मैंने कुछ औराक खोले ही कहाँ, इतने सारे सच थे,बोले ही कहाँ, मुस्कुरा कर आँख ने देखा बहुत, ग़ैर के जज़्बात....तोले ही कहाँ, उर्मिला माधव.... 30.1.2017
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