Saturday, 11 August 2018

होने दो

और थोड़ी सहर तो होने दो,
दिल को रह-रह के ख़ूब रोने दो,
अपनी हस्ती का इम्तहाँ भी लो,
जो भी होता है उसको होने दो.....
उर्मिला माधव
२५.१.२०१३

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