ना क़ायल है सितारों की मेरे चेहरे की ताबानी, ग़म-ए-दौराँ में भी देखो तबस्सुम मेरा लासानी, तलातुम चाहे जैसा हो,करेगा क्या उसे फानी..? कि जिसने डूब कर देखा हो ये दरिया-ए-तूफ़ानी..... उर्मिला माधव. १४.११.२०१३..
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