Saturday, 28 September 2019

कमाल करते हैं

शर्म ..बाक़ी नहीं बची है यहां,
लोग खुल के कमाल करते हैं,
जिसको,जैसी जहां ज़रूरत है,
उसका बस..इस्तेमाल करते हैं...
उर्मिला माधव,
29.9.2017

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