उर्मिला माधव..
31.1.2013

Monday, 29 January 2018

बोले ही कहाँ

मैंने कुछ औराक खोले ही कहाँ,
इतने सारे सच थे,बोले ही कहाँ,
मुस्कुरा कर आँख ने देखा बहुत,
ग़ैर के जज़्बात....तोले ही कहाँ,
उर्मिला माधव....
30.1.2017

बयाबान कर दिया

दुनिया की हरक़तों ने .......परेशान कर दिया,
अपनी तरफ से हमको ....बयाबान कर दिया,
हिन्दू कहा हमें ........तो कभी और कुछ कहा,
जब दिल हुआ तो हमको मुसलमान कर दिया...
#urmila
30.1.2015

Sunday, 28 January 2018

मुक्तक

सब मिट्टी के सोपानों पर खड़े हुए हैं ....आकर देख,
जन जीवन की रीति यही है, अंतर्दृष्टि जगा कर देख,
जब साहस उत्तुंग हुआ,तब रीति-नीति का बिंदु कहाँ,
मार्ग सहज ही मिल जायेगा,केवल पाँव बढ़ा कर देख...
उर्मिला माधव,
29.1.2017

शेर

वो किसी और का......होता भी तो कैसे होता,
एक जो शख़्स किसी तौर भी ख़ुद का न हुआ,
उर्मिला माधव ,
29.1.2017

मुक्तक

बस यही तो भेद है। मानव की पूरी जाति का,
अनुकरण करता रहा है।व्यर्थ झूठी ख्याति का,
भावना जो व्यक्त करदे। वो कहाँ वाणी निकृष्ट??
स्वयं ही करता विभाजन धर्म और प्रजाति का...
उर्मिला माधव...
13.9.2016

Saturday, 27 January 2018

प्रीत तुम्हीं हो

हार तुम्ही हो,जीत तुम्ही हो,
प्रेम जगत की रीत तुम्ही हो,
किन शब्दों में...तुम्हें बताऊँ,
मेरी अंतिम....प्रीत तुम्ही हो ....
उर्मिला माधव...
28.1.2014...

फ्री वर्स नदी के दो किनारे

दो किनारे हैं नदी के,
एक मैं हूँ एक हो तुम ,
ये बताओ किस तरह मिल पायेंगे,
जब नदी जितनी उफन कर आएगी,
दूर बिलकुल दूर होते जायेंगे,
जब कभी तेज़ी बढ़ेगी धार की,
तब कहाँ उम्मीद होगी पार की,
बे-करारी,उलझनें,चलती रही हैं,
उम्र भर ये हाथ ही मलती रही हैं,
चाह तो मेरी बहुत मजबूत है पर,
क्या करूँ है नाव काग़ज़ की मगर,
दूरियां अपना मुक़द्दर हैं सुनो,
मैं खड़ी,इस पार हूँ,उस पार हो तुम...
मैं खड़ी इस पार हूँ,उस पार हो तुम...
Upadhyay Urmila...
उर्मिला माधव...
28.1.2014...

अहसान ही रहा है

<3
मेरा सफ़र हमेशा अनजान ही रहा है,
दुश्मन भी तो हमेशा इन्सान ही रहा है,
हर गाम पै हैं साथी ये रास्ते के पत्थर,
इन पत्थरों का मुझ पर अहसान ही रहा है। 
उर्मिला माधव..
28.1.2013

इन्क़लाब क्या

जब इन्क़लाब ही नहीं तो ज़िन्दाबाद क्या ?
हासिल न हों नतीजे तो फ़िर ज़िहाद क्या?
रस्ता ही भू ल बैठे ज़ाहिद हो या बिरहमन,
जब एक ही हो मन्ज़िल तो फ़िर फ़साद क्या ?
उर्मिला माधव..
28.1.2013

Friday, 26 January 2018

शेर

चल,रही बाज़ी,यहीं पर फैसला हो जायेगा,
जो जुदा हो जाएगा वो बेवफ़ा कहलायेगा,
#उर्मिला
27.1.2015

क़ता

Jaan kar usne uthaaye gam bahot,
Hamko jab usne dikhaye,kham bahot,
Gair ki khidmat hai yun ,mubtila,
Dekh kar ye muskaraaye ham bahot..
::
जान कर उसने उठाये ग़म बहोत,
ख़ासकर हमको दिखाए ख़म बहोत,
ग़ैर की ख़िदमत में है यूँ मुब्तिला,
देख कर ये मुस्कराये,हम बहोत....
#उर्मिलामाधव
27.1.2016

शेर

दिल पे हैं पाबंदियां और तयशुदा है हर हिसार,
जाने उसने क्यूँ रखा है, अब तलक मुझको शुमार,
उर्मिला माधव

Wednesday, 24 January 2018

ग़ज़ल

आम दुनियां को खबर कैसे लगे,
कौन है अच्छा, .बुरा है कौन जी,
उम्र भर पूजे गए हैं ...जो शहीद,
उनको बाग़ी कह रहे हैं कौन जी,
आप ही बतलाऐं ये इन्साफ क्या,
धो रहे इज्ज़त वतन की कौन जी,
मुल्क के नेता .....मदारी हो गए,
देश उंगली पर नचाता कौन जी,
बोलते हैं तो कहें सब बद्तमीज़,
आ रहे हैं ...मत भुनाने कौन जी,
दिल ने ऐलाने बगावत कर दिया,
अब इन्हें चुन कर बुलाये कौन जी
#उर्मिला
25.1.2015...

शेर

क़ब्र के पत्थर गिरे सजदे में सब,
ये मुक़द्दस रूह किसकी आ गई....
#उर्मिला
25.1.2015...

शेर

संग को करता है कैसा .....पाश-पाश,
और फिर कहता है ख़ुद को संगतराश,
उर्मिला माधव।।।
24 .1 .2017

शेर

हम समन्दर सी ताब रखते थे,
एक दिन में आँख खाली होगई।।।
उर्मिला माधव ....
25.1.2017

Tuesday, 23 January 2018

शेर

रोक कर कोई दिखाये,जो ये गुथ्थम गुथ्थ है,
रात-दिन चर्चा सियासत पर करो ये मुफ्त है,
उर्मिला माधव...
24.1.207

क़ता

मुझको ख्वाहिश कहाँ है शोहरत की,
जो भी कुछ है ,..मेहर है क़ुदरत की,
मेरी उल्फ़त तो ,....बस कलम से है,
उम्र भर ,...इसके साथ शिरक़त की,
#उर्मिला
24.1.2015...

शेर

रोक कर कोई दिखाये,जो ये गुथ्थम गुथ्थ है,
रात-दिन चर्चा सियासत पर करो ये मुफ्त है,
उर्मिला माधव...
24.1.207

Monday, 22 January 2018

क़ता

मेरी डायरी से-----
चढ़ते तूफ़ाँ में कभी क़श्ती उतारी होती,
ख़ूब तबियत से वहीं शाम गुज़ारी होती,
जो कहीं हद से गुज़र जाता अगर जोशे जुनूँ,
हम फ़ना होते मगर बात तुम्हारी होती..
उर्मिला माधव..
30.7.2013

क़ता

मैं ........सियह रात की गवाही हूँ,
ख़ुद बख़ुद उसकी आवा-जाही हूँ,
कुछ परिंदों के ....पंख बिखरे हुए,
ज़ेह्न-ए-गुलज़ार की .....तबाही हूँ
उर्मिला माधव..
23.1.2017

Sunday, 21 January 2018

शेर

पैरहन मेरा मेरी हस्ती से ना मिल पाएगा,
वो कमल होगा जो कीचड़ से निकल के आएगा...उर्मिला माधव
२२.१.२०१३

क़ता

देदिया जब हाथ में दिल तोडके,
देखते हैं क्या वो...टुकड़े जोडके?
आंसुओं को पोंछते थे रात दिन,
देखने तक आये न मुंह मोड के....
उर्मिला माधव...
22.1.2014..

क़ता

इबादत में.................दुआएं ढूंढते हो,
अदावत में................सदायें ढूंढते हो,
मियाँ तुम कैसे अहमक हो जो अब तक,
मुहब्बत में................वफायें ढूंढते हो....
उर्मिला माधव...
उर्मिला माधव...
22.1.2014..

दोहा

बलिहारी वा प्रीत की,जामें दो न समाएं,
मैं पिय की पिय हैं मेरे,एक रंग है जाएं...
उर्मिला माधव...
22.1.2015

शेर

ग़ैर पर उंगली उठाने से तो बेहतर है यही,
अपनी कारस्तानियों पर तब्सरा कर लीजिये,
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gair par ungli uthaane se to behtar hai yahi,
apnii kaarastaaniyon par tabsaraa kar liijiye..
#उर्मिलामाधव
22.1.2016

क़ता

ये तो सच है मैं कोई आकिल नहीं,
हाँ जहान-ए-दर्द में …काहिल नहीं,
देखती हूँ इक फ़क़त बाब-ए-सुखन,
बस किसी भी दौड़ में शामिल नहीं,
उर्मिला माधव ..
22.1.2017

क़ता

मर्तबा इंसाँ है मेरा ............और आदम ज़ात हूँ,
अपनी हस्ती से हूँ ज़िन्दा अपनी ख़ुद औक़ात हूँ,
ना ग़ुरूर-ए-हुस्न हूँ,.....ना दुख़्तर-ए-जज़्बात हूँ
इब्तेदा से इन्तेहा तक ........क़िस्सा-ए-हालात हूँ.....
उर्मिला माधव
22.1.2017

Saturday, 20 January 2018

एक मतला

एक मतला ----

हर तमाशा चल रहा है,एक साज़िश के तहत
ज़ह्र दिल में पल रहा है,एक खारिश  के तहत....
उर्मिला माधव...
21.1.2015

क़ता

ज़िन्दगानी-ए-शरीयत ख़ैरियत रखती नहीं,
कौनसी हस्ती है जो कुछ क़ैफ़ियत रखती नहीं,
फ़िर किसीको क्यूँ मसीहा मान कर सजदा करें,
हिम्मत-ए-इंन्साँ सबाब-ए- हैसियत रखती नहीं....  उर्मिला माधव

२१.१.२०१३

शेर

मैने एक भी लफ़्ज़ लिख्खा ही नहीं,
सब कलम से ..टूट कर नीचे गिरे हैं...
उर्मिला माधव
21.1.2017

शेर

वो मुझे एक दोस्त तो कहता रहा,दोस्त क्या है,ये कभी समझा नहीं,
दोस्ती और दिल्लगी के बीच का,दर्द क्या है ये कभी समझा नहीं,
उर्मिला माधव

शेर

एक तख़य्युल के सिवा हाथों में इसके कुछ नहीं,
उसपे इतराता है इंसां, जाने क्या-क्या सोच कर..
उर्मिला माधव ..
21.1.2017

Friday, 19 January 2018

शेर

दिल के बहलाने को सौ तरक़ीब कीं,
ज़िन्दगी भर दिल बहुत भारी रहा ..
उर्मिला माधव ..
20.1.2017

शेर

मैंने .......दुनियां उतार फेंकी है,
जिसका जी चाहे वो पहन डाले ..
उर्मिला माधव। ..

शेर

अब ये दीवारें। ..बड़ी होने लगी हैं,
इनमें गुंजाइश कहाँ दर खोलने की। ..
उर्मिला माधव।
20 .1 .2017

Thursday, 18 January 2018

क़ता

आए हो अगर सामने तो वार सम्हालो,
भागो न यूँ मैदान से तलवार सम्हालो,
ज़ख़्मों की ख़लिश को भी ज़रा झेल के देखो,
बचने का कोई फ़न है तो फिर ख़ुद को बचालो....
उर्मिला माधव
19.1.2013

शेर

दिमाग़ी ख़ूबियों पर फ़ख़्र करना ख़ूब जायज़ है,
कभी ऐसा भी होता है ज़माना दिल में हँसता है...
उर्मिला माधव...
19.1.2015..

शेर

तमाशा ख़ूब कर लेना,मगर इतना भरम रखना,
मुक़ाबिल हों कभी जो हम तो खुलके मुस्कुरा पाएं..
उर्मिला माधव...
19.1.2015

क़ता

मुझे तुमसे,तुम्हें मुझसे ....जुदा रहना ज़रूरी है,
मैं अहमक हूँ,..तुम्हारा नाख़ुदा रहना ज़रूरी है,
ये अच्छा है तुम्हारा दिल बहुत मजबूत पत्थर है
मेरा बस नाम पत्थर पर ..खुदा रहना ज़रूरी है....
उर्मिला माधव...
19.1.2015

शेर

पतंगें जब उड़ाते हैं तो उसमे ढील देते हैं,
वगरना खींचातानी से तो मांजा टूट जाता है....
उर्मिला माधव...
19.1.2015...

शेर

गिरह्बंद शेर Dev Niranjan जी के शेर पर....

दुआ मिले है अगर ....तो दुआ भी झुक कर ले,
हवा का क्या है, वो चाहे जिधर का रुख़ कर ले..
उर्मिला माधव....
16.1.2015...

Wednesday, 17 January 2018

मुक्तक

कल्पनाएँ तो ह्रदय की होगयीं ऊंची गगन सी, 
वास्तविकता के सहज सोपान होते ही कहाँ हैं??
मंदिरों में देवता पर......पुष्प चढ़ते हैं सहस्त्रों,
किन्तु सब निष्प्राण है,वरदान होते ही कहाँ हैं??
उर्मिला माधव...
18.1.2014

शेर

ये उसकी तेज़ निगाही का करिश्मा ही सही,
फिर भी क़ाबिज़ न हुआ दिल पे ये मंज़र कोई...

Ye uski tez nigaahii ka karishma hi sahii,
Phir bhi qabiz n hua,dil pe ye manzar koii...
उर्मिला माधव ..
18.1.2016

एक शेर

इक गुहर चाहिए, दुनियां को तलाशो जाकर,
हर सदफ़ खोल के देखो ये ज़हमत तो करो...
उर्मिला माधव ..
18.1.2017

एक शेर

उसकी समझ में आये क्यूं, मेरे सुकूं की बात,
जो वाक़ये को .........वाक़ये से बढ़के ले गया
उर्मिला माधव ...
17.1.2017

शेर

अभी संमझी कहाँ तुमने....समझना और बाक़ी है,
ये दुनियां तब शुरू होती है,जब  इनसान ढलता है..
उर्मिला माधव ..
17.1.2017

Monday, 15 January 2018

क़ता

शेर-ओ-सुखन का रंग भी कितना अजीब है,
रहते हैं सब ज़मीं पै .....मगर आसमां लिखें,
दिल रंजग़र ....ऑ आँख में आंसू भी ख़ूब हैं,
जलती हुई क़लम से मगर .....शादमां लिखें.....
उर्मिला माधव...
16.1.2017....

क़ता

ये मशीनी वक़्त है,तकनीक को सब इख़्तियार,
अब मोबाइल पर टिका है ज़ीस्त का दारो मदार,
जब बिगड़ जाये अचानक...गुफ्तगू के दरमियाँ
कुछ नहीं हाथों में रहता ....एक सिवाए इंतज़ार...
#उर्मिलामाधव
16.1.2017

Thursday, 11 January 2018

क़ता

दर्द अपना,...बयान कर तो दिया,
आपको ....बेज़ुबान कर तो दिया,
ग़म में ......जिसके सहारे जीते थे,
अब वो ख़ाली,मकान कर तो दिया...
उर्मिला माधव..
12.1.2017

क़ता

मैंने ख़ुद को संभाल रख्खा है,
हंसके दुनियां को टाल रख्खा है,
चश्म-ए-गिरयां नज़र नहीं आते,
इतना शीशे में ढाल रख्खा है,
उर्मिला माधव..
12.1.2017

क़ता

ख़ब्त सर पे सवार है उनके,
ज़ब्त सीने के पार है उनके,
लफ्ज़ भी बस "गुरूर" बोलेंगे,
जैसे मुंह में कटार है उनके...
उर्मिला माधव...
12.1.2014...

Wednesday, 10 January 2018

क़ता

ग़ैर मुल्क मैं चर्चे इसके,नूर-ए-हिन्दुस्तान हुई,
लाशों के अम्बार पे बैठी दिल्ली कब्रिस्तान हुई,
लाल किले की दीवारों से परचम भी लहराता है,
ख़बर सभी को इसके पीछे,किसकी जाँ कुर्बान हुई...
उर्मिला माधव...
11.1.2014...

शेर

तमाशा,ज़िन्दगानी है, अजब दुनियां-ए-फ़ानी में,
सफ़र है काफ़िलों में और..अकेले कूच करना है,
उर्मिला माधव...
11.1.2017

Tuesday, 9 January 2018

चार मिसरे

रौशन शमा करो तो शब-ए-ग़म को देख लूँ,
ग़म से निजात पाऊँ तो मौसम को देख लूँ,
मौसम से जो मिलूँ तो मैं शबनम को देख लूँ,
नज़रें उठाऊँ भीगे हुए आलम को देख लूँ.......
उर्मिला माधव

Monday, 8 January 2018

क़ता

यूँ बोले अल्लाह क़सम.....दिल प्यार से हमने जीता है,
उफ़ झूठ पे चलने वालों को,भई कितना बड़ा सुभीता है,
ली हाथ में जब तस्बीह..लिया हरि नाम हज़ारों रंगों में,
बस शाम हुयी तो गम के आंसू.....मयखाने में पीता है,
भई कितना बड़ा सुभीता है...

उर्मिला माधव...
9.1.2014...

शेर

ग़म कभी हद से गुज़र जाता है,
यूँ के हर ख्वाब बिखर जाता है,
उर्मिला माधव....
9.1.2015

Saturday, 6 January 2018

शेर

इस क़दर ठोकी गईं .....कीलें मेरे ताबूत में, बाद मरने के ये जाना,दुख्तर-ए-ईसा (daughter of Christ) थी में...उर्मिला माधव

क़ता

मैंने सजदे में सर ...झुका भी लिया,
अस्ल जो..ज़ख़्म था छुपा भी लिया,
आज़माइश भी ...सब की  ख़ूब हुई,
जितना चाहा था वो दिखा भी लिया...
उर्मिला माधव..
7.1.2017

क़ता

ज़िन्दगी ........दर-ब-दर घुमाती रही,
जाने किस-किस का घर दिखाती रही,
ख़ुद ही .........हिम्मत को दाद दी मैंने,
दुनियां .......बुनियाद पर हिलाती रही..
उर्मिला माधव..
7.1.2017

Friday, 5 January 2018

क़ता

Lagado aag duniyan main agar dil khud ka jalta ho,
karo tabdeel cheekhon main agar gum na sanbhlta ho,
agar koi sath na de to tum apna aasmaan rach lo,
kaleja chaaq hota hai agar gum dil mai palta ho..... Urmila Madhav..

क़ता

मुझको दीवाना बनाया खब्त ने,
साथ कुछ मेरा निभाया ज़ब्त ने,
मुझको चलने का सलीका ही कहाँ,
बढ़के आईना दिखाया.....वक़्त ने,
उर्मिला माधव...
६.१.२०१३...

क़ता

अगर पाबंदियां रोकें तो फिर ख़्वाबों में आजाना,
मेरी ग़मगीन रातों की...सियाही में,समा जाना,
किसी भी शक्ल में आना..मगर आना ज़रूरी है,
ज़रासा मैं कहूँगी कुछ,बहुत सा तुम सुना जाना....
उर्मिला माधव...
6.1.2014..

Thursday, 4 January 2018

एक शेर

मुहब्बत की तलब सबको.....हसद का कौन तालिब है,
के जिसकी मार का दिल पै अभी तक खौफ़,ग़ालिब है....
उर्मिला माधव....
5.1.2015...

तस्वीर पर क़ता-------

आसमां पे लाल बादल छाये हैं,
किस लिए पंछी यहाँ मंडराए हैं?
फिर हुआ क्या हादसा कोई नया?
क्यूँ उफ़क पर ये ग़मों के साए हैं....
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aasmaan pe laal baadal chhaaye hain,
kisliye panchhi yahan mandraaye hain,
phir hua kya haadsa ............koii naya,
kyun ufak par ye gamon ke saaye hain...
#उर्मिलामाधव..
5.1.2016

Wednesday, 3 January 2018

क़ता

muhabbat main kabhi aise koi saude nahin hote,jahaan ulfat ki nazren hon wanhaan auhde nahin hote,kharedaree muhabbat ki kabhi hoti nahin mumkin,ye duniyan hai zaheenon ki yahaan shohde nahin hote...........by urmila madhav(upadhyay)........

कुंडलिया छंद

hamne pahle hi kaha ho jaao taiyaar,
haar jeet k mamle hote hain bekaar,
hote hain bekaar mat karo guththam guththa,
khaa lo badhiya paan,lagake choona kaththa...
kahen Urmil kaviraai so raho odh rajayi,
kisne jana neend tumhen aayi na aayi..   :-)  Urmila Madhav

क़ता

dhadkanen rafataar main kumtar rahin'
mushkilen kuchh or bhi badtar rahin,
hum bhi kis-kis ko sunaate haal-e-gum,
koshishen phir zabt ki behtar rahin.........  Urmila Madhav...

क़ता

Hadson pe haadse sahte gaye,
or usi halaat main rahte gaye,
khud to jeene ka saliqa tha nahin,
zindagi ki dhaar main bahte gaye.
Urmila Madhav..

एक शेर

अगर कुत्ता कहीं भोंके,तबीयत खिल सी जाती है,
के सच है उसकी बोली से वफ़ा की बू तो आती है...
Urmila Madhav...
4.1.2015...

क़ता

बात कुछ इस तरह बिगड़नी थी,
अपनी-अपनी जगह पै अड़नी थी,
सब को इक दूसरे से शिकवा था
खुद-ब-खुद ही लड़ाई लड़नी थी....
Urmila Madhav...
4.1.2015...

क़ता

अपना चेहरा तो रख दो शानों पै,
हमको उड़ना है ...आसमानों पै,
फ़िक्र करने की क्या ..ज़रुरत है,
जब समंदर भी है .....निशानों पै ....
Urmila Madhav..
4.1.2015...

क़ता

सब परिधियाँ अर्थ अपने खो चुकी हैं सृष्टि में,
अब रहा संसार .......सो है शून्य मेरी दृष्टि में,
कौन गणनाएँ करे आघात ऑर प्रतिघात की,
चेष्टाएँ सब उपेक्षित .....पीर की अतिवृष्टि में,
उर्मिला माधव...
15.11.2016

एक शेर

बाहर की आवाज़ सुनाई देगी क्यों,
भीतर .जब सन्नाटे शोर मचाते हैं...
उर्मिला माधव
4.1.2016

एक शेर

सब दुआएं थीं ....तहे दिल से अगर,
किन तहों में,दिल,दुआ सब दब गए

sab duaen thin ......-tahe dil se agar
kin tahon men dil dua sab dab gaye
Urmila Madhav
4.1.2016

Tuesday, 2 January 2018

एक शेर

उम्र भर लड़ते रहे हम...कितने सैलाबों के साथ,
बंद आख़िर होगये अब घर की मेहराबों के साथ,
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umr bhar ladte rahe ham,kitne sailaabon ke sath,
band aakhir hogaye ab,ghar ki mehraabon ke sath,
उर्मिला माधव...
3.1.2013.

शेर

चश्मे पुरनम,लोग बरहम,उसपे ये तन्हाई भी
झूठ ही हो फिर भी है रुसवाई तो रुसवाई ही,
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chashm-e-purnam,log barham,uspe ye tanhai bhi,
jhuth hi ho,phir bhi hai,...........ruswaii to ruswaii hi
#उर्मिलामाधव...
3.1.2016