Sunday, 28 January 2018

मुक्तक

सब मिट्टी के सोपानों पर खड़े हुए हैं ....आकर देख,
जन जीवन की रीति यही है, अंतर्दृष्टि जगा कर देख,
जब साहस उत्तुंग हुआ,तब रीति-नीति का बिंदु कहाँ,
मार्ग सहज ही मिल जायेगा,केवल पाँव बढ़ा कर देख...
उर्मिला माधव,
29.1.2017

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