Saturday, 11 August 2018

वर्जनाएं

जब कभी लांघी गईं हैं ....वर्जनाएं,
तब सदा आहत हुई हैं ....भावनाएं,
क्या परिधियां अर्थ अपने खो चुकीं?
बच रहीं बस .....चीत्कारें गर्जनाएं....
#उमिलाधव....
12.8.2015...

No comments:

Post a Comment