देदिया जब हाथ में दिल तोडके, देखते हैं क्या वो...टुकड़े जोडके? आंसुओं को पोंछते थे रात दिन, देखने तक आये न मुंह मोड के.... उर्मिला माधव... 22.1.2014..
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