कोई जब इन्क़लाब कहता है, ख़ुद को ही लाजवाब कहता है,
लफ़्ज़ कहता है, ज़ह्र हो जैसे, जी दुखा कर सबाब कहता है
उर्मिला माधव
No comments:
Post a Comment