सब मिट्टी के सोपानों पर खड़े हुए हैं ....आकर देख, जन जीवन की रीति यही है, अंतर्दृष्टि जगा कर देख, जब साहस उत्तुंग हुआ,तब रीति-नीति का बिंदु कहाँ, मार्ग सहज ही मिल जायेगा,केवल पाँव बढ़ा कर देख... उर्मिला माधव, 29.1.2017
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