जब कभी लांघी गईं हैं ....वर्जनाएं, तब सदा आहत हुई हैं ....भावनाएं, क्या परिधियां अर्थ अपने खो चुकीं? बच रहीं बस .....चीत्कारें गर्जनाएं.... #उमिलाधव.... 12.8.2015...
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