बात कुछ इस तरह बिगड़नी थी, अपनी-अपनी जगह पै अड़नी थी, सब को इक दूसरे से शिकवा था खुद-ब-खुद ही लड़ाई लड़नी थी.... Urmila Madhav... 4.1.2015...
No comments:
Post a Comment