जो सुकून-ओ-चैन अता करे मेरे हक़ में ऐसी दुआ करो, जो तुम ही ने मुझको दिए हैं सब वही ज़ख़्म तुम न छुआ करो,
जिसे इल्म ही न हुआ कभी किसी बन्दगी का चलन है क्या ? तुम्हें ख़ुद पै कितना ग़ुरूर है जो भी होगे तुम वो हुआ करो।।.. उर्मिला माधव....
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