ज़िन्दगानी-ए-शरीयत ख़ैरियत रखती नहीं, कौनसी हस्ती है जो कुछ क़ैफ़ियत रखती नहीं, फ़िर किसीको क्यूँ मसीहा मान कर सजदा करें, हिम्मत-ए-इंन्साँ सबाब-ए- हैसियत रखती नहीं.... उर्मिला माधव
२१.१.२०१३
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