Monday, 6 November 2017

ज़ुबाँ समझे

मुहब्बत की ज़ुबां समझे ...न धड़कन की ज़ुबां समझे,
अभी तक हम नहीं समझे,के वो समझे तो क्या समझे?
उर्मिला माधव..
7.11.2016

No comments:

Post a Comment