Tuesday, 28 August 2018

जंजीर करूँ

इस दर्द को क्या तशहीर करूँ,
किस मुंह से कोई तक़रीर करूँ,
ये अब तक है ..तनक़ीह तलब,
क्या लमहे को .....ज़ंजीर करूँ...
उर्मिला माधव
29.8.2015
तशहीर--- ढिंढोरा
तक़रीर---भाषण
तनक़ीह तलब---विचारणीय

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