ज़िन्दगी ........दर-ब-दर घुमाती रही, जाने किस-किस का घर दिखाती रही, ख़ुद ही .........हिम्मत को दाद दी मैंने, दुनियां .......बुनियाद पर हिलाती रही.. उर्मिला माधव.. 7.1.2017
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