मेरे घर में एक दिन जब ..........दर्द का आलम रहा, आने-जाने वालों का इक...... ख़ास तबक़ा कम रहा, चश्म-ए-गिरया एक तरफ़ कर,बस यही सोचा फ़क़त, अब से मैं तनहा चलूँगी,....... ग़र चे दम में दम रहा…. उर्मिला माधव, 2.9.2017
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