क्या खूब सियासत है,परचम ही झुका डाला , पहले न कभी देखा वो दिन भी दिखा डाला , मजलूम रिआया के हाथों में दिया कासा, और पूरे वतन भर को दरवेश बना डाला.. उर्मिला माधव ३१.८.२०१३
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