Friday, 5 January 2018

क़ता

मुझको दीवाना बनाया खब्त ने,
साथ कुछ मेरा निभाया ज़ब्त ने,
मुझको चलने का सलीका ही कहाँ,
बढ़के आईना दिखाया.....वक़्त ने,
उर्मिला माधव...
६.१.२०१३...

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