सब लोग बहुत कुछ कहते हैं हम फ़ेक हंसी हंस देते हैं, ढकने को अपने अश्क़ दुपट्टा आरिज़ पे रख देते हैं, उर्मिला माधव, 7.9.2017
No comments:
Post a Comment