यूँ बोले अल्लाह क़सम.....दिल प्यार से हमने जीता है,
उफ़ झूठ पे चलने वालों को,भई कितना बड़ा सुभीता है,
ली हाथ में जब तस्बीह..लिया हरि नाम हज़ारों रंगों में,
बस शाम हुयी तो गम के आंसू.....मयखाने में पीता है,
भई कितना बड़ा सुभीता है...
उर्मिला माधव...
9.1.2014...
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