मुझको दीवाना बनाया खब्त ने, साथ कुछ मेरा निभाया ज़ब्त ने, मुझको चलने का सलीका ही कहाँ, बढ़के आईना दिखाया.....वक़्त ने, उर्मिला माधव... ६.१.२०१३...
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