Monday, 13 November 2017

चार मिसरे

:) :) :)
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एक ग़ज़ल लिख्खी जो तुमने कस्टमाइज़,
बस........वहीँ से होगया क्वेश्चन अराइज़,
है बहुत मुमकिन के....हम बे-अक्ल ही हों,
तुम कहाँ साबित हुए.....कोई ख़ास वाइज़ ....!!
उर्मिला माधव...
14.11.2014...

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