Thursday, 12 September 2019

दौड़ कर आते

जुबां शीरीं जो तुम रखते तो हम भी दौड़ कर आते,
कोई मुश्किल खड़ी रहती,सभी कुछ छोड़ कर आते,
मगर बोली तुम्हारी......तल्खियत से चूर रहती है,
बताओ किसकी खातिर रस्म सारी तोड़ कर आते??
उर्मिला माधव ...
१३.९.२०१३

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