Monday, 29 January 2018

बोले ही कहाँ

मैंने कुछ औराक खोले ही कहाँ,
इतने सारे सच थे,बोले ही कहाँ,
मुस्कुरा कर आँख ने देखा बहुत,
ग़ैर के जज़्बात....तोले ही कहाँ,
उर्मिला माधव....
30.1.2017

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