Thursday, 4 January 2018

एक शेर

मुहब्बत की तलब सबको.....हसद का कौन तालिब है,
के जिसकी मार का दिल पै अभी तक खौफ़,ग़ालिब है....
उर्मिला माधव....
5.1.2015...

No comments:

Post a Comment