हम चुकाते रह गए ...सच बोलने की कीमतें, तोड़ कर जाते रहे सब .उम्र भर की निसबतें, यूँ भी तबियत के हमेशा हम बहुत नादिर रहे, रास भी आईं तो कुछ तन्हाईयाँ और ख़लवतें.... #उर्मिलामाधव.. 25.9.2015...
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