मैंने ख़ुद को संभाल रख्खा है, हंसके दुनियां को टाल रख्खा है, चश्म-ए-गिरयां नज़र नहीं आते, इतना शीशे में ढाल रख्खा है, उर्मिला माधव.. 12.1.2017
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