किसी भी आस्ताने पर...जबीं झुकती नहीं मेरी, जो ग़र कहने पे आ जाऊं ज़ुबां,रूकतीं नहीं मेरी, न जाने क्या समझते हैं जिगर पर चोट करते हैं, मैं क्या बेजान पत्थर हूँ,कि रग दुखती नहीं मेरी?? उर्मिला माधव... 4.11.2015
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