Mujhko parwaah kyun nahin rahti
Labon pe aah kyun nahin rahti
Sabko hai fiqr deen-o-duniyan kii,
Mujhko lillah,kyun nahin rahti
Urmila Madhav
शर्म ..बाक़ी नहीं बची है यहां,
लोग खुल के कमाल करते हैं,
जिसको,जैसी जहां ज़रूरत है,
उसका बस..इस्तेमाल करते हैं...
उर्मिला माधव,
29.9.2017
आपकी सूरत हंसीं तो है .….ज़ुरूर,
उसके ऊपर सिर्फ़ लिख्खा है ग़ुरूर,
इसको पढ़के यूँ समझ लो, जानेमन,
जा चुके हैं उम्र भर को .....तुमसे दूर
उर्मिला माधव
दिल में अरमान रहा,यार को मेहमां करते,
फिर भी ख़ामोश रहे,उसको बताया भी नहीं,
उर्मिला माधव,
28.9.2017
चाहिए कोई भी …..नहीं हमको,
हमतो बस ..दिल लगाते रहते हैं
दिल को तन्हाइयों का ग़म न रहे,
यूँ ही महफ़िल में जाते रहते हैं..
उर्मिला माधव,
28.9.2017
Toota hua jo dil tha samhaala nahin gaya,
gum apni zindagi se....nikaala nahin gaya....
Urmila Madhav....
26.3.2013..
nazar bharke jo dekhenge,tumhen beemar kar denge,
zara bhi lab na kholenge.......magar izhaar kar denge,
muhabbat ke abhi pahle sufhe ke tum baraq padh lo,
hamesha aakhiri dum pe tumhen hoshiyar kar denge...
Urmila Madhav...
26.9.2013
यूँ बोले वो राम क़सम दिल प्यार से हमने जीता है,
झूठ पे चलने वालों को,ये कितना बड़ा सुभीता है,
हाथ में ली तस्बीह..लिया हरि नाम हज़ारों रंगों में,
शाम हुयी तो गम के आंसू.....मयखाने में पीता है,
ये कितना बड़ा सुभीता है...
उर्मिला माधव...
26.9.2014
duniyaan se aaj koi shikayat nahin rahi,
afsurdgi se dil ko....bagawat nahin rahi,
milna ho ya bichhadna,sabhi eksa lage,
hum pe masarrton ki inaayat nahin rahi,
Urmila Madhav
पैमाना मेरी उम्र का ...........वो नापता रहा,
जो ज़िन्दगी के ग़म की तपिश जानता न था..
उर्मिला माधव..
23.9.2017
अजनबी अतराफ़ हैं,और ये मुक़म्मल फ़ासले,
कितना बढ़ता जाएगा,रुकजा ज़रा तो साँस ले,
शौक है मिटने का,मिटजा,तेरी अपनी ज़िंदगी,
पहले दिल पे हाथ रखले,फ़ैसला तब ख़ास ले..
उर्मिला माधव...
25.9.2013
अतराफ़---दिशाएँ..
आँख से आंसू जो निकले,दिल के छालों पै गिरे,
देखने वालों ने समझा ........सिर्फ़ गालों पै गिरे,
होश कुछ आया तो देखा ...घर धुंएँ से भर गया,
ग़म तड़प कर रह गए,.और हम मलालों पै गिरे
उर्मिला माधव..
25.9.2015
हम चुकाते रह गए ...सच बोलने की कीमतें,
तोड़ कर जाते रहे सब .उम्र भर की निसबतें,
यूँ भी तबियत के हमेशा हम बहुत नादिर रहे,
रास भी आईं तो कुछ तन्हाईयाँ और ख़लवतें....
#उर्मिलामाधव..
25.9.2015...
सब यहीे समझे ......के सोते रह गए,
हम मगर ......तकिये भिगोते रह गए,
दिल जिगर पै इतने ज़्यादः ज़ख्म थे,
ख़ून के धब्बे ही ..........धोते रह गए..
#उर्मिलामाधव
25.9.2015
हमने जाने क्या-क्या अपना खो दिया,तुम क्या हो जी ?
हमको भी अब खलवतें दरकार है .....तुम जाओ जी,..
उर्मिला माधव..
25.9.2016
I do understand people's professionalism since childhood but couldn't follow it...
Urmila Madhav
फ़रोज़ां कर रहे थे ज़िन्दगी को,खूँ जला के हम
मगर ........तुमसे कहाँ ये रौशनी देखी गई मेरी
उर्मिला माधव
23.9.2017
Ye samajhne men kitni der kardi,
Zindagi kude pe hamne dher kardi
ये समझने में कितनी देर कर दी,
ज़िंदगी कूड़े पे हमने ढेर कर दी,
उर्मिला माधव
अपनी मजबूरियां बहुत थीं मगर
किसको बतलाते क्या गुज़रती है,
अपनी जानिब से हँसके मिलते हैं,
बात कहते हैं पर बिखरती है
उर्मिला माधव
कोई जब इन्क़लाब कहता है,
ख़ुद को ही लाजवाब कहता है,
लफ़्ज़ कहता है, ज़ह्र हो जैसे,
जी दुखा कर सबाब कहता है
उर्मिला माधव
अहले दिल शायरी में जीते हैं,
रंज खाते हैं .....अश्क़ पीते हैं.....
उर्मिला माधव...
23.9.2014...
जो सुकून-ओ-चैन अता करे मेरे हक़ में ऐसी दुआ करो,
जो तुम ही ने मुझको दिए हैं सब वही ज़ख़्म तुम न छुआ करो,
जिसे इल्म ही न हुआ कभी किसी बन्दगी का चलन है क्या ?
तुम्हें ख़ुद पै कितना ग़ुरूर है जो भी होगे तुम वो हुआ करो।।..
उर्मिला माधव....
लोग फितरत से कभी बाज़ नहीं आ सकते,
सोज़ की तरहा कोई ..साज़ नहीं ला सकते ,
जो कभी खुद में कोई ख़ास मुक़म्मल न रहे,
टूटते दिल में वो .....आवाज़ नहीं ला सकते...
उर्मिलामाधव...
21.9.2015
एक छोटा सा फैसला लेकर,
ख़ुदकुशी हमने मुल्तवी करदी,
सांस जब तक है,जीते जाना है
बस रजिस्टर में हाज़री भरदी..
उर्मिला माधव,
21.9.2017
ज़िन्दगी कब-कब रही है मोअतबर,
एक पल हाज़िर है,इक पल ख़ाक पर
ये तो कूज़ागर की मर्ज़ी है महज़
जब तलक चाहे घुमाए चाक पर
उर्मिला माधव
मज़ाहिया कविता..
मेरी कविताएं जग में ........दहाड़ू पिया,
शब्द लिख्खे,.…....उखाड़ू-पछाड़ू पिया,
कितनी मुश्किल से पहुंची हूँ मंचों तलक
लोग कहते हैं मुझको .......जुगाड़ू पिया..
उर्मिला माधव,
21.9.2017
हमको रंगों की न कुछ पहचान बाक़ी रह गई,
रंग-ए-रुख़सत देख कर जब आंख झपकी ही नहीं,
उर्मिला माधव,
21.9.2018
अभी तुमसे बिछड़ कर सोचते हैं,क्या करें आख़िर,
बड़ी मुश्किल है,अपना सब्र हमको आज़माना है
उर्मिला माधव
18.9.2019
बात करते हैं सियासत की.....यहाँ इन्सान सब,
अपनी ज़ाती ज़िन्दगी में,कितने हैं बेईमान सब,
सबकी बातों में सियासत,और घातों में सियासत,
बस अकेले वो हैं वाइज़........बाकी हैं नादान सब...
उर्मिला माधव...
१९.९.२०१३
साहिबे आलम जी क्या छुट्टी पे हैं ?
हमतो समझे थे के बस कुट्टी पे हैं... :)
उर्मिला माधव...
19.9.2016
कौन पूछे किसीका हाल यहां,
सब तो अपनी दुहाई देते हैं,
खुलती है,जब भी आंख मुश्किल से
तंज़ गहरे सुनाई देते हैं...
उर्मिला माधव,
19.9.2017
Mujhko kahan gurez kabhi khasta haal se
Ho tiirgii ka sath zaraa zakhm dhak sakun
:;
मुझको कहाँ गुरेज़ कभी ख़स्ता हाल से,
हो तीरगी का साथ,ज़रा ज़ख्म ढक सकूँ..
#उर्मिलामाधव
18.9.2015
ज़िन्दगी भी .अब मुसलसल पूछती है,
और कितना मुझको तुम ज़ाया करोगे...?
उर्मिला माधव..
18.9.2016
हर सतह अब ...खुरदुरी सी लग रही है,
सच समझ कर .झुरझुरी सी लग रही है,
अब धसक जाने का डर है ज़िन्दगी को,
ख़ास मिट्टी ......भुरभुरी सी लग रही है....
उर्मिला माधव...
18.9.2017
ज़ीस्त की बुनियाद ऐसी है कि मरते ही बने,
जितना ही इसको समेटो ये बिखरते ही बने,
अनगिनत रानाइयाँ हैं किसको देखेंगे भला,
सूरत-ए-हालात ये कि....सिर्फ़ डरते ही बने
उर्मिला माधव..
11.3.2013
वक़्त ने .जब-जब सताया है बहुत,
रंज-ओ-ग़म चेहरे पे आया है बहुत,
दी मुआफ़ी हर किसी गुस्ताख़ को,
जब वो मुझ पे मुस्कुराया है बहुत..
उर्मिला माधव...
17.9.2016
ख़ाकसारी और बिमारी, दोनों बिल्कुल एक हैं,
दोनों ही हालात में तो ख़ुश्क हो जाते हैं लब,
उर्मिला माधव,
17.9.2018
इक तबस्सुम के लिए क्या-क्या नहीं करते हैं लोग,
अश्क़ उसके देख कर ..दिल देर तक रोया किया...
::
Ik tabassum ke liye kya-kya nahi karte hain log,
ashq uske dekh kar ..........dil der tak roya kiya
#उर्मिलामाधव
15.9.2015
जिनका हम एहतराम करते हैं,
वो ही कुछ ऐसा काम करते हैं,
जीने-मरने पे बात जा पहुंचे,
दिल का वो इंतज़ाम करते हैं...
उर्मिला माधव..
आग में ज़िंदा जले, तब आपने सीता कहा,
आपको ये फैसला करने का हक़ किसने दिया ?
🤔
उर्मिला माधव,
ख़ुद को बिल्कुल उदास छोड़ दिया,
दिल भी उसके ही पास छोड़ दिया,
अब शिकायत भी उससे कौन करे,
जिस ने उल्फ़त का पास छोड़ दिया...
उर्मिला माधव,
14.9.2018
अगर मर्सिया लफ्ज़ मैच न होता हो तो,एक दिन के लिए ऐडजस्ट करलें बस..
आज हिंदुस्तान है ये, बाक़ी दिन फिर इंडिया,
तुमको हिंदी की कसम है,हिंदी बोलो हे पिया,
एक दिन की बात है बस,फिर वही अंग्रेज़ हम,
कल से पढ़ डालेंगे दोनों,इसपे मिलके मर्सिया..
उर्मिला माधव,
14.9.2017
जुबां शीरीं जो तुम रखते तो हम भी दौड़ कर आते,
कोई मुश्किल खड़ी रहती,सभी कुछ छोड़ कर आते,
मगर बोली तुम्हारी......तल्खियत से चूर रहती है,
बताओ किसकी खातिर रस्म सारी तोड़ कर आते??
उर्मिला माधव ...
१३.९.२०१३
दुनियां के हर इंसान को हो ईद मुबारक़,
जो जिसके साथ हो उसे वो दीद मुबारक,
मफ़हूम मेरी बात का इतना ही है जनाब,
जो की गई है दिल से वो तनक़ीद मुबारक़....
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duniyaan ke har insaan ko ho iid mubaaraq,
jo jiske saath ho......use wo deed mubaaraq,
mafhoom merii baat ka...itnaa hii hai janaab,
jo kii gaii hai dil se.......wo tanqiid mubaaraq...
उर्मिला माधव....
अभी इतिहास के पिछले सुफहे पूरे नहीं भूले,
नई एक इब्तेदा की आज फिर पहली कड़ी है,
ज़रूरत क्या कसौटी पर अकेले हम खरे उतरें,
करें क्यों मश्क आखिर ज़िन्दगी कितनी बड़ी है ?
उर्मिला माधव,
13.9.2016
तक़लीफ़ ज़िंदगी में बहुत दूर तक चली,
खुशियों ने डर के हमसे मुलाक़ात ही न की..
उर्मिला माधव,
13.9.2017
हम शिव कहकर शव हुए और तुम अंतर्ध्यान,
घर बाहर सब एकसा ...मन जब हुआ मसान....
#उर्मिलामाधव
12.9.2015
तुम न आए तो क्या सहर न हुई
हाँ मगर चैन से बसर न हुई
मेरा नाला सुना ज़माने ने
एक तुम हो जिसे ख़बर न हुई
मैंने तनहाई को चुना है ख़ुद,
मैं भी दुनिया संवार सकती थी..
जाने कितने दबाव थे मुझपे,
चाहती तो मैं हार सकती थी,
उर्मिला माधव,
12.9.2018
दिल,जिगर,दामन,गरेबाँ,चाक सब,
अब समझना है हमें ये चैन क्या है ?
::::::;;
Dil,jigar,daaman,garebaa'N chaak sab,
Ab samajhna hai hamen ye chain kya hai ?
उर्मिला माधव...
11.9.2016
मेरे जितने दोस्त थे सब हो गए आलमपनाह,
अब रिआया हैं न उनके दोस्तों में ही शुमार,
उर्मिला माधव,
11.9.2017
चंडूख़ाने की दीवार गिरानी पड़ सकती है,
दीवारों के पार अजब सा। ....सन्नाटा है...
उर्मिला माधव,
11.9.2017
कितने सारे। ...दर्द समेटे फिरता है,
दिल ये आहें। ..सर्द समेटे फिरता है,
जब चाहे तब दुनियां अपनी रच डाले
बेमतलब की। ..गर्द समेटे फिरता है
उर्मिला माधव
दुनियां से नाराज़ नज़र क्यों आते हो ?
झगड़े का आग़ाज़ नज़र क्यों आते हो ?
सब खुशियां तो हासिल तुमको रहती हैं,
बे मतलब नासाज़ नज़र क्यों आते हो ?
उर्मिला माधव।।
ये मुक़म्मल बेख़ुदी और दिल भी ज़िद पर आ गया,
इतना भी मजबूर मत रख ...हाशिये महफ़िल मुझे....
#उर्मिलामाधव...
10.9.2015...
रेत के रास्ते हैं
रह-रह के बिखर जाते हैं,
फिर भी चलना तो पड़ेगा,
कोई उद्देश्य लेकर क्या चलूँ मैं,
ये बताओ क्या करूँ चलना छोड़ दूँ?
अनवरत है यत्न मेरा दूर जाने के लिए
मेरी रातें थक गईं है,याद करके
चैन अब मिलता नहीं कोई बात करके
आत्म केंद्रित होकर जीना ठीक होगा
मैं किसी पीड़ा को सहलूं
मुझमें वो ताक़त नहीं
जो समय ने पीर दी है
बाँध के छज्जे पै रख दी,
तुम ज़रूरत थे मेरी,पर मुझे चलना पड़ा है
साथ ख़ुद के
क्या तुम्हें लगता है
ये परस्पर दूरियां मिट पाएंगी अब?
शायद मेरी तरफ से तो नही
अब ज़रूरत थी निरंतर साथ की
कौन समझाता तुम्हें
जो तुम्हें करना नहीं था
कर रहे हो
जाओ तुम आज़ाद हो
बस यहीं तक रास्ते मिलते थे अपने,
मुझको लौटाना तुम्हारा काम था,
क्या कहूँ पर
ये समझने में मुझे सदियाँ लगी हैं
तुम ज़माने के लिए हो,लौट जाओ..
सबके पाने के लिए हो लौट जाओ
दिल दुखाने के लिए हो लौट जाओ
हाँ मैं कहती हूँ तुम्हें तुम लौट जाओ
यूँ भी तो अब मैं नहीं आउंगी तुम तक
लौट जाओ लौट जाओ लौट जाओ...
#उर्मिलामाधव
10.9.2015
क्यूँ करें शिकवा तेरी तहरीर का हम,
जानते हैं फैसला तकदीर का हम ...
सांप हमने पाल् के रख्खे है घर में,
जानते हैं हौसला हर तीर का हम ....
उर्मिला माधव
९.९.२०१३
उम्र से ज़्यादः कोई जिंदा नहीं,
चार पल है सिर्फ़,आइन्दा नहीं,
बेहयाई ओढ़ के बैठा हुआ जो,
गलतियां करके भी शर्मिंदा नहीं....
उर्मिला माधव...
9.9.2014...
सब ज़माना ये क़ब्र लगता है,
चूँकि जीना ही जब्र लगता है,
ख़ुद को इंसान भी जताने में,
उम्र लगती है...सब्र लगता है,
#उर्मिलामाधव..
9.9.2015
क्या ही बेहतर हो उतारें,दिल से अब बार-ए-मुहब्बत,
कब तलक सजदा करें यूँ तुझको हम दार-ए-मुहब्बत..
उर्मिला माधव..
7.9.2016
सब लोग बहुत कुछ कहते हैं हम फ़ेक हंसी हंस देते हैं,
ढकने को अपने अश्क़ दुपट्टा आरिज़ पे रख देते हैं,
उर्मिला माधव,
7.9.2017
जब से हुआ बिछोह तुम्हारा,तब ही से हम सोये नहीं हैं,
स्वयम अश्रुधारा बहती है,"राम कसम" हम रोये नहीं हैं,
दुविधाओं ने जीवन घेरा........स्थितप्रज्ञ हुआ मन मेरा,
कंटक जाल नियति ने सौंपे....अपने हाथों बोये नहीं हैं.
उर्मिला माधव..
एक तबक़ा जो मुहब्बत क़ौम पर ख़ारिज़ करे,
इस तरह से बे-गुनाही कैसे साबित हो मियाँ
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ek tabqaa jo muhabbat qaum par khaariz kare,
iss tarah se be- gunaahii kaun phir saabit kare...
उर्मिला माधव....
पाक रूहें देखती हैं हर किसी को एक सा
जैसे कबिरा मांगता था ख़ैर..सबके वास्ते...
उर्मिला माधव ..
6.9.2016
साज़ कोई सोज़ के कैसे मुकाबिल हो सकेगा, !
जो तड़पना ही न जाने,वो कहाँ दिल हो सकेगा !
उर्मिला माधव...
5.9.2016
थक के रो जाते हैं .....किरदार निभाने वाले,
इस क़दर दाग़ लगाते हैं .........ज़माने वाले,
करना पड़ता है कभी ज़ब्त सरे महफ़िल भी,
सारे अफ़साने ...........नहीं होते सुनाने वाले....
#उर्मिलामाधव...
4.9.2015...
हम अकेले ख़ास अपने रंग में हैं,
यूं बज़ाहिर आप सबके संग में हैं....
उर्मिला माधव..
4.9.2017
पांव के नीचे ज़मीं और सर प हो परवरदिगार,
जी हुज़ूरी है हमें मंज़ूर, पर अल्लाह की,
उर्मिला माधव
4.9.3018
ग़म-ए-ज़ीस्त दर्द-ए-जिगर ख़ूब संभाला हमने,
अब तो बस दूसरी दुनियां का सफ़र बाक़ी है.....
#उर्मिलामाधव...
2.9.2015
ज़ख़्म ग़र ये ..बरमला हो जायेगा,
बस ख़ुदा का दर भला हो जायेगा,
ज़लज़ले ....रफ़्तार पर आ जायेंगे,
हर नफ़स एक .कर्बला हो जाएगा..
उर्मिला माधव..
2.9.2017
*******
Zakhm gar ye barmala ho jayega,
Bas khuda ka ghar bhala ho jayega,
Zalzale raftaar .....main aa jayenge
Har nafas ek karbalaa ho jaayegaa..
Urmila Madhav
मेरे घर में एक दिन जब ..........दर्द का आलम रहा,
आने-जाने वालों का इक...... ख़ास तबक़ा कम रहा,
चश्म-ए-गिरया एक तरफ़ कर,बस यही सोचा फ़क़त,
अब से मैं तनहा चलूँगी,....... ग़र चे दम में दम रहा….
उर्मिला माधव,
2.9.2017