ये मेरे शेर और क़तआत ---
Saturday, 25 November 2017
एक मतला
हुजूम-ए-रंज की इफ़रात हुई सब्र गया,
सब्र जब टूट गया ख़्वाब तहे क़ब्र गया,
उर्मिला माधव
26.11.2016
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