मुहब्बत है हमें तुमसे,.ज़रूरत ही नहीं,नईं-नईं, छुड़ा लेंगे तुम्हें तुमसे,..ये सूरत ही नहीं,नईं-नईं, हमारा दिल दुखाने में, ...ज़.माने बीत सकते हैं, ज़रा भी ज़र्क़ आ जाए,वो मूरत ही नहीं,नईं-नईं.. उर्मिला माधव, 29.11.2016
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