Monday, 16 September 2019

डरते ही बने

ज़ीस्त की बुनियाद ऐसी है कि मरते ही बने,
जितना ही इसको समेटो ये बिखरते ही बने,
अनगिनत रानाइयाँ हैं किसको देखेंगे भला,
सूरत-ए-हालात ये कि....सिर्फ़ डरते ही बने
उर्मिला माधव..
11.3.2013

No comments:

Post a Comment