जब से हुआ बिछोह तुम्हारा,तब ही से हम सोये नहीं हैं, स्वयम अश्रुधारा बहती है,"राम कसम" हम रोये नहीं हैं, दुविधाओं ने जीवन घेरा........स्थितप्रज्ञ हुआ मन मेरा, कंटक जाल नियति ने सौंपे....अपने हाथों बोये नहीं हैं. उर्मिला माधव..
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