जुबां शीरीं जो तुम रखते तो हम भी दौड़ कर आते, कोई मुश्किल खड़ी रहती,सभी कुछ छोड़ कर आते, मगर बोली तुम्हारी......तल्खियत से चूर रहती है, बताओ किसकी खातिर रस्म सारी तोड़ कर आते?? उर्मिला माधव ... १३.९.२०१३
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